न्यूयॉर्क, 21 जुलाई (एपी) विश्व कप में स्पेन की जीत महज संयोग नहीं है क्योंकि इस देश ने पिछले कुछ समय से विश्व फुटबॉल में अपना दबदबा बनाए रखा है और इस खेल के सबसे बड़े मंच पर इसी की बानगी देखने को मिली।
स्पेन ने रविवार को अर्जेंटीना को हराकर दूसरा विश्व कप जीता और इस तरह से पुरुष, महिला और युवा प्रतियोगिताओं में हाल की जीत की लंबी सूची में एक और उपलब्धि जोड़ दी।
पुरुष टीम मौजूदा यूरोपीय चैंपियन और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता है। उसने दो बार नेशंस लीग के फाइनल में जगह बनाई जिसमें एक बार वह चैंपियन बनी। स्पेन की महिला टीम मौजूदा विश्व कप चैंपियन है और दो बार महिला नेशंस लीग विजेता रह चुकी है। यह टीम 2025 यूरोपीय चैंपियनशिप के फाइनल में भी पहुंची थी।
स्पेन विश्व का पहला ऐसा देश बन गया है जिसके पास एक ही समय में पुरुष और महिला दोनों विश्व कप खिताब हैं। यही नहीं वह इस सदी में दो बार पुरुष विश्व कप जीतने वाला एकमात्र देश है। स्पेन 2010 में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए विश्व कप में पहली बार चैंपियन बना था।
स्पेन की पुरुष और महिला दोनों टीम ने पिछले कुछ वर्षों में युवा वर्ग के कई टूर्नामेंट भी जीते हैं।
दक्षिण अफ्रीका में स्पेन को पहला विश्व कप खिताब दिलाने वाले आद्रेंस इनिएस्टा, ज़ावी हर्नांडेज़, सर्जियो रामोस और जेरार्ड पिके जैसे खिलाड़ियों के संन्यास लेने के बाद स्पेन की पुरुष टीम को बदलाव का सामना करना पड़ा लेकिन उसने धीरे-धीरे अपनी टीम को मजबूत बनाया और आज वह विश्व कप विजेता है।
लामिन यामल, पाउ कुबार्सी, रोड्रि और अर्जेंटीना के खिलाफ फाइनल में गोल करने वाले फेरान टोरेस जैसे खिलाड़ी अब एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
स्पेन के कोच लुइस डे ला फुएंते ने कहा, ‘‘अतीत की बातों को याद करके मैं भावुक हो जाता हूं। हमने सभी प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की है और यह शानदार है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह खिलाड़ियों की एक ऐसी पीढ़ी है जो स्पेनिश खेल जगत, युवा लोगों और स्पेन के लिए एक मिसाल है। हमारी टीम एकजुट है और यही उसकी मजबूती का कारण है।’’
स्पेन 2010 में चैंपियन बनने के बाद विश्व कप में अंतिम 16 से आगे नहीं बढ़ पाई थी लेकिन उसने 2022 में डे ला फुएंते के आने के बाद से लगभग हर प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन किया है। वह पिछले 38 मैच से अजेय है जो पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में रिकॉर्ड है।
स्पेन ने अपने खेल की एक विशेष शैली विकसित की है जिसमें उसके खिलाड़ी छोटे-छोटे पास देकर गेंद पर अपना नियंत्रण रखते हैं। उसकी रक्षापंक्ति बेहद मजबूत है। इसका एक नमूना विश्व कप में देखने को मिला जहां उसकी टीम ने केवल एक गोल खाया।
एपी
पंत मोना
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