एक तिहाई कोच अहंकारी, जिद्दी और दुर्व्यवहार करने वाले होते हैं: अंतिल

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एक तिहाई कोच अहंकारी, जिद्दी और दुर्व्यवहार करने वाले होते हैं: अंतिल

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  • Publish Date - May 31, 2026 / 11:27 AM IST,
    Updated On - May 31, 2026 / 11:27 AM IST

(सुमन रे)

नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) दो बार के पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता सुमित अंतिल ने आरोप लगाया है कि एक तिहाई कोच बेहद अहंकारी हैं, अभ्यास के पुराने तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जिद्दी हैं और कुछ तो गाली-गलौज भी करते हैं।

अंतिल ने पिछले सप्ताह बेंगलुरु में एफ64 भाला फेंक श्रेणी में अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ा था। उन्होंने अपनी बात को सही साबित करने के लिए स्वयं का उदाहरण दिया।

अंतिल ने पीटीआई से कहा, ‘‘कुछ कोच अहंकारी होते हैं जो समय के साथ सीखने और व्यवहार में बदलाव लाने को तैयार नहीं होते। मेरा अनुमान है कि इस तरह के कोच की संख्या 30 प्रतिशत से लेकर एक तिहाई तक है। पुराने कोच नए कोच की तुलना में अधिक घमंडी होते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने ऐसे कोच को देखा है जो नई चीजों को अपनाने के लिए तैयार ही नहीं हैं। जो लोग 2010-11 के बाद कोच बने हैं, वे नई चीजें और तकनीक सीखने और अपनाने के लिए तैयार हैं।’’

पैरालम्पिक विश्व रिकॉर्ड धारक अंतिल का मानना ​​है कि अगर कोई कोच अपना काम ठीक से कर रहा हो और अच्छा व्यवहार बनाए रखे तो कोई भी एथलीट उसे नहीं छोड़ेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी एथलीट अपने कोच को छोड़ने की बेवकूफी नहीं करता। खिलाड़ी अगले स्तर पर पहुंचने के लिए कोच छोड़ते हैं या उनके साथ खराब व्यवहार किया जाता है।’’

अंतिल ने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए वीरेंद्र सहवाग के कोच (ए एन शर्मा) उन्हें बहुत अच्छी तरह समझते थे और इसीलिए वीरू भाई बार-बार उनके पास जाते थे। जब वे भारत के लिए खेल रहे थे तब वे अपने बचपन के कोच के मार्गदर्शन में अभ्यास नहीं कर रहे थे और कोच इस बात को अच्छी तरह समझते थे। उन्होंने उन पर किसी तरह का अधिकार नहीं जताया।’’

सुमित ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए अपना खुद का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने 2019 में ही एक कोच को छोड़ दिया था, जो अब भी दावा करता है कि मैं उसका शिष्य हूं। इतने साल बाद भी अगर वह मुझे अपना शिष्य बताता है तो यह सही नहीं है।’’

सुमित ने कहा कि कई कोच पुरस्कार राशि के लालच में खिलाड़ियों की सफलता में अपने योगदान का दावा करते हैं जबकि ऐसा नहीं होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुद्दा नकद पुरस्कार का है। देश के लिए पदक जीतने वाले एथलीट के लिए ये छोटी बातें होती हैं। मैंने एक कोच के साथ दो साल तक प्रशिक्षण लिया, मैंने उन्हें गुरु दक्षिणा के रूप में 65 लाख रुपये दिए। लेकिन उसके बाद अगर मुझे लगा कि उनका परिवेश, उनकी संगति और माहौल अंतरराष्ट्रीय एथलीट के रूप में मेरे विकास के लिए उपयुक्त या अनुकूल नहीं था, तो मैं उन्हें क्यों नहीं छोड़ सकता था।’’

सुमित ने कहा, ‘‘मैंने उनकी बकवास कभी बर्दाश्त नहीं की। मेरे साथ जो हुआ, वैसा दूसरों के साथ भी हुआ। बात मुझ तक सीमित रहती तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अगर बात मेरे परिवार की हो तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने (उनके पूर्व कोच ने) नीरज चोपड़ा के माता-पिता और परिवार के बारे में भी अनाप शनाप कहा था।’’

जब पीटीआई ने सुमित द्वारा बताए गए कोच से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा कि आरोप सच नहीं हैं।

भाषा

पंत

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