ईडी बाद की तारीख पर कर सकता है आनंद ग्रोवर को समन : अदालत

ईडी बाद की तारीख पर कर सकता है आनंद ग्रोवर को समन : अदालत

ईडी बाद की तारीख पर कर सकता है आनंद ग्रोवर को समन : अदालत
Modified Date: November 29, 2022 / 08:49 pm IST
Published Date: November 24, 2020 10:27 am IST

मुंबई, 24 नवंबर (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर प्रवर्तन निदेशालय को (ईडी) धनशोधन मामले के सिलसिले में गैर-सरकारी संगठन ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ के ट्रस्टी व वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर को जारी समन टालने पर विचार करना चाहिए।

न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक की खंडपीठ एनजीओ और ग्रोवर द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में अनुरोध किया गया है कि धनशोधन रोकथाम कानून के तहत ईडी द्वारा दायर 2019 की शिकायत को खारिज कर दिया जाए। इस मामले में विदेशी अभिदाय (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

अधिवक्ता राहुल कामेरकर के जरिए दायर याचिकाओं में दावा किया गया है कि ईडी द्वारा शुरू की गयी मौजूदा कार्यवाही मूल विषय से संबंधित नहीं है।

ग्रोवर ने अपनी याचिका में ईडी द्वारा उनके खिलाफ जारी किए गए समन को भी चुनौती दी है। जारी समन में उन्हें 26 नवंबर को पेश होने को कहा गया है।

ईडी ने समन के जरिए ग्रोवर को एनजीओ द्वारा प्राप्त विदेशी अभिदाय का रिकार्ड पेश करने के लिए कहा था।

मंगलवार को जब ये जब याचिकाएं सुनवाई के लिए आईं, तो अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने जवाब देने के लिए समय दिए जाने का अनुरोध किया।

वरिष्ठ वकील अमित देसाई और अस्पी चिनॉय ने कहा कि याचिकाओं की सुनवाई के लंबित रहने तक ग्रोवर को जारी समन स्थगित रखा जाना चाहिए।

इस पर, न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा, ‘‘कोविड​​-19 के मामले हर जगह बढ़ रहे हैं। यहां तक ​​कि हमारे राज्य (महाराष्ट्र) ने भी अब यात्राओं पर कुछ प्रतिबंध लगा दिए हैं। ऐसी स्थिति में, दिल्ली में आपका प्राधिकरण (ईडी) जारी किए गए समन को टाल सकता है और उन्हें (ग्रोवर) बाद की तारीख में आने के लिए कह सकता है।’

पीठ ने कहा, ‘हमें मानवता का सम्मान करने की आवश्यकता है। कृपया मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखें और इस सुझाव पर विचार करें।’

याचिका के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नवंबर 2016 में, अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए समूह के एफसीआरए पंजीकरण को रद्द कर दिया था।

भाषा अविनाश नरेश

नरेश


लेखक के बारे में