इस्लामाबाद, 28 जुलाई (भाषा) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में तथाकथित विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के कम से कम 14 कार्यकर्ताओं की कानून-प्रवर्तन बलों के साथ हुई झड़पों में मौत हो गई और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। संगठन ने मंगलवार को यह दावा किया।
हालांकि, क्षेत्र के कानून-प्रवर्तन अधिकारियों ने मृतकों की संख्या पर विवाद जताते हुए आरोप लगाया कि जेएएसी के प्रदर्शनकारियों ने पहले सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की।
जेएएसी पिछले महीने से पीओके में तथाकथित क्षेत्रीय विधानसभा की 12 विवादित सीटों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहा है।
संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान इन सीटों का इस्तेमाल अपनी पसंद का प्रधानमंत्री नियुक्त करने के लिए करता है।
भारत ने 14 जुलाई को पीओके में हो रहे प्रदर्शनों को इस्लामाबाद की ओर से उसके जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों में दशकों से जारी ‘‘व्यवस्थित शोषण और प्रशासनिक दमन’’ का सीधा परिणाम बताया था और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की थी।
भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश उसके अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं।
सोमवार को 13 सीटों पर पहले चरण का मतदान हुआ, जिसके दौरान जेएएसी ने रावलकोट से क्षेत्रीय राजधानी मुजफ्फराबाद तक ‘लॉन्ग मार्च’ निकाला।
जेएएसी का दावा है कि सुरक्षा बलों ने लॉन्ग मार्च में शामिल लोगों पर गोलीबारी की, जिसमें उसके कार्यकर्ता मारे गए। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
जेएएसी की कोर समिति के सदस्य आबिद शाहीन ने बीबीसी से कहा कि सोमवार की झड़पों में करीब 12 कार्यकर्ता मारे गए और 20 से अधिक घायल हुए।
समिति के एक अन्य सदस्य इम्तियाज असलम ने मृतकों की संख्या 14 बताते हुए कहा कि इनमें जेएएसी के संस्थापक सदस्य उमर नजीर के छोटे भाई उस्मान नजीर भी शामिल हैं।
शाहीन ने दावा किया कि मृतकों के शव ड्रेक के निकट बनाए गए चिकित्सा शिविर में रखे गए हैं, जहां जेएएसी पिछले डेढ़ महीने से धरना दे रहा है।
जेएएसी ने यह भी कहा कि उसके मार्च में शामिल लोग हथियारबंद नहीं थे और उनके पास केवल लाठियां थीं। हालांकि, पीओके के पुलिस प्रमुख कैप्टन (सेवानिवृत्त) लियाकत अली मलिक ने इस दावे को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के पास आधुनिक हथियार थे और वे सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे थे।
मलिक ने कहा कि जब तक शव बरामद नहीं होते, उनका आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं बनता या पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल नहीं लाया जाता, तब तक मौतों की पुष्टि नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि पिछले महीने जेएएसी के खिलाफ अभियान के दौरान संगठन ने 400 लोगों के मारे जाने का दावा किया था, जबकि आधिकारिक तौर पर केवल पांच मौतें दर्ज की गई थीं।
मलिक ने हालांकि पुष्टि की कि झड़पों के दौरान गोलीबारी में एक रेंजर्स जवान की मौत हुई और दो अन्य घायल हुए। इसके अलावा दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि अंधेरा होने के बाद पहाड़ियों पर मौजूद जेएएसी कार्यकर्ताओं ने उस समय पुलिस और सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की, जब प्रदर्शनकारी रावलकोट की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे।
रावलकोट जिला प्रशासन के एक अधिकारी के अनुसार, करीब 3,000 प्रदर्शनकारी ड्रेक से शहर की ओर बढ़े, जबकि लगभग 2,000 अन्य लोग बस टर्मिनल की ओर से पहुंचे। प्रशासन ने उन्हें शहर में प्रवेश करने से रोक दिया।
पुंछ क्षेत्र में पुलिस ने दावा किया कि प्रतिबंधित जेएएसी से जुड़े सशस्त्र समूहों ने रावलकोट में प्रवेश करने का प्रयास किया और सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की, जिससे दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।
पुलिस ने जेएएसी से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट पर फर्जी वीडियो प्रसारित करने और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर लोगों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया।
हालांकि, जेएएसी की कार्यकारी परिषद के सदस्य शाहीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण लॉन्ग मार्च पर ‘‘बिना उकसावे के गोलीबारी’’ की। उन्होंने कहा कि मार्च मुजफ्फराबाद तक जारी रहेगा।
यह टकराव विधानसभा की 12 शरणार्थी आरक्षित सीटों को समाप्त करने की मांग को लेकर कई सप्ताह से जारी आंदोलन के बीच हुआ है।
जेएएसी ने नौ जून से पूरे पीओके में प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च शुरू किया था। सोमवार की हिंसा से पहले तक अशांति में 40 लोगों की मौत होने का दावा किया गया था, जिनमें 34 प्रदर्शनकारी और छह पुलिस तथा अर्द्धसैनिक बल के जवान शामिल थे।
सरकार ने चुनाव से पहले प्रदर्शन समाप्त कराने के लिए जेएएसी से बातचीत भी शुरू की थी, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका है। सरकार ने पिछले महीने जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया था।
तथाकथित विधानसभा चुनाव का पहला चरण सोमवार को मीरपुर में संपन्न हुआ। मुजफ्फराबाद में दो अगस्त और पुंछ संभाग में 10 अगस्त को मतदान होना है।
अधिकारियों ने कश्मीर क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। इसके अलावा पाकिस्तान में जेएएसी के प्रदर्शनों के मीडिया कवरेज पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की तथाकथित विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें 45 पर सीधे चुनाव होता है, जबकि आठ सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धर्मगुरुओं के लिए आरक्षित हैं।
भाषा राखी नरेश
नरेश