ओलंपिक जैसी प्रतियोगिताओं में मानसिक मजबूती सबसे अहम होती है: अंगद

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ओलंपिक जैसी प्रतियोगिताओं में मानसिक मजबूती सबसे अहम होती है: अंगद

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  • Publish Date - May 23, 2021 / 03:45 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:22 PM IST

नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके भारतीय स्कीट निशानेबाज अंगद वीर सिंह बाजवा का मानना है कि वह जब बेहद दबाव वाले तोक्यो खेलों की निशानेबाजी रेंज पर उतरेंगे जो सब कुछ मानसिक मजबूती पर निर्भर करेगा।

अंगद तोक्यो में मेराज अहमद खान के साथ स्कीट निशानेबाजी स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के मीडिया विभाग द्वारा पोस्ट वीडियो में ओलंपिक की तैयारी के बारे में पूछे जाने पर अंगद ने कहा, ‘‘ओलंपिक जैसी प्रतियोगिताओं में सब कुछ इस पर निर्भर करता है कि आप मानसिक रूप से कितने मजबूत हैं और आप दबाव में कैसा प्रदर्शन करते हैं।’’

अधिकतर निशानेबाजों की तरह अंगद ने भी इतने बड़े टूर्नामेंट में जाने से पहले मनोवैज्ञानिक और मानसिक ट्रेनर की भूमिका पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘काफी चीजें जुड़ी हुई हैं और मनोवैज्ञानिक का होना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि एकाग्र चित्त और धैर्यवान रहने के लिए आपको उनके मार्गदर्शन की जरूरत होती है।’’ अंगद ने 2019 में दोहा में एशियाई चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन की बदौलत तोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया जहां उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। और अब वह अपने पहले ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करने को बेताब हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम ओलंपिक के लिए तैयार हैं और हमारा लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ देना है। उम्मीद करते हैं कि हम अधिक से अधिक पदक जीतकर भारत को गौरवांवित करेंगे।’’ अंगद ने 2018 एशियाई शॉटगन चैंपियनशिप के फाइनल में 60 में से 60 का परफेक्ट स्कोर बनाकर स्कीट फाइनल का विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

अंगद और मेराज फिलहाल इटली में ट्रेनिंग कर रहे हैं जबकि तोक्यो जाने वाले 13 राइफल और पिस्टल निशानेबाज पड़ोसी देश क्रोएशिया में ट्रेनिंग और प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं।

कोविड- 19 महामारी के कारण पिछले साल स्थगित किए गए तोक्यो ओलंपिक का आयोजन 23 जुलाई से आठ अगस्त के बीच किया जाएगा।

भाषा सुधीर आनन्द

आनन्द