जेएलएन स्टेडियम के पुनर्विकास प्रोजेक्ट का ‘वित्तीय सलाहकार’ बनेगा डेलॉयट समूह

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जेएलएन स्टेडियम के पुनर्विकास प्रोजेक्ट का ‘वित्तीय सलाहकार’ बनेगा डेलॉयट समूह

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 05:40 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 05:40 PM IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) लंदन स्थित लेखा फर्म डेलॉयट समूह को राष्ट्रीय राजधानी के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के पुनर्विकास की प्रक्रिया में सरकार ने ‘वित्तीय सलाहकार’ नियुक्त किया है, जिसे बहुउद्देश्यीय स्पोर्ट्स सिटी के रूप में विकसित करने की योजना है।

खेल मंत्रालय स्टेडियम का पुनर्निर्माण कर यहां ऐसा ‘स्पोर्टस सिटी’ विकसित करना चाहता है, जिसमें सभी प्रमुख खेलों के लिए सुविधाएं होंगी। इसमें खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था भी शामिल होगी।

विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, दुनिया की चार बड़ी लेखा फर्म में शामिल डेलॉयट का चयन निविदा प्रक्रिया के जरिये किया गया। तकनीकी मूल्यांकन के चरण में दो अन्य कंपनियां भी सफल रही थीं। अंतिम चरण के मूल्यांकन में डेलॉयट को सबसे उपयुक्त पाया गया और उसे ठेका दिया गया। डेलॉयट समूह आर्थिक मामलों के विभाग की पूर्व-स्वीकृत सलाहकारों की सूची में शामिल है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत डेलॉयट को व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने, लागत का अनुमान लगाने और परियोजना की वित्तीय संरचना तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

स्टेडियम के पुनर्विकास का प्रस्ताव पहली बार पिछले साल नवंबर में रखा गया था। परियोजना को पूरा करने की समयसीमा और अनुमानित लागत अभी तय की जा रही है।

परियोजना शुरू होने के साथ ही स्टेडियम परिसर में स्थित सभी कार्यालयों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा। इनमें भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ), राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा), राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल) और आयकर विभाग के कार्यालय शामिल हैं।

स्टेडियम का मालिकाना हक साइ के पास है। केंद्र सरकार की प्रमुख ‘खेलो इंडिया’ परियोजना का कार्यालय भी इसी परिसर से संचालित होता है।

इस स्टेडियम का निर्माण 1982 में उसी साल हुए एशियाई खेलों के लिए किया गया था। बाद में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से इसका जीर्णोद्धार किया गया।

पिछले साल यहां विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप भी आयोजित हुई थी। इसके लिए स्टेडियम में एक बार फिर बड़े पैमाने पर सुधार किया गया और विश्व प्रसिद्ध मोंडो ट्रैक बिछाया गया। इसे तेज सतह माना जाता है, जिससे खिलाड़ियों के चोटिल होने का जोखिम भी कम होता है।

स्टेडियम प्रमुख एथलेटिक्स केंद्र होने के साथ-साथ फुटबॉल मैदान भी है, जहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले आयोजित होते रहे हैं। यहां खेलों के अलावा व्यावसायिक गतिविधियां भी होती हैं और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय गायकों के संगीत कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।

पुनर्विकास परियोजना के लिए कतर और ऑस्ट्रेलिया में विकसित स्पोर्ट सिटी का अध्ययन किया गया है, ताकि परियोजना की रूपरेखा और संचालन का तरीका तय किया जा सके।

दोहा स्पोर्ट सिटी 617 एकड़ में फैला है। इसमें फुटबॉल, तैराकी और 13 अलग-अलग इनडोर खेलों के लिए सुविधाओं के अलावा एक अकादमी भी है। परिसर में हड्डी एवं जोड़ तथा खेल चिकित्सा के लिए विशेष अस्पताल भी है।

ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न का डॉकलैंड्स स्टेडियम बहुउद्देश्यीय खेल सुविधाओं का उदाहरण है। यहां क्रिकेट, ऑस्ट्रेलियाई नियमों वाला फुटबॉल, रग्बी और फुटबॉल के मुकाबले आयोजित किए जा सकते हैं।

देश में अहमदाबाद का सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स इसका नजदीकी उदाहरण है। 250 एकड़ में फैले इस परिसर में क्रिकेट, तैराकी, टेनिस और एथलेटिक्स समेत कई खेलों की सुविधाएं हैं। इसे 4,600 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है।

यह भी पता चला है कि खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने दिल्ली में साइ का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य साइ और ‘खेलो इंडिया’ की सभी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और निगरानी को सुनिश्चित करना है।

एक समर्पित क्षेत्रीय केंद्र नहीं होने के कारण प्रशासनिक जिम्मेदारियों में स्पष्टता की कमी, रिपोर्टिंग व्यवस्था में एकरूपता का अभाव और जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी एवं समन्वय में दिक्कतें सामने आती रही हैं।

दिल्ली में निशानेबाजी, हॉकी और एथलेटिक्स समेत कई प्रमुख खेलों के पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) हैं।

इनका संचालन साइ के स्टेडियम प्रभाग द्वारा किया जाता है। यह महसूस किया गया कि क्षेत्रीय केंद्र बनने से इन एनसीओई के बीच प्रशासनिक स्पष्टता और बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सकेगा।

भाषा

आनन्द नमिता

नमिता