ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में दक्षिण एशियाई प्रतिनिधित्व बढाने के लिए काम कर रहे उस्मान ख्वाजा

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ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में दक्षिण एशियाई प्रतिनिधित्व बढाने के लिए काम कर रहे उस्मान ख्वाजा

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  • Publish Date - June 4, 2021 / 11:40 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:47 PM IST

मेलबर्न, चार जून (भाषा) नस्लवाद का सामना करने के बाद ऑस्ट्रेलिया के पहले मुस्लिम क्रिकेट खिलाड़ी उस्मान ख्वाजा अपने देश की क्रिकेट में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों का अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) के साथ काम कर रहे हैं।

वह 2011 में एशेज टेस्ट में अपने घरेलू मैदान एससीजी (सिडनी) में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण के साथ ही ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले मुस्लिम और पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ी बने थे।

ख्वाजा ने अक्सर ऑस्ट्रेलिया में शीर्ष स्तर की क्रिकेट खेलने में होने वाली चुनौतियों के बारे में बात की है।

‘ईएसपीएनक्रिकइंफो’ के मुताबिक ख्वाजा ने कहा, ‘‘ अब स्थिति काफी बेहतर है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं ऑस्ट्रेलिया में राज्य स्तर पर बहुत सारे ऐसे क्रिकेटरों को देख रहा हूं, विशेष रूप से उपमहाद्वीप की पृष्ठभूमि वालो को। जब मैंने खेलना शुरू किया था तब वास्तव में ऐसा नहीं था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ जब मैं घरेलू क्रिकेट खेल रहा था और मैं वहां इकलौता उपमहाद्वीप का खिलाड़ी था। इस समय शायद मेरे साथ कुछ अन्य खिलाड़ी है।’’

ऑस्ट्रेलिया के लिए 44 टेस्ट में लगभग 3000 और 40 एकदिवसीय में लगभग 1500 रन बनाने वाले 34 साल के बाये हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा कि विविधता के मामले में उनकी टीम इंग्लैंड की टीम से सीख ले सकती है।

इंग्लैंड के एकदिवसीय टीम का नेतृत्व आयरलैंड के इयोन मॉर्गन कर रहे हैं जबकि उनके प्रमुख तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर बारबाडोस से हैं। मोईन अली और आदिल राशिद पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश एशियाई हैं। बेन स्टोक्स जन्म से न्यूजीलैंड के हैं।

टेस्ट और एकदिवसीय में 40 से अधिक औसत रखने वाले ख्वाजा ने कहा, ‘‘हमें अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है और मैं इंग्लैंड की टीम को देखता हूं तो उनके पास लंबे समय से विविधता है। वे हमसे पुराने राष्ट्र हैं, लेकिन मैं उस विविधता को देख सकता हूं और सोच सकता हूं कि शायद यही वह जगह है जहां ऑस्ट्रेलिया को पहुंचने की जरूरत है।’’

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में जन्मे और ऑस्ट्रेलिया में बसने के बाद वहां की नागरिकता लेने वाले ख्वाजा ने कहा, ‘‘जब मैं युवा खिलाड़ी था तब के मुकाबले अब स्थिति बेहतर है, लेकिन यह एक पीढ़ीगत बदलाव के बारे में है।’’

भाषा आनन्द मोना

मोना