(अजय मसंद)
नागोया, 22 सितंबर (भाषा) भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पी टी उषा ने मंगलवार को आइची-नागोया एशियाई खेलों के आयोजकों के पारंपरिक खेल गांव तैयार नहीं करने पर सवाल उठाए और खुलासा किया कि उन्होंने और आयोजन की समन्वय समिति के कई अन्य सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई थी।
भारत की सबसे सफल एथलीटों में से एक उषा ने कहा कि खेल गांव की व्यवस्था केवल आवास तक सीमित नहीं थी बल्कि इससे अलग-अलग देश के खिलाड़ियों को एक साथ रहने का मौका मिलता था।
आइची-नागोया खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को अलग-अलग स्थानों पर ठहराया जा रहा है और एक विशेष रूप से निर्मित गांव के बजाय एक क्रूज जहाज को मुख्य आवास सुविधा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
खेलों के आयोजकों ने इस प्रयोग के प्राथमिक कारणों के रूप में लागत और स्थिरता का हवाला दिया है, जिस पर लोगों की राय बंटी हुई है।
उषा से जब पारंपरिक खेल गांव तैयार नहीं करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘असल में सभी ने आपत्ति जताई है। अधिकतर देशों ने इस पर आपत्ति जताई है। मैंने भी इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं ऐसा इसलिए कह रही हूं क्योंकि मैंने 1982 से अब तक अधिकतर खेल गांव को देखा है। यह खेल गांव जहाज और इसी तरह की अन्य चीजों से बिल्कुल अलग होते हैं। मुझे लगता है कि यहां तक कि ओसीए (एशियाई ओलंपिक परिषद) भी ऐसा नहीं चाहती थी, लेकिन किसी न किसी तरह उन्हें इसे स्वीकार करना ही पड़ा।’’
समन्वय समिति की सदस्य उषा ने कहा कि खेल गांव की व्यवस्था का इसलिए समर्थन किया जा रहा है क्योंकि इससे खिलाड़ियों के बीच आपसी संवाद की संभावना बढ़ती है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं समन्वय समिति की सदस्य थी और समन्वय टीम के अधिकांश सदस्यों ने आपत्ति जताई थी। हम खेल गांव वाली व्यवस्था चाहते थे क्योंकि यह हमेशा अच्छी होती है। खेल गांव में खिलाड़ी एक दूसरे से मिल सकते हैं और आपस में बातचीत कर सकते हैं।’’
कई एशियाई खेलों, ओलंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों में प्रतिस्पर्धा कर चुकी उषा ने कहा कि पहले के संस्करणों के संक्षिप्त स्वरूप में कई खेलों का अनुभव करना आसान रहता था।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे समय में भले ही बहुत सी सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन आयोजन स्थल बहुत पास थे। अगर आप एक स्थल से दूसरे स्थल पर जाना चाहते थे, तो यह बहुत आसान था। तब हम कई खेल का आनंद ले सकते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है और मैं केवल एक ही खेल को देखने के लिए जा सकती हूं।’’
उषा को एथलेटिक्स प्रतियोगिता का विशेष रूप से बेसब्री से इंतजार है। यही वह खेल है जिसने उन्हें भारत में घर-घर में मशहूर कर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं बेहद रोमांचित हूं। एथलेटिक्स देखना मुझे बेहद पसंद है। एथलेटिक्स में कोई भी स्पर्धा हो, मुझे देखना अच्छा लगता है। मैं चाहती हूं कि भारतीय खिलाड़ी और पदक जीतें और अच्छा प्रदर्शन करें।’’
भारत 2030 में अहमदाबाद में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करने जा रहा है और उषा ने कहा कि देश को इस प्रतियोगिता में अमिट छाप छोड़नी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘2030 के बाद, जब खिलाड़ी और खेल देखने आए सभी लोग चले जाएंगे, तो उन्हें ये खेल हमेशा के लिए याद रहने चाहिए। भारत की यही योजना है।’’
भाषा
पंत नमिता
नमिता