कर्णी सिंह परिसर में निजी कोचिंग विवाद: राइफल कोच के खिलाफ साइ ने शुरू की जांच

कर्णी सिंह परिसर में निजी कोचिंग विवाद: राइफल कोच के खिलाफ साइ ने शुरू की जांच

कर्णी सिंह परिसर में निजी कोचिंग विवाद: राइफल कोच के खिलाफ साइ ने शुरू की जांच
Modified Date: July 20, 2026 / 08:12 pm IST
Published Date: July 20, 2026 8:12 pm IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) आगामी एशियाई खेलों की तैयारियों में जुटे भारतीय राइफल निशानेबाजों के हाई परफॉर्मेंस कोच मनोज कुमार के खिलाफ निजी कोचिंग चलाने के मामले में भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने जांच शुरू कर दी है।

पचास मीटर राइफल स्पर्धाओं के मुख्य कोच मनोज कुमार पर सरकारी स्वामित्व वाली कर्णी सिंह निशानेबाजी परिसर में कथित तौर पर निजी कोचिंग चलाने और अपने प्रशिक्षण सत्रों में शामिल नहीं होने वाले खिलाड़ियों के साथ भेदभाव करने के आरोप लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार सोमवार को साई मुख्यालय में इस मामले को लेकर सुनवाई हुई, जिसमें प्रभावित निशानेबाजों और उनके अभिभावकों की शिकायतें सुनी गईं।

साइ के एक सूत्र ने पीटीआई से कहा, ‘‘हमें इस कोच के खिलाफ एक नहीं, बल्कि कई शिकायतें मिली हैं। इसलिए फिलहाल मामले की जांच चल रही है।’’

सोमवार की सुनवाई साई के संचालन विभाग की प्रमुख और उप महानिदेशक मंजुश्री दयानंद की अध्यक्षता में हुई। मनोज कुमार हालांकि इस सुनवाई में मौजूद नहीं थे, लेकिन साइ के अधिकारियों ने इससे पहले उनसे अलग से बातचीत कर उनका पक्ष जाना था।

वह फिलहाल 22 जुलाई से शुरू होने वाले आगामी विश्व कप के लिए भारतीय टीम के साथ हांगझोउ में हैं।

पीटीआई से संपर्क किए जाने पर मनोज कुमार ने कहा, ‘‘मैंने साई को अपना जवाब दे दिया है और इस मामले में मुझे इससे अधिक कुछ नहीं कहना है।’’

भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के महासचिव पवन कुमार सिंह ने कोच के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘मुझे इस मामले के बारे में जानकारी नहीं है। जहां तक हितों के टकराव के आरोप की बात है, मुझे नहीं लगता कि यह सही है। वह साइ द्वारा नियुक्त हाई परफॉर्मेंस कोच हैं। सच्चाई का पता लगाने के लिए निश्चित रूप से जांच होनी चाहिए।’’

एक निशानेबाज की मां ने यह भी आरोप लगाया कि शिविर के दौरान कोच के व्यवहार और रवैये से उनकी बेटी मानसिक रूप से प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘2025 से पहले जब मेरी बेटी टॉप्स (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) का हिस्सा थी, तब निशानेबाजों को अभ्यास, प्रतियोगिताओं और फाइनल के लिए आवश्यक कारतूस और अन्य साजो-सामान की निर्धारित मात्रा के लिए अनुरोध देना होता था।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘जब मेरी बेटी ने 500 कारतूस की मांग की थी, तो उसे केवल 300 कारतूस आवंटित किए गए। लेकिन जब वह रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने गई, तो उसने देखा कि संबंधित कोच से व्यक्तिगत प्रशिक्षण लेने वाले टॉप्स श्रेणी के कुछ खिलाड़ियों को 800 कारतूस आवंटित किए गए थे।’’

एक सूत्र के अनुसार, सरकारी निशानेबाजी सुविधा में निजी कोचिंग का यह अकेला मामला नहीं है। कुछ विदेशी कोच भी कथित तौर पर इस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं।

भाषा आनन्द मोना

मोना


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