(सुधीर उपाध्याय)
नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता विक्टर लेई, ब्रायन यांग और मिशेल ली जैसे कनाडा के खिलाड़ियों का कहना है कि उनके देश में बैडमिंटन खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से अधिक वित्तीय सहायता नहीं मिलती लेकिन समय के साथ चीजों में बदलाव हो रहा है और खिलाड़ियों को अधिक समर्थन मिल रहा है।
बैडमिंटन के अधिकतर टूर्नामेंट उत्तर और दक्षिण अमेरिका महाद्वीप से बाहर होते हैं और ऐसे में कनाडा के खिलाड़ियों को काफी यात्रा करनी पड़ती है और यह काफी खर्चीला साबित होता है जिसके लिए अधिकतर समय खिलाड़ियों को अपनी जेब से खर्चा करना पड़ता है।
गोल्फ, तैराकी, वॉलीबॉल और बैडमिंटन जैसे कई खेलों से जुड़े रहे विक्टर को आखिरकार बैडमिंटन रास आया। 21 साल के विक्टर को कनाडा के अन्य बैडमिंटन खिलाड़ियों की तरह वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ा लेकिन पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में पदार्पण करते हुए पदक जीतने वाला कनाडा का पहला खिलाड़ी बनने के बाद उनके लिए चीजें वित्तीय रूप से थोड़ी बेहतर हुई हैं।
विक्टर ने कहा, ‘‘हमें कनाडा में अधिक वित्तीय समर्थन नहीं मिलता इसलिए यह थोड़ा मुश्किल है लेकिन खुशकिस्मती से स्वदेश में मेरे पास कुछ प्रायोजक हैं जो मेरी मदद करने को तैयार हैं लेकिन विश्व चैंपियनशिप से पहले यह बहुत-बहुत मुश्किल था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कनाडा में बैडमिंटन का ढांचा बहुत अच्छा नहीं है। हमारे पास राष्ट्रीय टीम तो है लेकिन नेशनल सेंटर नहीं है इसलिए हम सब अपने-अपने क्लब में ट्रेनिंग करते हैं जिससे एक-दूसरे के साथ शुरुआत करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है लेकिन हाल ही में चीजें थोड़ी बेहतर हुई हैं।’’
विक्टर ने कहा कि पैसा और यात्रा की थकान दो सबसे मुश्किल पहलू हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘कनाडा और अमेरिका के खिलाड़ियों जैसा अनुभव किसी और को नहीं होता क्योंकि हर बार जब हम यात्रा करते हैं तो हमें जेट लैग (यात्रा की थकान) से निपटना पड़ता है और यह बहुत मुश्किल होता है लेकिन अनुभव से और टूर्नामेंट के लिए थोड़ा पहले पहुंचने से मुझे लगता है कि इससे निपटने में मदद मिलती है।’’
विक्टर ने कहा, ‘‘अगर आपने ध्यान दिया हो तो आमतौर पर मेरे और ब्रायन के साथ कोच नहीं होते क्योंकि उनके लिए हमारे साथ यात्रा करना मुश्किल होता है। भाग्य से हमारे पास कुछ प्रायोजक हैं जो विमान के टिकटों और होटल की बुकिंग में मदद करते हैं लेकिन सबसे महंगी विमान यात्रा होती है क्योंकि जब भी मैं कनाडा से एशिया आता हूं तो हजारों डॉलर लगते हैं। होटल की बुकिंग के लिए भी आपको भुगतान करना ही पड़ता है।’’
विक्टर की तरह ब्रायन ने भी कहा कि उन्हें अधिकांश समय अपने खर्चे पर ही टूर्नामेंट में हिस्सा लेना पड़ता है जिससे चीजें काफी मुश्किल हो जाती हैं।
ब्रायन ने कहा, ‘‘टूर्नामेंट में खेलने के लिए ज्यादातर खर्च हमारी अपनी जेब से होता है। हमें सरकार से अधिक वित्तीय मदद नहीं मिलती। लेकिन हाल ही में जैसे-जैस हम नतीजे दे रहे हैं तो यह जरूर बेहतर हो रहा है। उम्मीद है कि हम इस प्रदर्शन को जारी रख पाएंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें सारा इंतजाम खुद करना होता है। विमान की टिकट बुक करना, होटल बुक करना, खाना ढूंढना और ऐसी ही दूसरी चीजें। हम यह सब खुद ही करते हैं।’’
ब्रायन ने कहा कि वह कई बार भारत आ चुके हैं और यहां की चीजों से बेहतर तरीके से वाकिफ हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम सर्वश्रेष्ठ कीमत और अच्छी गुणवत्ता दोनों ढूंढने की कोशिश करते हैं। मैं अब तक भारत कई बार आ चुका हूं। मैं कई जगहों पर कई बार जा चुका हूं इसलिए मैं अब उनसे अधिक वाकिफ हूं।’’
कनाडा में बैडमिंटन को पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली मिशेल को भी मलाल है कि पर्याप्त वित्तीय मदद नहीं मिल पाने के कारण उनकी टीम अपने साथ फिजियो, डॉक्टर और कोच जैसे महत्वपूर्ण सहयोगी स्टाफ को नहीं ला पाती।
मिशेल ने कहा, ‘‘हम अब भी स्वयं खर्चा उठाते हैं। हमारे साथ यात्रा करने के लिए हमारे पास सहयोगी स्टाफ भी नहीं है। हमारे पास कोई फिजियो नहीं है। हमें उपचार नहीं मिल पाता, हमारे पास ट्रेनिंग के लिए कोई टीम नहीं है इसलिए कई बार हम खुद ही ट्रेनिंग करते हैं और यह मुश्किल होता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इनामी राशि का इस्तेमाल करके टूर्नामेंट में खेलती हूं। मेरे पास केसी के रूप में प्रायोजक है जो मेरा प्रायोजन करते हैं। पेरिस ओलंपिक तक मेरे पास यह नहीं था इसलिए मैं जहां हूं वहां पहुंचने के लिए मैंने बहुत मेहनत की है।’’
मिशेल ने कहा, ‘‘अब मुझे लगता है कि मुझे सही समर्थन मिल रहा है लेकिन जूनियर खिलाड़ियों के लिए यह अब भी बहुत मुश्किल है क्योंकि उन्हें अब भी पैसों का इंतजाम करना पड़ता है और हम अगले टूर्नामेंट में खेलने के लिए अपनी इनामी राशि का इस्तेमाल करते हैं।’’
भाषा सुधीर पंत
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