अच्छी ड्रैग फ्लिकर बनने के पीछे कुश्ती की विरासत, तीन दिग्गजों का मार्गदर्शन: दीपिका

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अच्छी ड्रैग फ्लिकर बनने के पीछे कुश्ती की विरासत, तीन दिग्गजों का मार्गदर्शन: दीपिका

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 05:16 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 05:16 PM IST

(मोना पार्थसारथी)

नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) एशियाई खेलों में तीन मैचों में 20 गोल करने के साथ एक मैच में सर्वाधिक नौ गोल का रिकॉर्ड बनाने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार ड्रैग फ्लिकर दीपिका ने कहा कि परिवार में कुश्ती की विरासत ने उन्हें ताकत दी लेकिन कौशल के पीछे उनकी मेहनत और तीन दिग्गजों का मार्गदर्शन है।

एशियाई खेलों में थाईलैंड के खिलाफ पूल बी के मैच में 20 . 1 से मिली जीत में रिकॉर्ड नौ गोल करने वाली दीपिका ने उजबेकिस्तान के खिलाफ पहले मैच में आठ गोल का अपना ही रिकॉर्ड बेहतर किया ।

उन्होंने जापान के काकामिगाहारा से भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा ,‘‘पहले मैच में आठ गोल किये तो भी मुझे पता ही नहीं था कि रिकॉर्ड बना है। मैं बस ये सोच रही थी कि जितने पेनल्टी कॉर्नर मिले हैं, उन पर गोल करने हैं। जब साथी खिलाड़ियों ने बताया तब पता चला कि रिकॉर्ड बनाया है ।’’

23 वर्ष की इस खिलाड़ी ने कहा ,‘‘ इस मैच में भी मुझे नहीं पता चला कि मैने कितने गोल किये । मैच के बाद ‘टीम हडल’ में कोच शोर्ड मारिन ने बधाई दी और कहा कि मैने अपना ही विश्व रिकॉर्ड बेहतर किया है ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ खेलते समय दिमाग में नहीं रहता कि कितने गोल किये हैं । फोकस इसी पर रहता है कि हर बार लक्ष्य हासिल करना है और उसके बाद अगले लक्ष्य की ओर बढना है ।’’

दीपिका ने एक अच्छी ड्रैग फ्लिकर बनने का श्रेय बचपन के कोच आजाद सिंह, भारत के बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर रहे रूपिंदर पाल सिंह और भारतीय महिला हॉकी ड्रैग फ्लिकरों के साथ काम कर रहे डच धुरंधर ताइके ताकेमा को दिया ।

उन्होंने कहा ,‘‘ आजाद सर को लगा कि मैं ड्रैग फ्लिकर बन सकती हूं क्योंकि पहलवानों के परिवार होने के कारण ताकत तो कुदरती थी । रूपिंदर भैया ने ड्रैग को समझाया और बेसिक्स वहीं से स्पष्ट हुए । ताकेमा ने और वैरिएशन और फुटवर्क और मानसिक पहलू पर भी काम किया । इन तीनों का अहम रोल रहा है मेरे कैरियर में ।’’

दीपिका के पिता चाहते थे कि वह भी परिवार की परंपरा का पालन करके कुश्ती खेले और उन्हें उनके भाई के साथ हिसार में साइ केंद्र ले जाते थे लेकिन आठ साल की उम्र में मैदान पर लड़कियों को हॉकी खेलते देखकर उनकी रूचि जगी ।

यह पूछने पर कि क्या कुश्ती में भी इतनी कामयाब होती , उन्होंने कहा ,‘‘अगर हॉकी नहीं खेलती तो कुश्ती खिलाड़ी ही होती । लेकिन हॉकी ने इतना कुछ दिया है तो कह नहीं सकती कि कुश्ती में इस स्तर पर खेलती या कामयाब होती या नहीं । यह जरूर कह सकती हूं कि कुश्ती की पृष्ठभूमि ने काफी मदद की ।’’

उन्होंने कहा कि ताकत उन्हें जींस में मिली लेकिन कौशल को उन्होंने मेहनत से निखारा है ।

उन्होंने कहा ,‘सिर्फ ताकत ही काफी नहीं है , कौशल , निरंतरता और अनुशासन बहुत जरूरी है । पिछले साल मैं बड़ी चोट से जूझकर लौटी हूं और चोट के बाद वापसी भी अहम है। काफी साल लग जाते हैं एक अच्छा ड्रैग फ्लिकर बनने में।’’

पिछले साल पैर की मांसपेशी की चोट (ग्रेड तीन) के कारण काफी समय मैदान से दूर रही दीपिका ने इस साल एफआईएच नेशंस कप में छह गोल करके वापसी की और खिताबी जीत में सूत्रधार की भूमिका निभाई ।

यह पूछने पर कि क्या जापान के खिलाफ अगले मैच में दस गोल करने का लक्ष्य होगा, उन्होंने कहा ,‘‘जापान अच्छी टीम है और हम अपना सर्वश्रेष्ठ करके अच्छे अंतर से जीतने की कोशिश करेंगे ।’’

पिछले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में हुए विश्व कप में भारतीय महिला हॉकी टीम ऐतिहासिक पांचवें स्थान पर रही थी और दीपिका ने कहा कि उस अनुभव से काफी कुछ सीखा और टीम ने उस लय को कायम रखा है ।

उन्होंने कहा ,‘ विश्व कप बहुत अच्छा रहा और बड़ी टीमों के खिलाफ अच्छा खेलकर काफी सीखने को मिला । ताकेमा बार बार जोर देते हैं कि मुझे रिलैक्स रहकर खेलना है और शांत रहकर फैसला लेना है । इससे मुझे फायदा मिला है ।’’

दीपिका ने कहा ,‘‘उन्होंने यह भी कहा कि हर मैच एक सा नहीं होता और अगर गोल नहीं भी हो पा रहे हैं तो भी तनाव नहीं लेना है और यही कोच भी कहते हैं। हम एक टीम के रूप में खेल रहे हैं और यही सफलता की कुंजी है ।अच्छी बात यह है कि टीम को भरोसा है कि दीपू है तो गोल कर देगी लेकिन यह कोई दबाव नहीं है ।’’

उन्होंने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल का श्रेय टीमवर्क को देते हुए कहा ,‘‘ सबसे पहले तो पीसी बनाना अहम है । इसके बाद पुशर और आखिर में मेरी फिनिशिंग स्किल आती है। यह पूरा टीम प्रयास है ।’’

उन्होंने कहा कि टीम का लक्ष्य स्वर्ण पदक के जरिये लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिये क्वालीफाई करना है लेकिन मैच दर मैच रणनीति बनाकर खेल रहे हैं ।

उन्होंने कहा ,‘‘ विश्व कप में पदक हाथ से निकल गया तो सभी नर्वस थे । लेकिन टीम उसी लय में है और ओलंपिक के लिये क्वालीफाई करना लक्ष्य है लेकिन एक टीम के रूप में हमने तय किया है कि बस अगले मैच पर और अपने खेल पर फोकस करना है , विरोधी टीम पर भी नहीं ।

भाषा मोना सुधीर

सुधीर

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