नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) एशियाई खेलों के लिए भारतीय पुरुष 10 मीटर एयर पिस्टल टीम में जगह बनाने वाले निशानेबाज कमलजीत और उनके परिवार ने उनके करियर के शुरुआती दौर में आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन परिवार के त्याग और संघर्ष ने आखिरकार उन्हें देश के शीर्ष निशानेबाजों की श्रेणी में पहुंचा दिया।
अब 22 वर्षीय कमलजीत एशियाड में खेलने के सपने को साकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
कमलजीत ने सबसे पहले 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 2023 में जूनियर विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद इस साल नयी दिल्ली में हुई एशियाई चैम्पियनशिप में व्यक्तिगत रजत पदक जीतकर उन्होंने सीनियर स्तर पर भी अपनी जगह मजबूत की।
हालांकि कमलजीत ने बेहद प्रतिस्पर्धी 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में अपनी असली पहचान बनाई। घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने अगले महीने जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई।
कमलजीत ने कहा, ‘‘हम एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं, लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे कभी निशानेबाजी नहीं छोड़ने दी। शुरुआती दिनों में कोर्स की फीस और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का खर्च मुझे खुद उठाना पड़ता था। कई बार लगा कि मैं 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा जारी नहीं रख पाऊंगा। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘उस पैसे की भरपाई करने में मुझे दो से तीन साल लग गए, लेकिन मेरे परिवार ने कभी कोई सवाल नहीं किया। उन्होंने मुझे आगे बढ़ने के लिए हर जरूरी सहयोग दिया। ’’
हरियाणा के रेवाड़ी के रहने वाले कमलजीत पहले ट्रैक एवं फील्ड एथलीट बनना चाहते थे, लेकिन चोट के कारण उनका एथलेटिक्स करियर समाप्त हो गया।
इसके बाद उन्होंने 2019 में निशानेबाजी शुरू की। तब से उन्होंने भारत के प्रमुख 50 मीटर पिस्टल निशानेबाजों में अपनी पहचान बनाई है और अब 10 मीटर एयर पिस्टल में भी पूरी तरह निपुर्ण हो चुके हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ट्रैक एवं फील्ड से निशानेबाजी में बदलाव के लिए घर से मजबूत समर्थन मिलना बेहद जरूरी था। मेरा सिर्फ एक निशानेबाजी कोच है, जिन्होंने मुझे शुरुआत से सब कुछ सिखाया। वह मेरे ही गांव के हैं इसलिए हमारा रिश्ता परिवार जैसा है। मेरे कोच और घर पर मेरे चाचा ने इस पूरे सफर में मुझे मजबूत समर्थन दिया। ’’
भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) की चयन नीति के कारण 10 मीटर एयर पिस्टल के विश्व चैंपियन सम्राट राणा और विश्व चैम्पियनशिप के कांस्य पदक विजेता वरुण तोमर एशियाई खेलों की टीम में जगह नहीं बना सके। ऐसे में एशियाई खेलों में अच्छे प्रदर्शन की जिम्मेदारी अब कमलजीत, केदारलिंग उचागांवे और आकाश भारद्वाज पर होगी।
कमलजीत ने कहा, ‘‘पहले मुझे रोजमर्रा के खर्च पूरे करने में भी काफी संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के सहयोग और प्रायोजन ने मेरा बहुत बड़ा बोझ उतार दिया। ’’
भाषा नमिता मोना
मोना