जब ज़िंदा व्यक्ति के पास आया अंत्येष्टि का पैसा लेने फोन ?

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जब ज़िंदा व्यक्ति के पास आया अंत्येष्टि का पैसा लेने फोन ?

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  • Publish Date - January 31, 2018 / 07:30 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:21 PM IST

राजनांदगांव  – कल्पना कीजिये की आपने फोन उठाया और आपको उधर से आवाज आये कि अपनी अंत्येष्टि का पैसा आ कर ले जाओ आपके ऊपर क्या गुजरेगी जरा सोचिये। लेकिन ये सब सच हुआ है.ग्राम पंचायत नवागांव मुढीपार के रहने वाले 51 वर्षीय छन्नू साहू के साथ।  इन दिनों श्रम विभाग की गड़बड़ी सामने आई है जिसमें एक व्यक्ति को फोन करके विभाग ने उसकी ही मौत के बाद अंत्येष्टि के लिए दिये जाने वाली राशि ले जाने की बात कही है. इस फोन के आते ही उस व्यक्ति के होश उड़ गये. इस घटना के बाद से ही इस व्यक्ति का बुरा हाल है और अब वह अपने आप को जीवित घोषित करने के लिए दस्तावेज जुगाड़ रहा है। 

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क्या है मामला 

नवागांव मुढीपार के रहने वाले  छन्नू साहू के पास कुछ समय पहले श्रम विभाग के एक अधिकारी का फोन आया कि छन्नू साहू के आप रिश्तेदार है क्या. उसकी मौत के बाद श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक की प्रोत्साहन राशि 30 हजार रूपये दी जानी है. फोन के आते ही छन्नू के होश ही उड़ गये.उसने सम्बंधित अधिकारी से इस बात को रखी की वह ज़िंदा है लेकिन अधिकारी भी परेशान हैं क्योकि सरकारी दस्तावेज में वह मृत घोषित हो चूका है। मामले की छानबीन के दौरान यह बात सामने आई है कि छन्नू साहू का मृत्यु प्रमाण पत्र ना तो ग्राम पंचायत से जारी किया है और ना ही मृत्यु प्रमाण पत्र पर ग्राम सचिव के हस्ताक्षर है.इतना ही नहीं इस प्रमाण पत्र के आधार पर श्रम विभाग ने छन्नू साहू के नाम पर श्रमिक पंजीयन प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया. मृत्यु के बाद मिलने वाली 30 हजार रूपये की राशि को भी तत्काल स्वीकृत कर दिया.

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मामला जब ज्यादा उजागर हो गया तो कलेक्टर भीमसिंह इस पूरे मामले की जांच में जुट गए साथ ही दिये गये दस्तावेजों के आधार पर छन्नू को जल्द जिन्दा घोषित करने का भी आश्वासन उन्होंने दिया है।ज्ञात हो कि  जिले में लगभग 75 हजार लोगों को साल 2010 से लेकर अब तक श्रमिक कार्ड जा​री किया जा चुका है. जिसमें से 2154 श्रमिकों की मौत हो चुकी है. श्रम विभाग द्वारा पंजीकृत हितग्राहियों का सामान्य मौत पर 30 हजार रूपये और दुघर्टना में मौत पर 1 लाख रूपये देता है.ऐसे मे यदि प्रत्येंक मृतक के हिसाब से 30 हजार रूपये के का भी भुगतान किया गया होगा तो अब ​तक विभाग ने करीब साढ़े छ:करोड़ रूपये की राशि वितरित की जा चुकी है.ऐसे कितने छन्नू जिले में घूम रहे होंगे जिन्हे पता भी नहीं की उनकी सरकारी दस्तावेज में मृत्यु हो चूकि है।

वेब टीम IBC24