… फिलेम दीपक सिंह …
भुवनेश्वर, 27 जून (भाषा) राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अधिकारियों की गंभीर चूक के कारण महिला 400 मीटर बाधा दौड़ में तमिलनाडु की आर. हर्षिता को शनिवार को अकेले दोबारा दौड़ना पड़ा। इस घटना के कारण वह फाइनल में पहुंचने से भी चूक गयी। हर्षिता ने शुक्रवार को हीट-एक में एक मिनट 01.03 सेकंड का समय निकालकर तीसरा स्थान प्राप्त किया था और प्रारंभिक रूप से फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया था। लेकिन बाद में पता चला कि जिस लेन (आठ) में वे दौड़ रही थीं, उसमें 10 बाधाओं के बजाय केवल नौ ही लगाए गए थे और पांचवीं बाधा गायब थी। दौड़ के दौरान जब हर्षिता चौथी बाधा पार कर रही थीं, तब उन्हें अपनी लेन में अगली बाधा न मिलने पर भ्रम हुआ और उन्होंने बगल की लेन की बाधा पार कर फिर अपनी मूल लेन में लौटकर दौड़ पूरी की। सातवीं लेन की धावक काफी पीछे थी, इसलिए किसी टकराव की स्थिति नहीं बनी। बाद में अधिकारियों ने विश्व एथलेटिक्स नियम 18.7 का हवाला देते हुए उन्हें शनिवार सुबह 9:30 बजे अकेले पुनः दौड़ने का निर्देश दिया। इस बार उनका समय 1:02.54 रहा, जो पहले से धीमा था और वह फाइनल की दौड़ से बाहर हो गईं। हर्षिता ने इसे खेल भावना से स्वीकार करते हुए निराशा व्यक्त की, जबकि एथलेटिक्स महासंघ ने मानवीय भूल की बात मानी। हर्षिता ने पीटीआई से कहा, “मुझे अपनी लेन में चौथी बाधा के बाद कोई बाधा नहीं दिखी, जिससे मैं भ्रमित हो गई थी। मुझे तुरंत निर्णय लेना पड़ा, इसलिए मैंने दूसरी लेन की बाधा पार की और फिर अपनी लेन में वापस आकर दौड़ पूरी की।” उन्होंने कहा कि दौड़ के बाद अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनसे गलती हुई है, जबकि उन्हें स्वयं यह समझ नहीं आया कि उनकी गलती क्या थी। हर्षिता ने कहा, “मैं निराश हूं, लेकिन अब मैं क्या कर सकती हूं? मैं क्वालीफाई नहीं कर सकी। लेकिन ठीक है, मैं आगे होने वाले राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों में बेहतर करूंगी।” भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) के एक अधिकारी ने चूक को स्वीकार करते हुए कहा कि बड़े आयोजनों में मानवीय भूलें हो सकती हैं, लेकिन ऐसी गलतियों से बचना चाहिये। अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा, ‘‘महिला 400 मीटर बाधा दौड़ से ठीक पहले पुरुषों की बाधा दौड़ संपन्न हुई थी, जिसके बाद महिलाओं के लिए बाधाओं की ऊंचाई बदली गई। इसी प्रक्रिया के दौरान संभव है कि लेन-आठ में बाधा लगाने में भ्रम या लापरवाही हो गई हो, जिससे यह गंभीर त्रुटि हुई।” उन्होंने कहा कि जब यह गलती सामने आई तो नियमों के तहत हर्षिता को दोबारा दौड़ने का अवसर दिया गया। भाषा आनन्द आनन्द आनन्द