… कुशान सरकार …
नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने आईसीसी की विवाद समाधान समिति (डीआरसी) को पत्र लिखकर राष्ट्रीय पुरुष टीम के टी20 विश्व कप मुकाबले भारत में कराने के संचालन परिषद के फैसले को पलटने की मांग की है, लेकिन यह अपील सुनी नहीं जाएगी क्योंकि यह मामला उप-समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने भले ही स्कॉटलैंड को ‘स्टैंडबाय’ पर रखा हो, लेकिन पूरी तरह घिर जाने के बाद अमीनुल इस्लाम बुलबुल के नेतृत्व वाला बीसीबी आखिरी विकल्प के तौर पर आईसीसी की डीआरसी के पास पहुंचा। इस समिति के अध्यक्ष इंग्लैंड के माइकल बेलॉफ (किंग्स काउंसिल) हैं। बीसीबी के एक सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर पीटीआई से कहा, “हां, बीसीबी ने डीआरसी का रुख किया है क्योंकि वह अपने सभी विकल्प आजमाना चाहता है। अगर डीआरसी बीसीबी के खिलाफ फैसला देती है तो फिर एकमात्र मंच स्विट्जरलैंड स्थित खेल पंचाट (सीएएस) ही बचेगा।” इससे पहले बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और खेल मंत्रालय के सलाहकार व भारत विरोधी रुख के लिए जाने जाने वाले आसिफ नजरुल ने घोषणा की थी कि “सुरक्षा कारणों” से बांग्लादेश की टीम भारत यात्रा नहीं करेगी। यह बयान उस समय आया था जब अनुभवी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड) के निर्देश पर कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम से हटा दिया गया था। डीआरसी के ‘कार्यक्षेत्र और अधिकार’ को देखा जाए तो यह साफ हो जाता है कि उसके पास आईसीसी निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) के किसी फैसले के खिलाफ अपील सुनने का कोई अधिकार नहीं है। आईसीसी निदेशक मंडल ने स्वतंत्र सुरक्षा आकलन के बाद 14-2 के भारी बहुमत से बांग्लादेश के मैच भारत में ही कराने के पक्ष में मतदान किया था। उस आकलन में सुरक्षा खतरे को “कम से मध्यम” बताया गया था। इसके बावजूद नजरुल का कहना था कि यह फैसला बीसीबी नहीं, बल्कि सरकार को लेना है। डीआरसी के ‘कार्यक्षेत्र और अधिकार’ के अनुच्छेद 1.3 के अनुसार, “समिति आईसीसी या उसके तहत गठित किसी भी निर्णय लेने वाली संस्था के फैसलों के खिलाफ अपीलीय निकाय के रूप में कार्य नहीं करेगी।” आईसीसी बोर्ड के एक सूत्र ने कहा, “बांग्लादेश डीआरसी के पास जा सकता है लेकिन नियमों को देखें तो यह मामला सुना ही नहीं जा सकता क्योंकि समिति को निदेशक मंडल के फैसले के खिलाफ अपील सुनने का अधिकार नहीं है।” यह भी समझा जा रहा है कि आईसीसी अध्यक्ष जय शाह नामीबिया (अंडर-19 विश्व कप) से दुबई लौट आये हैं और बांग्लादेश के संभावित विकल्प को लेकर औपचारिक फैसला शनिवार तक घोषित कर दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार आईसीसी बोर्ड के सदस्य अमीनुल इस्लाम बुलबुल से काफी नाराज हैं। इस नाराजगी की वजह आईसीसी को औपचारिक रूप से जानकारी देने से पहले बांग्लादेश सरकार की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी गई। एक सूत्र ने कहा, “आसिफ नजरुल से आईसीसी को ज्यादा मतलब नहीं है लेकन बुलबुल को आईसीसी को बताए बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस की अनुमति नहीं देनी चाहिए थी।” आईसीसी की डीआरसी ब्रिटिश कानून के तहत काम करती है। माइकल बेलॉफ के नेतृत्व में इसका एक चर्चित फैसला 2018 में आया था। समिति ने तब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड द्वारा बीसीसीआई के खिलाफ दायर सात करोड़ डॉलर के मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया था। यह दावा पाकिस्तान में द्विपक्षीय श्रृंखला नहीं खेलने को लेकर किया गया था। उस फैसले में डीआरसी ने कहा था कि जिसे पीसीबी “समझौता ज्ञापन” बता रहा था, वह दरअसल केवल एक आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) था। यह बीसीसीआई पर बाध्यकारी नहीं था। डीआरसी का काम यह यह जांच करना होता है कि आईसीसी बोर्ड ने नियमों और कानूनों का पालन किया है या नहीं। यह अपील सुनने वाली संस्था नहीं है। माइकल बेलॉफ के अलावा इस 11 सदस्यीय समिति में माइक हीरॉन, जस्टिस विंस्टन एंडरसन, स्वतंत्र वकील डिऑन वैन जाइल, गैरी रॉबर्ट्स, गुओ काई, एनाबेल बेनेट, जीन पॉलसन, पीटर निकोलसन, विजय मल्होत्रा और सैली क्लार्क शामिल हैं। भाषा आनन्द नमितानमिता