चीन की तरह कामयाब हो सकती है भारतीय महिला हॉकी टीम , बेसिक्स पर फोकस जरूरी : डच दिग्गज ताकेमा

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चीन की तरह कामयाब हो सकती है भारतीय महिला हॉकी टीम , बेसिक्स पर फोकस जरूरी : डच दिग्गज ताकेमा

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  • Publish Date - August 19, 2026 / 04:01 PM IST,
    Updated On - August 19, 2026 / 04:01 PM IST

(मोना पार्थसारथी )

एम्सटेलवीन, 19 अगस्त (भाषा ) नीदरलैंड के महान ड्रैग फ्लिकर ताइके ताकेमा का मानना है कि भारतीय महिला हॉकी टीम ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन की तरह कामयाबी का सफर तय कर सकती है लेकिन फिलहाल फोकस बेसिक्स दुरूस्त रखने और लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिये क्वालीफाई करने पर होना चाहिये ।

पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली चीन की टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा रहे ताकेमा अब भारतीय टीम के ड्रैग फ्लिक कोच हैं और रक्षात्मक ढांचे पर भी काम कर रहे हैं ।

एथेंस ओलंपिक 2004 में रजत पदक जीतने के साथ नीदरलैंड के लिये 221 मैचों में 242 गोल कर चुके ताकेमा को भारत और चीन की टीमों में काफी समानतायें नजर आती हैं ।

उन्होंने भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा ,‘‘ पहले ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करें और फिर पदक की बात करेंगे । जब मैने चीन की टीम में कोच एलिसन एन्नान के साथ काम करना शुरू किया था, तब वे दुनिया में 12वें स्थान पर थे लेकिन फिर पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीता । भारतीय टीम के साथ भी यह संभव है ।’’

भारतीय महिला हॉकी टीम ने एफआईएच विश्व कप में चीन को ड्रॉ पर रोकने के बाद दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया । अब पूल डी के आखिरी मैच में कल उसका सामना इंग्लैंड से होगा । तोक्यो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम पेरिस ओलंपिक के लिये क्वालीफाई नहीं कर सकी थी ।

ताकेमा ने कहा ,‘‘ मैं उम्मीद करता हूं कि यह टीम ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करेगी क्योंकि पेरिस ओलंपिक से भारतीय महिला टीम का बाहर रहना , भारत ही नहीं बल्कि विश्व हॉकी के लिये निराशाजनक था ।’’

उनका मानना है कि भारत को व्यक्तिगत कौशल को बरकरार रखते हुए तकनीकी अनुशासन को आत्मसात करना होगा ।

यह पूछने पर कि भारतीय खिलाड़ियों को क्या सीख देते हैं , उन्होंने कहा ,‘‘ मैं यही कहता हूं कि अपना व्यक्तिगत कौशल मत छोड़ो लेकिन ढांचे में रहकर खेलो । जैसे डच हॉकी छोटे पास और ढांचे पर निर्भर करती है लेकिन कई बार भारतीय खिलाड़ी दौड़ने और व्यक्तिगत कौशल पर अधिक फोकस करते हैं । भारतीयों के कौशल का कोई सानी नहीं और कई बार वे ऐसी चीजें कर जाते हैं कि दूसरी टीमें नहीं कर सकतीं । लेकिन कई बार उन्हें सरल चीजें करने के लिये समझाना मुश्किल हो जाता है । यह सब संतुलन के बारे में है ।’’

पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ इस धुरंधर का मानना है कि यह व्यक्तिगत कौशल नहीं बल्कि टीमवर्क का नतीजा होता है ।

उन्होंने कहा ,‘‘ पीसी का मतलब रिपिटेशन, जो आप पहले से जानते हैं उस पर डटे रहना और उस पर सही अमल करना है । इंजेक्शन, स्टॉप और पुश सभी अहम है लिहाजा यह टीमवर्क है । आपके पास कौशल है और उस कौशल के लिये आपने काफी मेहनत भी की है लेकिन कई बार पेनल्टी कॉर्नर तब्दील करने के लिये किस्मत का साथ भी जरूरी होता है । ’’

भारतीय टीम ने एफआईएच नेशंस कप में पेनल्टी कॉर्नर पर 13 गोल किये थे और ताकेमा ने कहा कि विश्व कप में इस लय को कायम रख सके तो उन्हें बतौर कोच बहुत संतोष होगा ।

उन्होंने कहा ,‘‘ लेकिन विश्व कप में प्रतिस्पर्धा कठिन होने से यह आसान भी नहीं होगा ।’’

भाषा और संस्कृति में फर्क होने के बावजूद ताकेमा ने कहा कि भारतीय टीम से उनका अच्छा तालमेल बन गया है । उन्होंने कहा ,‘‘ भारत और नीदरलैंड बिल्कुल अलग संस्कृति है लेकिन लड़कियां मुझसे खुलकर बात करती हैं । उन्हें हॉकी खेलने और सीखने में मजा आता है और मुझे यही चाहिये ।’’

भारत के सर्वश्रेष्ठ पुरूष ड्रैग फ्लिकर के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा ,‘‘हरमनप्रीत बहुत शानदार है । मेरे दौर में संदीप सिंह था और उससे पहले जुगराज सिंह जिसका कैरियर दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना के बाद खत्म हो गया ।’’

भाषा मोना पंत

पंत