(मोना पार्थसारथी)
एम्सटेलवीन, 28 अगस्त (भाषा) भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच शोर्ड मारिन ने शुक्रवार को कहा कि विश्व कप से पहले उनकी छुट्टी से टीम की तैयारियों पर कोई असर नहीं पड़ा और वह टूर्नामेंट की तैयारी के दौरान टीम की हर गतिविधि से जुड़े हुए थे।
भारत ने एफआईएच विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया।
विश्व कप से पहले मारिन के छुट्टी लेने के फैसले पर मीडिया के एक वर्ग ने सवाल उठाए थे। हालांकि नीदरलैंड के कोच ने कहा कि उनके कोचिंग स्टाफ के सहयोग से टीम की तैयारी सही दिशा में चलती रही।
मारिन ने भारत के विश्व कप अभियान के बाद ‘भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैंने हर ट्रेनिंग और मैच देखा, बैठकें कीं और खिलाड़ियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क में रहा। ऐसा नहीं था कि मुझे पता ही नहीं था कि टीम में क्या चल रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लोग हमेशा पूरी सच्चाई नहीं जानते। वहां मौजूद स्टाफ ने भी खिलाड़ियों की विश्व कप की तैयारी में मदद की। ’’
मारिन के लिए पांचवां स्थान मंजिल नहीं है। चोटों से जूझ रही टीम को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी विश्व कप टीम में बदलने के बाद अब उनका संदेश खिलाड़ियों के लिए साफ है कि जीत की भूख बनाए रखो।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कई उतार-चढ़ाव से भरा सफर रहा है और हमें इसे जारी रखना होगा। लेकिन यह तभी संभव है जब हम अपनी भूख और खुद से बेहतर प्रदर्शन करने की इच्छा को बनाए रखें और चीजों को हल्के में नहीं लें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अपने स्तर को लगातार ऊपर उठाते रहें और टीम से ज्यादा से ज्यादा उम्मीद रखें। आगे बढ़ना हर दिन की प्रक्रिया है और इसके लिए एक-दूसरे से जुड़े रहना भी जरूरी है। ’’
जनवरी में भारतीय टीम के साथ अपने दूसरे कार्यकाल के लिए लौटने वाले मारिन ने कहा कि इस बार की स्थिति उनके पहले कार्यकाल से काफी अलग थी। अब टीम की कई खिलाड़ी मजबूत रैंकिंग वाली टीम के खिलाफ खेल चुकी हैं और बड़े टूर्नामेंटों का अनुभव भी रखती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इस टीम में ऐसी खिलाड़ी हैं जो पहले ही मजबूत टीम के खिलाफ खेल चुकी हैं और बड़े टूर्नामेंटों का अनुभव रखती हैं। शुरुआत में हमारे पास ऐसा अनुभव नहीं था। अब ये खिलाड़ी मुझे भी जानती थीं कि मैं किस तरह कोचिंग करता हूं और टीम को कैसे तैयार करता हूं। उन्होंने यह अनुभव युवा खिलाड़ियों के साथ भी साझा किया। इससे शुरुआत जल्दी और आसानी से हो सकी। ’’
कोच ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी चुनौती टीम की पहचान को फिर से बनाना, अनुशासन वापस लाना और खिलाड़ियों का ध्यान ‘मैं’ से हटाकर ‘हम’ पर केंद्रित करना था।
उन्होंने कहा, ‘‘मुख्य चुनौती फिर से टीम को एकजुट करना, सोच को ‘मैं’ से ‘हम’ में बदलना और अनुशासन वापस लाना था। ’’
मारिन का मानना है कि इस बार वह पहले से ज्यादा अनुभवी और बेहतर कोच बनकर लौटे हैं क्योंकि इन बीच के वर्षों में उन्होंने दूसरे कोच के साथ काम किया और उनका मार्गदर्शन भी किया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं भारत में रह चुका हूं, इसलिए अब मुझे बेहतर पता है कि यहां चीजें कैसे काम करती हैं और भारतीय टीम को कोचिंग देने में क्या तरीका कारगर होता है। पिछले कुछ वर्षों में मैंने दूसरे कोच का मार्गदर्शन किया। इससे मुझे खुद के काम पर विचार करने और एक बेहतर कोच बनने में मदद मिली। ’’
विश्व कप में भारत के प्रदर्शन को देश में भी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। मारिन को उम्मीद है कि इससे महिला हॉकी में लोगों की रुचि बढ़ेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं लोगों की प्रतिक्रियाएं देखूं, तो वे सकारात्मक हैं और टीम को ‘फॉलो’ कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि हम युवा बच्चों को भी हॉकी खेलना शुरू करने के लिए प्रेरित करेंगे। ’’
उन्होंने महिला हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) को भी टीम के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इस लीग में अंतरराष्ट्रीय सितारों के खिलाफ खेलने से भारतीय खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ता है।
उन्होंने कहा, ‘‘विश्व कप इसका उदाहरण है कि एचआईएल में जिन खिलाड़ियों के खिलाफ वे खेल चुकी हैं, उनके सामने भारतीय खिलाड़ी अब ज्यादा आत्मविश्वास के साथ खेलती हैं। ’’
भाषा नमिता आनन्द
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