घर की छत से भारतीय टेस्ट टीम तक: पिता की कोचिंग में निखरकर सफेद जर्सी पहनने को तैयार सारांश

Ads

घर की छत से भारतीय टेस्ट टीम तक: पिता की कोचिंग में निखरकर सफेद जर्सी पहनने को तैयार सारांश

  •  
  • Publish Date - July 28, 2026 / 07:20 PM IST,
    Updated On - July 28, 2026 / 07:20 PM IST

(हर्षवर्धन प्रकाश)

इंदौर (मध्यप्रदेश), 28 जुलाई (भाषा) भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंचने का सारांश जैन का सफर किसी क्रिकेट अकादमी से नहीं, बल्कि इंदौर में उनके घर की छत से शुरू हुआ था।

मध्यप्रदेश के ऑलराउंडर सारांश को अगले महीने श्रीलंका में खेली जाने वाली टेस्ट श्रृंखला के लिए पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। उनके चयन के बाद उनके परिवार में जश्न का माहौल है।

सारांश के पिता सुबोध जैन भी मध्यप्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं। जब सारांश छोटे थे, तब सुबोध जैन उन्हें घर की छत पर घंटों अभ्यास कराते थे।

सारांश की मां संगीता जैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘जब भी मेरे पति को समय मिलता था, वह छत पर नेट लगाकर सारांश को अभ्यास करवाते थे। कई बार खेलते समय सारांश के हाथ में चोट लग जाती थी, लेकिन वह कभी पीछे नहीं हटता था। पट्टी बांधकर फिर अभ्यास शुरू कर देता था।’

उन्होंने बताया कि बचपन में सारांश के क्रिकेट अभ्यास से कई बार पड़ोसियों को परेशानी भी होती थी।

बेटे की उपलब्धि पर भावुक मां ने कहा,’छत पर सारांश के अभ्यास से कई बार पड़ोसियों की खिड़कियों के शीशे टूट जाते थे। तब सारांश के पिता कहते थे कि वह नया शीशा लगवा देंगे, लेकिन एक दिन ये ही पड़ोसी इस बच्चे पर गर्व करेंगे।’

सारांश के खेल की एक खूबी उनकी गेंदबाजी और बल्लेबाजी का खास संयोजन भी है। वह दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते हैं और बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं।

सारांश के बड़े भाई सौरभ जैन ने बताया कि बचपन में सारांश दाएं हाथ से बल्लेबाजी करते थे, लेकिन पिता ने उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें बाएं हाथ से बल्लेबाजी के लिए प्रेरित किया।

सौरभ ने कहा,’मैं दाएं हाथ से बल्लेबाजी करता हूं, इसलिए सारांश भी मुझे देखकर दाएं हाथ से खेलता था। लेकिन एक दिन पापा ने देखा कि वह बाएं हाथ से बेहतर खेल रहा है और उसके शॉट अच्छे निकल रहे हैं। तब उन्होंने कहा-बेटा, तू लेफ्टी बल्लेबाज बनेगा।’

पूर्व रणजी खिलाड़ी सुबोध जैन ने कहा कि इन दिनों अक्सर देखा जा रहा है कि आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद खिलाड़ी भारतीय टीम में चुने जाते हैं, लेकिन उनके बेटे ने मुख्य रूप से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना लोहा मनवाकर टीम इंडिया में जगह बनाई है।

उन्होंने कहा,’सारांश मैदान पर एक योद्धा की तरह खेलता है। वह जो ठान लेता है, उसे पूरा करके ही दम लेता है।’

सारांश का परिवार अब उस पल का इंतजार कर रहा है, जब वह भारतीय टीम की सफेद जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेंगे।

भाषा हर्ष जितेंद्र सुधीर

सुधीर