विश्वविद्यालय संघ की चूक के महीनों बाद भी छह बैडमिंटन खिलाड़ियों को भागीदारी प्रमाण पत्र का इंतजार

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विश्वविद्यालय संघ की चूक के महीनों बाद भी छह बैडमिंटन खिलाड़ियों को भागीदारी प्रमाण पत्र का इंतजार

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  • Publish Date - April 4, 2026 / 03:17 PM IST,
    Updated On - April 4, 2026 / 03:17 PM IST

नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) भारत के छह बैडमिंटन खिलाड़ियों को एक प्रशासनिक चूक के कारण विश्व विश्वविद्यालय खेलों (डब्ल्यूयूजी) में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था और अब महीनों बाद भी वे अपने भागीदारी प्रमाण पत्रों का इंतजार कर रहे हैं।

भारतीय विश्वविद्यालयों के संघ (एआईयू) ने सुधारात्मक कदम के तौर पर उन्हें ये प्रमाण पत्र देने का वादा किया था।

जर्मनी में हुए डब्ल्यूयूजी के लिए 12 सदस्यों की भारतीय बैडमिंटन टीम चुनी गई थी, लेकिन मैनेजर की बैठक में सिर्फ छह खिलाड़ी ही प्रवेश कर पाए। बाकी आधे खिलाड़ी मौके पर मौजूद होने के बावजूद प्रतियोगिता से बाहर रह गए। इसके बाद एआईयू ने एक जांच समिति बनाई और अपने संयुक्त सचिव बलजीत सिंह सेखों को निलंबित कर दिया।

छह खिलाड़ियों सतीश कुमार करुणाकरण, सनीत दयानंद, तसनीम मीर, वर्षिनी विश्वनाथ श्री, देविका सिहाग और वैष्णवी खड़केकर ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उन्होंने मिश्रित टीम स्पर्धा में एक ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता।

जिन खिलाड़ियों (अलीशा खान, रोहन कुमार, दर्शन पुजारी, अदिति भट्ट, अविनाश मोहंती और विराज कुवाले) को बाहर कर दिया गया था, उन्हें आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर रखा गया। इसके चलते उन्हें प्रमाण पत्र, पहचान और अंतरराष्ट्रीय पदकों से जुड़े लाभ नहीं मिल पाए।

इस साल जनवरी में खेल मंत्रालय ने एआईयू को कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया कि यह संस्था खिलाड़ियों के विकास और योजना से जुड़े अपने कर्तव्यों को निभाने में नाकाम रही है।

जब एआईयू महासचिव पंकज मित्तल से पूछा गया कि क्या उन छह खिलाड़ियों को प्रमात्र पत्र मिले हैं तो उन्होंने पीटीआई को बताया, ‘‘इसमें नकद पुरस्कार नहीं हैं। हमने किसी को कोई नकद पुरस्कार नहीं दिया है, लेकिन उन्हें अपने पदक मिल गए हैं। उन्हें अभी प्रमाण पत्र मिलने बाकी हैं, लेकिन हमने एफआईएसयू के सामने यह मामला उठाया है इसलिए हमें उम्मीद है कि सब ठीक होगा। ’’

अलीशा खान ने आरोप लगाया कि अधिकारियों से स्पष्टता पाने की बार-बार की गई कोशिशों का कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कहा, ‘‘जब हम जर्मनी में थे, तब एआईयू ने खिलाड़ियों के साथ एक जूम बैठक की थी जिसमें महासचिव पंकज मित्तल भी मौजूद थीं। उन्होंने हमसे वादा किया था कि भारत लौटने पर हमें बाकी छह खिलाड़ियों की तरह ही समान सम्मान, नकद पुरस्कार और योग्यता प्रमाण पत्र मिलेंगे। ’’

भाषा नमिता पंत

पंत