अवसाद से जूझ रही थी, क्रिकेट छोड़ना चाहती थी: श्रेयंका पाटिल

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अवसाद से जूझ रही थी, क्रिकेट छोड़ना चाहती थी: श्रेयंका पाटिल

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  • Publish Date - June 15, 2026 / 05:04 PM IST,
    Updated On - June 15, 2026 / 05:04 PM IST

बर्मिंघम, 15 जून (भाषा) भारत की ऑफ स्पिनर श्रेयंका पाटिल ने बताया कि चोट के कारण एक साल से अधिक समय तक खेल से दूर रहने के दौरान वह अवसाद से जूझ रही थीं और उन्होंने क्रिकेट छोड़ने के बारे में भी सोचा था।

रविवार को यहां महिला टी20 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की 64 रन की जीत में किफायती गेंदबाजी करने वाली श्रेयंका ने इस मुश्किल दौर से निकलने और राष्ट्रीय टीम में सफल वापसी करने का श्रेय अपने मजबूत सहयोगी ढांचे को दिया।

जुलाई 2024 में पाकिस्तान के खिलाफ एशिया कप मैच के दौरान अंगुली में फ्रैक्चर होने के बाद श्रेयंका लगभग 14 महीने तक खेल से दूर रहीं। चोट की परेशानियां यहीं नहीं रुकीं। उन्हें दोनों पैरों की पिंडली में गंभीर समस्या और बाएं अंगूठे में फ्रैक्चर का भी सामना करना पड़ा जिसके बाद आखिरकार इस साल की शुरुआत में महिला प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ओर से उन्होंने वापसी की।

श्रेयंका ने ‘जियोस्टार’ से कहा, ‘‘अगर मैं कहूं मैं अवसाद में नहीं थी या मैंने क्रिकेट छोड़ने के बारे में नहीं सोचा तो यह झूठ होगा। चोट के दौर में शुरुआत में मुझे ऐसा ही महसूस हुआ था। लेकिन मेरे अंदर एक आवाज थी जो कह रही थी, ‘चाहे कुछ भी हो, मुझे यह खेल खेलना पसंद है। मैं यहां सिर्फ इसलिए हूं क्योंकि मुझे इसे खेलना पसंद है’।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैं उस चीज को नहीं छोड़ सकती थी जिसे करना मुझे पसंद है। मैंने हिम्मत बनाए रखी मेरे पापा मेरे से बात करते रहे और मेरे परिवार ने पूरे समय मेरा साथ दिया। मेरे आसपास का माहौल और मेरा मजबूत सहयोगी ढांचा- मैं हमेशा अच्छे लोगों से घिरी रही। इसी चीज ने मुझे आगे बढ़ने में मदद की।’’

इस स्पिनर ने कहा, ‘‘अब मुझे मैदान पर वापस आकर अच्छा लग रहा है और मैं इस एहसास को जाने नहीं दूंगी।’’

श्रेयंका ने पाकिस्तान के खिलाफ तीन ओवर में सिर्फ 17 रन दिए जिससे भारत ने चिर प्रतिद्वंद्वी टीम के खिलाफ 170 रन के स्कोर का आसानी से बचाव किया।

श्रेयंका ने कहा कि उन्हें दबाव भरे ओवरों में गेंदबाजी करने की चुनौती पसंद है। पावर प्ले में क्षेत्ररक्षण प्रतिबंधों के कारण रन बनाने के मौके बनते हैं इसलिए उनका ध्यान रन रोकने और विपक्षी टीम को गलती करने पर मजबूर करने पर होता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे हमेशा से पावरप्ले में गेंदबाजी करना पसंद रहा है, चाहे वह मेरे राज्य की टीम के लिए हो या भारत के लिए। दबाव में गेंदबाजी करना बहुत अच्छा लगता है क्योंकि मुझे यही करना पसंद है और मैंने पहले भी ऐसा सफलतापूर्वक किया है।’’

भाषा सुधीर मोना

मोना