इस साल राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतना मेरे सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक : लवलीना
इस साल राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतना मेरे सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक : लवलीना
(अपराजिता उपाध्याय)
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) जिस खिलाड़ी ने एमेच्योर मुक्केबाजी में लगभग हर अहम पदक जीता हो उसके लिए राष्ट्रमंडल खेलों में पोडियम तक नहीं पहुंच पाना निश्चित रूप से खटकता है और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन जुलाई-अगस्त में ग्लास्गो में इस अधूरे काम को पूरा करने के मिशन पर हैं।
पीटीआई को दिए साक्षात्कार में लवलीना ने कहा कि इस साल राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतना उनके ‘सबसे बड़े लक्ष्यों’ में से एक है जिसके लिए उन्होंने अपनी तकनीक और शैली में कुछ अहम बदलाव किए हैं।
लवलीना ने कहा, ‘‘हर पदक की अपनी अहमियत होती है और बेशक मैं राष्ट्रमंडल खेलों का पदक भी जीतना चाहूंगी। यह इस साल मेरे सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही मेरा ध्यान सिर्फ पदक के बारे में सोचने के बजाय अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर है। अगर मैं अपनी क्षमता के अनुसार खेलती हूं तो नतीजे भी अच्छे ही मिलेंगे।’’
यह 28 वर्षीय मिडिलवेट (75 किग्रा) मुक्केबाज लगभग हर बड़ी प्रतियोगिता में पदक जीतने में सफल रही है और उनके नाम पर ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेलों, एशियाई चैंपियनशिप और प्रतिष्ठित स्ट्रैंड्जा मेमोरियल टूर्नामेंट में पदक हैं।
हालांकि राष्ट्रमंडल खेलों में पदक की उनकी यह कोशिश करियर के अहम मोड़ पर हो रही है।
कभी लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली लवलीना का प्रदर्शन 2023 में विश्व चैंपियन बनने के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतार-चढ़ाव भरा रहा है।
पेरिस ओलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उन्होंने प्रतिस्पर्धी मुक्केबाजी से एक साल का ब्रेक लिया और फिर पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में वापसी की जहां वह पदक जीतने में नाकाम रहीं।
इस साल उन्होंने स्पेन में बॉक्सम एलीट अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता लेकिन एशियाई चैंपियनशिप से वह जल्दी बाहर हो गईं।
असम की इस मुक्केबाज ने माना कि उनके नतीजे उनकी स्वयं की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं लेकिन इनसे उन्हें अपने कौशल का बारीकी से दोबारा आकलन करने का जरूरी नजरिया मिला।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने कुछ तकनीकी और रणनीति पहलुओं की पहचान की, विशेषकर पूरे मुकाबले के दौरान निरंतरता बनाए रखने के मामले में। उन अनुभवों ने मुझे यह समझने में मदद की है कि मुझे किन चीजों पर काम करने की जरूरत है और हम ट्रेनिंग के दौरान उन्हीं हिस्सों पर ध्यान दे रहे हैं।’’
दोबारा तैयार होने की प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा नए मुख्य कोच सैंटियागो नीवा की देखरेख में पूरा हुआ है जो लवलीना के अनुसार अपने साथ एक नया नजरिया लेकर आए हैं।
वेल्टरवेट (69 किग्रा) वर्ग में लवलीना को सबसे अधिक सफलता मिली थी और उन्हें 75 किग्रा वर्ग में आने के लिए काफी बदलाव करने पड़े।
लवलीना ने कहा, ‘‘सबसे बड़ी चुनौती ताकत और गति के बीच संतुलन बनाना रही है। भारी वजन वाले वर्ग में आपको अधिक ताकत की जरूरत होती है लेकिन मैं अपनी गति और मूवमेंट को खोना नहीं चाहती थी जो हमेशा से मेरी ताकत रही हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने उस संतुलन को बनाए रखने के लिए स्ट्रेंथ और अनुकूलन के साथ-साथ गति को ध्यान में रखते हुए ट्रेनिंग पर भी काफी काम किया है।’’
भारत की सबसे कामयाब मुक्केबाजों में से एक होने के कारण हर टूर्नामेंट में उम्मीदों का दबाव रहता है और ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल भी इससे अलग नहीं होंगे जहां इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और मेजबान स्कॉटलैंड के मुक्केबाजों से कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद है।
लेकिन लवलीना ने कहा कि अनुभव ने उन्हें दबाव को अपनाना सिखाया है।
उन्होंने कहा, ‘‘दबाव एक बेहतरीन खिलाड़ी होने का हिस्सा है और मैंने इसे स्वीकार करना सीख लिया है। मैं उम्मीदों के बजाय प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करती हूं। मेरा लक्ष्य हर दिन अच्छी तैयारी करना, अपनी ट्रेनिंग पर भरोसा करना और मानसिक रूप से शांत रहना है।’’
भाषा सुधीर मोना
मोना
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Web Title: इस साल राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतना मेरे सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक : लवलीना
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