मुझे लगा कि पूरे मैच के दौरान गेंद मेरा पीछा कर रही थी, लेकिन ब्रूक का कैच लेकर आनंद आया: अक्षर

Ads

मुझे लगा कि पूरे मैच के दौरान गेंद मेरा पीछा कर रही थी, लेकिन ब्रूक का कैच लेकर आनंद आया: अक्षर

  •  
  • Publish Date - March 6, 2026 / 01:24 PM IST,
    Updated On - March 6, 2026 / 01:24 PM IST

(भरत शर्मा)

मुंबई, छह मार्च (भाषा) भारतीय उप कप्तान अक्षर पटेल ने टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड की सात रन की रोमांचक जीत में बेहतरीन क्षेत्ररक्षण का शानदार नमूना पेश किया और उन्होंने कहा कि इस पूरे मैच के दौरान ऐसा लग रहा था मानो गेंद उनका पीछा कर रही हो।

भारत में सेमीफाइनल में पहुंचने से पहले 13 कैच छोड़े थे लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ उसके क्षेत्ररक्षकों ने अच्छा प्रदर्शन किया। अक्षर पटेल ने खेल के दो अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण चरणों में खतरनाक हैरी ब्रुक और विल जैक्स को आउट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अक्षर ने कवर पोजीशन से 24 मीटर पीछे दौड़कर शानदार कैच लेकर ब्रूक को पवेलियन भेजा। इसके बाद अर्शदीप सिंह की वाइड फुल टॉस गेंद को जैक्स ने डीप पॉइंट की ओर खेला। अक्षर ने अपनी बाईं ओर दौड़कर गेंद को लपका लेकिन सीमा रेखा पर संतुलन नहीं बना पाने के कारण उन्होंने उसे शिवम दुबे की तरफ उछाल दिया।

अक्षर ने कहा, ‘‘जब मैंने हैरी ब्रूक का कैच लिया तो वह बहुत अच्छा कैच था। वह मुश्किल कैच था। लेकिन अगर आप मैच की स्थिति और इंग्लैंड के बल्लेबाजों की बल्लेबाजी को देखें तो विल जैक्स का कैच बहुत महत्वपूर्ण था जिससे उनकी साझेदारी टूट गई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ अगर आप मुझसे फील्डिंग के लिहाज से पूछें तो हैरी ब्रूक का कैच ज्यादा मुश्किल था। (हंसते हुए) आज मुझे लगा कि गेंद मेरा पीछा कर रही है।’’

अक्षर ने तब जैक्स को आउट करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया जब वह जैकब बेथेल के साथ मिलकर साझेदारी निभा रहे थे।

अक्षर को बीच में दो मैच में बाहर रखा गया लेकिन इस ऑलराउंडर को पूरा भरोसा है कि वह फाइनल में खेलेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है इसीलिए मैंने वे दो मैच नहीं खेले (क्योंकि मुझे फाइनल खेलना था)। यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जिसका मैं इतने वर्षों से इंतजार कर रहा था कि आप अपने परिवार के सामने घरेलू मैदान पर मैच खेलें। यह बहुत गर्व का क्षण होता है। मेरा बेटा पहली बार मुझे मैदान पर खेलते हुए देखेगा और यह कुछ ऐसा है जिस पर मुझे बहुत गर्व है।’’

भाषा

पंत

पंत