लोक सुराज में गर्माया शिक्षाकर्मियों के संविलियन का कॉलम
लोक सुराज में गर्माया शिक्षाकर्मियों के संविलियन का कॉलम
अब सरकार इस बात को समझ गयी है कि शिक्षाकर्मियों की मदद के बगैर चुनाव जीतना आसान नहीं होगा। इसी लिए लोक सुराज के आवेदन में शिक्षाकर्मियों के संविलियन का कॉलम सरकार ने अलग से रखा है।राजनितिक गुरुवों की माने तो ये सरकार की सोची समझी चाल है। सरकार को बखूबी पता है कि संविलियन ना होने पर शिक्षाकर्मी उनसे नाराज़ हैं और जिसका भुगतान उन्हें आने वाले चुनाव में भी भुगतना पड़ सकता है।लोक सूरज अभियान में लाखों आवेदन आते हैं इन आवदेन के जरिये, वो ये देखना चाह रही है कि आखिर शिक्षाकर्मियों के समर्थन में कितने लोग खड़े हैं। संविलियन से कितना फायदा हो सकता है और कितना नुकसान.
ये भी पढ़े – फिर बजा लोक सुराज का बिगुल,स्कूल हुए टीचर विहीन ?
अभी तक के आंकड़े बताते हैं कि शिक्षाकर्मियों के पक्ष में लाखों की संख्या में आवेदन जमा हो चुके हैं। अधिकारी भी मानते हैं कि अलग-अलग मांगों जितने आवेदन आये हैं, उनमें से आधे से ज्यादा आवेदन सिर्फ और सिर्फ शिक्षाकर्मियों के संविलियन के हैं। आनलाइन और आफलाइन आवेदनों के आंकड़ों को अगर करीब से जाने तो डेढ़ लाख से ज्यादा आवेदन शिक्षाकर्मियों के संविलियन की मांगों को लेकर सरकार के पास पहुंचाये गये हैं।शिक्षाकर्मियों और उनके परिजनों-रिश्तेदारों और काफी संख्या में गांव के लोगों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों ने भी शिक्षाकर्मियों के संविलियन की मांगों का समर्थन करते हुए राज्य सरकार के नाम आवेदन लिखा है।
ये भी पढ़े – लोक सुराज के माध्यम से जर, जोरू और जमीन की मांग, मुख्यमंत्री बनने वाले भी शामिल
अब सरकार की मंशा शिक्षाकर्मियों की मांगों को पूरा करने की है या नहीं.. ये तो तय नहीं है लेकिन सरकार ने जिस तरह से लोक सुराज में आवेदन का प्रारुप दिया उसे देखकर एक बात तो साफ हो गया है कि संविलियन के मुद्दे को सरकार सिरे से अनसूना नहीं कर सकती।

लोक सुराज में शिक्षाकर्मियों के संविलियन के कालम रखने के बाद सरकार की उलझनें तो बढ़ ही गयी है. सरकार ने शिक्षाकर्मियों के साथ-साथ विपक्ष को बढ़ा मुद्दा दे दिया है.. जिसकी बदौलत अब सरकार पर एक बार फिर वादाखिलाफी का आरोप लग सकता है। वो भी उस सूरत में जब सरकार का दावा होता है कि वो सुराज में आये आवेदनों का शत प्रतिशत निराकरण करती है.. ऐसे में शिक्षाकर्मियों के संविलियन की मांगों का निराकरण कैसे होगा ? कहीं चुनाव के ठीक पहले निराकरण कर तो नहीं दिया जायेगा।फिलहाल जवाब कुछ भी हो सकता है.. लेकिन शायद कुछ दिनों के इंतजार के बाद।

Facebook


