पिछले साल पता ही नहीं था कि वापसी कर पाऊंगी या नहीं, इस प्रदर्शन से आत्मविश्वास बढा : दीपिका

पिछले साल पता ही नहीं था कि वापसी कर पाऊंगी या नहीं, इस प्रदर्शन से आत्मविश्वास बढा : दीपिका

पिछले साल पता ही नहीं था कि वापसी कर पाऊंगी या नहीं, इस प्रदर्शन से आत्मविश्वास बढा : दीपिका
Modified Date: June 25, 2026 / 08:11 am IST
Published Date: June 25, 2026 8:11 am IST

(मोना पार्थसारथी)

नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) पिछले साल चोट के कारण एशिया कप के लिये रवानगी से ठीक पहले टीम से बाहर हुई दीपिका को पता नहीं था कि अब मैदान पर कब लौट सकेगी लेकिन एफआईएच नेशंस कप में मिली खिताबी जीत में सबसे ज्यादा छह गोल करके भारतीय महिला हॉकी की इस स्टार ड्रैग फ्लिकर ने लय और आत्मविश्वास दोनों हासिल कर लिये ।

न्यूजीलैंड में एफआईएच नेशंस कप जीतकर भारतीय महिला हॉकी टीम ने प्रो लीग में वापसी की है जिससे पिछले सत्र में वह बाहर हो गई थी । पूरी तरह फिट होकर लौटी दीपिका ने इस टूर्नामेंट में अमेरिका की एशले सेसा के साथ सर्वाधिक छह गोल दागे ।

दीपिका ने भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा ,‘‘मैने पूरी तरह फिट होकर वापसी नेशंस कप में ही की है । काफी समय बाद इस स्तर पर खेला है तो शुरू में थोड़ी नर्वस थी कि कैसे कर पाऊंगी । अच्छा टूर्नामेंट रहा और चोट के बाद वापसी के बाद इस प्रदर्शन से आत्मविश्वास बढा है ।’’

पिछले साल अगस्त में एशिया कप के लिये रवानगी से एक दिन पहले आखिरी अभ्यास सत्र में पैर फिसलने से उन्हें ग्रेड तीन हैमस्ट्रिंग टियर (घुटने के पीछे की मांसपेशी में चोट) हो गया था ।

दीपिका अप्रैल में चार मैचों के अर्जेंटीना दौरे पर भारतीय टीम में थी लेकिन रिहैबिलिटेशन में होने के कारण ज्यादा नहीं खेली। इससे पहले मार्च में हैदराबाद में विश्व कप क्वालीफायर भी वह नहीं खेल सकी थी । जनवरी में वह एचआईएल में चैम्पियन एसजी पाइपर्स टीम का हिस्सा थी लेकिन पूरी तरह वापसी नहीं थी ।

वर्ष 2025 में हॉकी इंडिया के सर्वश्रेष्ठ उदीयमान खिलाड़ी का पुरस्कार जीतने वाली दीपिका ने कहा ,‘‘ हॉकी से दूर रहने का समय मेरे लिये बहुत कठिन था । मुझे गुस्सा आता था और मैं रोती थी कि टीम से बाहर क्यो हूं । अर्जेंटीना और आस्ट्रेलिया दौरे पर भी रिहैब में थी और नेशंस कप से ही सही मायने में वापसी हुई है ।’’

उन्होंने वापसी का श्रेय कोच शोर्ड मारिन, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच वेन लोम्बार्ड और ट्रेनर को दिया ।

बाईस वर्ष की इस खिलाड़ी ने कहा ,‘‘पिछले साल ऐसी चोट लगी थी कि वापसी के बारे में पता ही नहीं था । लेकिन अगर मैं फॉर्म में वापसी कर सकी और खेल सकी हूं तो इसका श्रेय कोच शोर्ड, वेन, ट्रेनर कियारा और रोडेट को जाता है जिन्होंने अच्छा रिहैब कराया और काफी मेहनत की है ।’’

हरियाणा की इस स्ट्राइकर ने कहा ,‘‘ कोच शोर्ड ने आने के बाद कम समय में टीम को खड़ा किया है जो आसान नहीं था । उन्होंने बहुत मेहनत की है और खिलाड़ियों ने पूरा साथ दिया है । कोचिंग स्टाफ की जितनी तारीफ करें, कम है।’’

उन्होंने ड्रैग फ्लिक के लिये नीदरलैंड के ताइके ताकेमा के साथ विशेष शिविर को भी श्रेय देते हुए कहा कि विरोधी टीमों के वीडियो विश्लेषण से उन्हें काफी मदद मिली ।

दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकरों में गिने जाने वाले ताकेमा मई में आस्ट्रेलिया दौरे पर और नेशंस कप में भी टीम के साथ थे ।

दीपिका ने कहा ,‘‘ उनके साथ ड्रैग फ्लिक शिविर का अनुभव काफी अच्छा रहा । हमने न सिर्फ ड्रैग फ्लिक पर काम किया बल्कि दूसरी टीमों के वीडियो भी देखे कि उनके पहले रशर कैसे आ रहे हैं या गोलकीपर का मूवमेंट क्या है । इससे मुझे काफी मदद मिली है कि कहां शॉट मारना है ।’’

उन्होंने आगे कहा ,‘‘ मुझे कहा गया था कि खुद को रिलैक्स रखना है और ज्यादा दबाव नहीं लेना है । अपने कौशल पर भरोसा रखना है और नतीजा खुद ब खुद आयेगा । हम पिछड़ भी रहे हों तो भी आराम से ड्रैग फ्लिक लेना है।’’

उन्होंने कहा कि गोल भले ही उनके खाते में गए हों लेकिन टीम प्रयासों के बिना यह संभव नहीं था ।

उन्होंने कहा ,‘‘एक स्ट्राइकर और ड्रैग फ्लिकर होने के नाते मेरी गोल करने की जिम्मेदारी है । लेकिन टीम के सहयोग के बिना यह संभव नहीं है क्योंकि पेनल्टी कॉर्नर बनाने पर ही अपना कौशल दिखा सकती हूं। टीम ने मुझे पूरा सहयोग किया है ।’’

दीपिका ने कहा ,‘‘ हमारे लिये बहुत जरूरी था यह टूर्नामेंट जीतना क्योंकि प्रो लीग में जाकर ही बड़ी टीमों के साथ खेलने का अनुभव मिलता है । उनके साथ खेलकर ही पता चलता है कि हम कहां ठहरते हैं और किन पहलुओं पर काम करना है । हम जीत के इरादे से ही गए थे और खिताब मिलने की खुशी अलग ही है ।’’

दीपिका ने कहा कि टीम विश्व कप और एशियाई खेलों में भी इस लय को कायम रखने के इरादे से खेलेगी ।

उन्होंने कहा ,‘‘ इस साल हमने विश्व कप के लिये क्वालीफाई किया , नेशंस कप के जरिये प्रो लीग में लौटे हैं तो उम्मीदें बढ जाती है । हम भी उन पर खरे उतरने के लिये तैयार हैं और अगले दो बड़े टूर्नामेंटों (विश्व कप और एशियाड )में अच्छे नतीजे लेकर आयेंगे ।’’

भाषा मोना

पंत

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