डोपिंग को अपराध बनाने की कवायद के बीच 2018 में रद्द हुए प्रावधान फिर चर्चा में

डोपिंग को अपराध बनाने की कवायद के बीच 2018 में रद्द हुए प्रावधान फिर चर्चा में

डोपिंग को अपराध बनाने की कवायद के बीच 2018 में रद्द हुए प्रावधान फिर चर्चा में
Modified Date: April 17, 2026 / 03:57 pm IST
Published Date: April 17, 2026 3:57 pm IST

नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) डोपिंग को अपराध बनाने की खेल मंत्रालय की पहल के बीच 2018 के डोपिंग रोधी विधेयक के मसौदे में प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति करने वालों के लिये जेल और भारी जुर्माने के प्रावधान के साथ भारतीय ओलंपिक संघ जैसी संस्थाओं की ओर से इस पर हुई बहस और विरोध भी सुर्खियों में आ गए हैं ।

विश्व डोपिंग निरोधक एजेंसी (वाडा) की वैश्चिक डोपिंग रोधी खुफिया और जांच नेटवर्क की यहां बृहस्पतिवार को हुई आखिरी कांफ्रेंस में डोपिंग को अपराध बनाने का मसला छाया रहा ।

वाडा अध्यक्ष विटोल्ड बांका ने दोहराया कि वह सरकारों से अपील करेंगे कि डोपिंग को अपराध बनाया जाये लेकिन प्रतिबंधित दवाओं की आपूर्ति करने वाले और खिलाड़ियों तक पहुंचाने वालों को निशाने पर लिया जाये ताकि खिलाड़ियों पर आंच नहीं आये ।

करीब एक दशक पहले न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता वाली समिति के सुझावों पर भारत में डोपिंग को अपराध बनाने की तैयारी कर ली गई थी । न्यायमूर्ति मुद्गल ने ही भारतीय क्रिकेट में 2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच की थी ।

विधेयक के मसौदे में कहा गया था ,‘‘कोई भी व्यक्ति जो व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किसी एथलीट को नियमित रूप से प्रतिबंधित पदार्थ की आपूर्ति करने में लिप्त पाया जाता है, वह ‘तस्करी’ के अपराध का दोषी माना जाएगा और उसे साधारण कारावास दिया जायेगा जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकती है। इसके साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है, जो 10 लाख रुपये तक हो सकता है।’’

यह प्रावधान हालांकि 2022 में पारित और पिछले साल संशोधित हुए विधेयक से हटा दिया गया था । उस समय सरकार ने आपराधिक कानून की बजाय निवारक कानून पर विचार किया था ।

आईओए ने उस समय इस प्रावधान का विरोध किया था और उसके तत्कालीन महासचिव राजीव मेहता ने कहा था कि प्रदर्शन बेहतर करने वाली दवाओं की आपूर्ति को पूरी तरह से अपराध की श्रेणी में नहीं रख सकते क्योंकि खेलों से इतर उनका इस्तेमाल हो सकता है ।

खेलमंत्री मनसुख मांडविया ने बृहस्पतिवार को संकेत दिया कि डोपिंग को अपराध बनाने के लिये कड़े प्रावधान लाये जा सकते हैं ।

पिछले तीन साल से भारत डोप उल्लंघन के मामलों में वाडा की वैश्विक सूची में शीर्ष पर है ।

मांडविया ने कांफ्रेंस में कहा था ,‘‘ हम खिलाड़ियों को प्रतिबंधित दवा देने वाले सहयोगी स्टाफ या प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रावधान लाने पर काम कर रहे हैं ।’’

फिलहाल भारत में खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति करने वालों के खिलाफ दंड का प्रावधान नहीं है और अनुशासनात्मक कार्रवाई खिलाड़ियों को जांच में दोषी पाये जाने पर प्रतिबंध तक सीमित है ।

भाषा

नमिता मोना

नमिता


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