अमेरिका के खिलाफ मैच के बाद दबाव भरे हालात को संभालने की जिम्मेदारी सूर्यकुमार और तिलक पर
अमेरिका के खिलाफ मैच के बाद दबाव भरे हालात को संभालने की जिम्मेदारी सूर्यकुमार और तिलक पर
नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने के लिए मशहूर भारतीय टीम ने अमेरिका के खिलाफ टी20 विश्व कप के शुरूआती मैच में पैदा हुए हालात के बाद अपनी रणनीति में बदलाव की जरूरत महसूस की।
टीम प्रबंधन को अपनी योजनाओं पर फिर से विचार करना पड़ा क्योंकि अमेरिका के खिलाफ मैच में असमान उछाल विकेट पर टीम ने 77 रन तक छह विकेट गंवा दिए थे।
कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टीम को संकट से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।
पिछले छह महीनों में टी20 बल्लेबाज के रूप में खुद को साबित करने वाले तिलक वर्मा ने कहा कि अगर विकेट जल्दी गिरते हैं तो मध्यक्रम में समय लेकर खेलना बहुत जरूरी है।
टीम ने तीसरे और चौथे नंबर पर उन्हें और सूर्यकुमार को क्रीज पर डटे रहने की जिम्मेदारी सौंपी है।
तिलक ने कहा कि अगर जरूरत पड़ती है तो तकनीक में मामूल बदलाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस बारे में बात की है कि तीसरे और चौथे नंबर पर हमने अच्छा किया है। विशेषकर मैंने और सूर्या भाई ने, हम अच्छी तरह से एक रन चुरा लेते हैं, गैप ढूंढते हैं। क्योंकि सलामी बल्लेबाज अभिषेक और ईशान छक्के जड़ने की जिम्मेदारी संभालते हैं। संजू भाई भी इसमें ही शामिल हैं, वह हिट करेंगे। और इनके नीचे के बल्लेबाज हमारे ताकतवर बल्लेबाज हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि टूर्नामेंट में छह से 16 ओवर के बीच अच्छा खेलने वाली टीम जीतती है। इसलिए हमने तीसरे नंबर और चौथे नंबर पर यह जिम्मेदारी ली है कि हम दबाव भरे हालात को संभालेंगे। ’’
मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी कहा कि अगर विकेट जल्दी गिरते हैं तो एक-दो ओवर खेलकर स्थिति को संभालना जरूरी है।
तिलक ने कहा, ‘‘गौतम सर ने हमसे ज्यादा कुछ नहीं कहा लेकिन उन्होंने कहा कि ऐसी दबाव भरी स्थिति में हमें परिस्थितियों को थोड़ा जल्दी समझना चाहिए। हमने अमेरिका के खिलाफ एक दो विकेट ज्यादा दे दिए। ’’
तिलक ने कहा, ‘‘हम आक्रामक दृष्टिकोण जानते हैं। लेकिन जब विकेट गिरते हैं तो हम एक दो ओवर के लिए रूक सकते हैं और फिर बल्लेबाजी की गहराई को देखते हुए फिर से तेजी पकड़ सकते हैं। ’’
सर्जरी के बाद वापसी करने वाले तिलक यह देखकर खुश हैं कि उन्होंने टी20 विश्व कप के लिए पूरी फिटनेस हासिल कर ली है जबकि उन्होंने पिछले महीने ही ‘ग्रोइन’ सर्जरी करवाई थी।
सर्जरी से उबरने के दौरान तिलक ने टीम के लिए विश्व कप फाइनल जीतने की कल्पना की। उन्होंने खेल से दूर रहने के समय के बारे में भी बात की।
तिलक ने कहा, ‘‘जब मेरे हाथ में दो तीन दिन तक बल्ला नहीं होता तो अजीब लगता है। लगता है जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में आ गया हूं। मैं लगातार कल्पना करता रहता हूं कि मैं विश्व कप फाइनल खेल रहा हूं। मैं बड़े मैच खेल रहा हूं। मैं खुद को दबाव में डालता हूं। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह आदत बचपन से बन गई है। मैं इतने साल से बल्ला पकड़ रहा हूं। सोने से पहले यह अपने आप दिमाग में आता है। इसलिए मुझे ऐसा नहीं लगता कि मुझे ब्रेक मिला है। मेरा दिमाग हमेशा उसी ‘जोन’ में रहता है। ’’
भाष नमिता मोना
मोना

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