मीराबाई ने एशियाई खेलों का सूखा खत्म कर जीता रजत, स्कीट के कांस्य ने निशानेबाजी में बचाई लाज

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मीराबाई ने एशियाई खेलों का सूखा खत्म कर जीता रजत, स्कीट के कांस्य ने निशानेबाजी में बचाई लाज

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 06:16 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 06:16 PM IST

(फिलेम दीपक सिंह और अजय मसंद)

नागोया, 23 सितंबर (भाषा) दिग्गज भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने बुधवार को यहां एशियाई खेलों में रजत पदक जीतकर महाद्वीपीय लंबे समय से चले आ रहे पदक के सूखे को खत्म किया जबकि निशानेबाजी में स्कीट टीमों के दो कांस्य पदकों के बावजूद भारत का अभियान उतार-चढ़ाव भरा रहा।

वर्ष 2014 से एशियाई खेलों में पदक का इंतजार कर रहीं मीराबाई ने महिला 49 किग्रा वर्ग में कुल 198 किग्रा (88 किग्रा स्नैच और 111 किग्रा क्लीन एवं जर्क) वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया। यह रजत एशियाई खेलों में 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के रजत पदक के बाद भारोत्तोलन में भारत का पहला पदक भी है।

कुल मिलाकर भारत के लिए बुधवार को कांस्य पदकों की बारिश हुई। पुरुष बैडमिंटन टीम, सॉफ्ट टेनिस खिलाड़ी जय मीणा तथा पुरुष और महिला स्कीट टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया।

पिछले दो एशियाई खेलों में पदक से चूकने वाले मीणा ने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की और इस खेल में एशियाई खेलों का पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। सॉफ्ट टेनिस में पारंपरिक लॉन टेनिस की तुलना में नरम रबर की गेंद और काफी हल्के रैकेट इस्तेमाल होते हैं।

मीणा ने तुकोया कुरोसाका से 2-4 से हारने के बावजूद कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। मीणा को 45 मिनट तक चले मुकाबले में कुरोसाका के खिलाफ 3-5, 1-4, 1-4, 4-1, 6-4, 1-4 से हार गए।

बत्तीस वर्षीय मीराबाई जब भी प्रतिस्पर्धा करती हैं तो सुर्खियों में रहती हैं। तोक्यो ओलंपिक 2021 की रजत पदक विजेता मीराबाई ने सहज मुस्कान के साथ भारी वजन उठाया और बाद में कहा कि उनका ‘जीवन अब पूरा हो गया है।’

हालांकि निशानेबाजी रेंज में ऐसा संतोष नजर नहीं आया जहां दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर, सुरुचि सिंह और ईशा सिंह जैसी अधिक चर्चित भारतीय महिला पिस्टल निशानेबाजों के 10 मीटर एयर पिस्टल की टीम और व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पदक जीतने में नाकाम रहने के बाद स्कीट निशानेबाजों ने भारत की लाज बचाई।

मनु ही व्यक्तिगत फाइनल के लिए क्वालीफाई कर सकीं लेकिन वह पांचवें स्थान पर रहीं। पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता 24 वर्षीय मनु बाद में भावुक हो गईं और जून में अपने बचपन के कोच जसपाल राणा की अचानक हुई मौत से उन पर पड़े भावनात्मक असर के बारे में बताया।

स्कीट में पुरुष और महिला टीम के कांस्य पदकों ने निशानेबाजी में भारत को पूरी तरह खाली हाथ रहने से बचाया।

महिला टीम में रेजा ढिल्लों, माहेश्वरी चौहान और परिनाज धालीवाल शामिल थीं। तीनों ने 331 अंक जुटाकर तीसरा स्थान हासिल किया। चीन ने 357 अंक के साथ स्वर्ण और कजाखस्तान ने 336 अंक के साथ रजत पदक जीता। रेजा और परिनाज ने व्यक्तिगत फाइनल में भी जगह बनाई लेकिन पोडियम तक नहीं पहुंच सकीं।

पुरुष स्पर्धा में अनंतजीत सिंह नरूका (119), अनुभवी मैराज अहमद खान (116) और भवतेग सिंह गिल (111) ने कुल 346 अंक के साथ टीम कांस्य पदक जीता। इनमें अनंतजीत व्यक्तिगत फाइनल में पहुंचे जहां वह चौथे स्थान पर रहे।

इस बीच वुशु खिलाड़ी रोशिबिना देवी नाओरेम ने महिलाओं के 60 किग्रा वर्ग के फाइनल में जगह बनाकर स्वर्ण पदक की उम्मीद कायम रखी। उन्होंने यहां आइची प्रांत मार्शल आर्ट्स हॉल में इंडोनेशिया की थानिया कुसुमनिंगतास को 2-0 से हराया।

फाइनल में उनका सामना चीन की शियाओयू झांग से होगा। 25 वर्षीय रोशिबिना ने पिछली दो प्रतियोगिताओं में एक रजत और एक कांस्य पदक जीता था।

लक्ष्य सेन और आयुष शेट्टी अपने से बेहतर रैंकिंग वाले प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके जिससे भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम को सेमीफाइनल में चीन के हाथों 1-3 से हार के बाद कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

भारत ने 2023 में हांगझोउ में हुए पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था। तब भी भारतीय टीम को फाइनल में चीन के खिलाफ ही हार का सामना करना पड़ा था।

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ही भारत की ओर से एकमात्र जीत दर्ज कर सकी।

भारत के सेमीफाइनल तक के सफर के दौरान शानदार प्रदर्शन करने वाले दुनिया के 14वें नंबर के खिलाड़ी लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके और पहले एकल मुकाबले में दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी शी यू कि के खिलाफ 16-21, 18-21 से हार गए जिससे भारत 0-1 से पिछड़ गया।

इसके बाद सात्विक और चिराग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पेरिस ओलंपिक के रजत पदक विजेता और मौजूदा विश्व चैंपियन लियांग वेई केंग और वांग चांग की जोड़ी को 21-11, 22-20 से हराया।

भारत की उम्मीदें युवा आयुष शेट्टी पर टिकी थीं लेकिन दुनिया के 20वें नंबर के इस खिलाड़ी को दुनिया के 12वें नंबर के ली शी फेंग के खिलाफ दूसरे एकल मैच में 19-21, 13-21 से हार का सामना करना पड़ा जिससे भारत 1-2 से पीछे हो गया।

इसके बाद भारत को मुकाबले में बनाए रखने की जिम्मेदारी हरिहरन अम्साकरुणन और एमआर अर्जुन की पुरुष युगल जोड़ी पर थी लेकिन उन्हें हे जी टिंग और लियू यी की जोड़ी ने 21-16, 17-21, 21-9 से हराकर चीन को मुकाबले में जीत दिलाई और फाइनल में जगह पक्की की।

हालांकि भारतीय पुरुष टीम के लिए यह एक सराहनीय परिणाम रहा क्योंकि उसने 40 साल में पहली बार लगातार दो एशियाई खेलों में टीम स्पर्धा का पदक जीता है। इससे पहले भारत ने 1982 और 1986 के एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया था।

हरमीत देसाई और यशस्विनी घोरपड़े तथा मानुष शाह और दीया चितले की भारतीय जोड़ियों ने टेबल टेनिस की मिश्रित युगल स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।

विश्व रैंकिंग में सातवें स्थान पर काबिज चितले और शाह की जोड़ी ने श्रीलंका और मालदीव की जोड़ियों के खिलाफ 3-0 की जीत दर्ज करते हुए अंतिम आठ में जगह बनाई।

प्री क्वार्टर फाइनल में शाह और चितले ने मूसा अहमद और आइशत नजीम की मालदीव की जोड़ी को 11-0, 11-7, 11-6 से हराया। अब बृहस्पतिवार को क्वार्टर फाइनल में उनका सामना हांगकांग की डू होई किम और वोंग चुन टिंग की जोड़ी से होगा। यह मुकाबला जीतने पर भारतीय जोड़ी का पदक पक्का हो जाएगा।

देसाई और घोरपड़े का सामना लिन शिदोंग और कुआई मैन की चीन की विश्व रैंकिंग में छठे स्थान पर काबिज जोड़ी से होगा। भारतीय जोड़ी को बुधवार को हांगकांग और मालदीव की जोड़ियों के खिलाफ कड़े मुकाबलों में जीत मिली।

शुरुआती मुकाबले में देसाई और घोरपड़े को मालदीव के मोहम्मद इस्माइल और फातिमत अली ने निर्णायक गेम तक खींचा लेकिन भारतीय जोड़ी ने 9-11, 11-6, 11-7, 9-11, 11-6 से जीत दर्ज की।

इसके बाद उन्हें हांगकांग की विंग लाम एनजी और क्वान तो यियू के खिलाफ चार गेम में 11-6, 11-5, 10-12, 11-7 से मुकाबला अपने नाम किया।

अभय सिंह, वीर चोटरानी और तन्वी खन्ना ने स्क्वाश प्रतियोगिता में अपने-अपने एकल मुकाबलों में आसान जीत दर्ज करके अंतिम 16 में जगह बना ली।

दूसरी वरीयता प्राप्त अभय ने पुरुष एकल के शुरुआती दौर के मुकाबले में थाईलैंड के अरकरादेत अरकराहिरुन्या के खिलाफ सिर्फ तीन अंक गंवाए। उन्होंने 11-1, 11-0, 11-2 से जीत दर्ज की।

चोटरानी ने अंतिम 32 के मुकाबले में श्रीलंका के शामिल वकील को 11-8, 11-3, 11-3 से हराया।

महिला एकल में तन्वी ने शुरुआती दौर में दक्षिण कोरिया की दामी किम को 11-5, 11-7, 11-5 से शिकस्त दी।

ड्रैग फ्लिकर दीपिका के रिकॉर्ड नौ गोल की मदद से भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपना अजेय अभियान जारी रखते हुए पूल बी के मैच में थाईलैंड को 20 . 1 से हराया ।

भारत के लिये दीपिका ने (दूसरा, आठवां, नौवां, 24वां, 33वां, 36वां, 39वां, 51वां और 57वां मिनट ) ने पेनल्टी कॉर्नर पर नौ गोल दागे । अनुभवी फॉरवर्ड नवनीत कौर ने चार (चौथा मिनट, 29वां, 35वां और 51वां ) और रूतुजा पिसाल ने तीन (10वां, 11वां और 47वां ) गोल किये ।

वहीं अनुभवी मिडफील्डर नेहा (19वां), लालरेम्सियामी (26वां), साक्षी राणा (29वां) और कप्तान सलीमा टेटे (45वां) ने एक एक गोल किये ।

भारत ने कबड्डी में भी अपना दबदबा जारी रखा। पुरुष और महिला दोनों टीम ने ग्रुप चरण के मुकाबलों में क्रमश: बांग्लादेश और ईरान के खिलाफ जीत दर्ज की।

भाषा सुधीर नमिता

नमिता