व्यक्तिगत पदक जीतने पर ध्यान केंद्रित करें भारतीय निशानेबाज: विजय कुमार

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व्यक्तिगत पदक जीतने पर ध्यान केंद्रित करें भारतीय निशानेबाज: विजय कुमार

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  • Publish Date - September 16, 2026 / 01:18 PM IST,
    Updated On - September 16, 2026 / 01:18 PM IST

(अजय मसंद)

नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) ओलंपिक रजत पदक विजेता विजय कुमार का मानना है कि भारतीय निशानेबाजों को जापान में होने वाले एशियाई खेलों में टीम स्पर्धा की बजाय व्यक्तिगत पदक जीतने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

एशियाई खेलों में भारत के 30 निशानेबाज भाग लेंगे। पिस्टल निशानेबाज रहे विजय कुमार का मानना है कि भारतीय खिलाड़ियों के पास पर्याप्त अनुभव है और उनसे सभी स्पर्धाओं में पदक जीतने की उम्मीद की जा सकती है।

विजय ने पीटीआई से कहा, ‘‘भारतीय निशानेबाजी में जबरदस्त सुधार हुआ है और हमारे निशानेबाज अब काफी अनुभवी हैं। उन्होंने इस साल कई पदक जीते हैं। मुझे उम्मीद है कि टीम का हर सदस्य पदक लेकर लौटेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘खिलाड़ियों को हालांकि टीम पदक के बजाय व्यक्तिगत पदक जीतने पर ध्यान देना चाहिए। इससे उनका प्रदर्शन बेहतर और अधिक उल्लेखनीय होगा।’’

भारतीय खिलाड़ियों को चीन से कड़ी चुनौती मिलेगी। विजय ने स्वीकार किया कि चीन अभी भी आगे है।

उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित रूप से, चीन बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। वे जमीनी स्तर पर तैयारी करते हैं और इस मामले में भारत अभी भी पीछे है। युवा खिलाड़ियों की पहचान करना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना जरूरी है। ये ऐसी चीजें हैं जिन पर भारत को ध्यान देने की जरूरत है।’’

विजय ने कहा कि कोचिंग ऐसा विभाग है जिसमें भारत को अभी काफी सुधार करना होगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को कोचिंग स्टाफ में शामिल करने की वकालत की।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि कोचिंग स्टाफ में सुधार की जरूरत है। भारतीय टीम में कई अच्छे कोच हैं, लेकिन व्यवस्था में चापलूसों की भरमार है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।’’

विजय ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले पूर्व खिलाड़ी नए खिलाड़ियों से अच्छा प्रदर्शन करवा सकते हैं। उन्हें कोचिंग स्टाफ में शामिल किया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जिन खिलाड़ियों ने एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और ओलंपिक खेलों में पदक जीते हैं उन्हें कोच बनाया जाना चाहिए। मैं जानता हूं कि भारतीय खेल प्राधिकरण और राष्ट्रीय निशानेबाजी संघ (एनआरएआई) ऐसे कोच की नियुक्ति कर रहे हैं, लेकिन अगर वे 40 कोच की नियुक्ति करते हैं, तो उनमें से 10-15 के पास ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने का अनुभव होता है, जबकि 25 से 30 या लगभग 60 प्रतिशत चापलूस होते हैं।’’

उनका मानना ​​है कि कोचिंग प्रणाली में इस तरह की कमियों का भारतीय निशानेबाजी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

विजय ने कहा, ‘‘अगली पीढ़ी को प्रशिक्षित करने के लिए आपको 50 या 60 कोच की ज़रूरत है, लेकिन उनमें से 20-30 सिर्फ़ समय बिताने के लिए हैं। इससे जो काम एक या दो साल में हो सकता है, उसमें आठ से दस साल लग जाएंगे।’’

एशियाई खेलों में भारत पहली बार कोच जसपाल राणा के बिना हिस्सा लेगा, जिनके निधन से पिस्टल स्पर्धा में खालीपन आ गया है।

विजय ने कहा, ‘‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। वह अच्छे मार्गदर्शक और कोच थे। ऐसे गुण हर किसी में नहीं होते। उन्होंने खिलाड़ियों का समर्थन किया, प्रतिभाओं की पहचान की और महासंघ या सरकार के साथ उनके अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी।’’

भाषा

पंत मोना

मोना