जनता मांगे हिसाब: खड़गपुर और भगवानपुरा की जनता ने मांगा हिसाब

जनता मांगे हिसाब: खड़गपुर और भगवानपुरा की जनता ने मांगा हिसाब

जनता मांगे हिसाब: खड़गपुर और भगवानपुरा की जनता ने मांगा हिसाब
Modified Date: November 29, 2022 / 08:32 pm IST
Published Date: April 22, 2018 11:34 am IST

खड़गपुर की भौगोलिक स्थिति

अब बात करते हैं मध्यप्रदेश की खरगापुर विधानसभा की

टीकमगढ़ जिले में आती है खरगापुर विधानसभा

104 ग्राम पंचायत और 3 नगर पंचायत शामिल

जनसंख्या- 2 लाख 70 हजार 672 

कुल मतदाता- 2 लाख 20 हजार 815

पुरुष मतदाता- 1 लाख 17 हजार 251

महिला मतदाता- 1 लाख 3 हजार 564

वर्तमान में विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा

कांग्रेस की चंदा सुरेंद्र सिंह गौर हैं विधायक

खड़गपुर विधानसभा क्षेत्र की सियासत

टीकमगढ़ जिले की खरगापुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है और वर्तमान विधायक हैं चंदा सुरेंद्र सिंह गौर…अब विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है तो  विधायक की टिकट के लिए दावेदार एक-एक कर सामने आने लगे हैं ।बीजेपी हो या कांग्रेस दावेदारों की लिस्ट लंबी दिखाई दे रही है….विधायक की टिकट की आस लिए नेता अब विधानसभा में सक्रिय हो चले हैं..

टीकमगढ़ जिले के खरगापुर विधानसभा क्षेत्र में मुद्दों की कोई कमी नहीं है। गर्मियों में यहां पानी की समस्या विकराल रूप ले लेती है…गर्मी के मौसम  में यहां सूखे जैसी स्थिति हो जाती है जिससे लोगों को जीवन यापन के लिए पलायन का सहारा लेना पड़ता है..खरगापुर में स्वास्थ्य सेवाओं का भी बुरा हाल है..वहीं सरकारी कॉलेज नहीं होने से गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित होना पड़ता है। खरगापुर के किसान लगातार मिट्टी परीक्षण केंद्र की मांग कर रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है..खरगापुर गन्ना की बंपर पैदावार के लिए जाना जाता है.. मगर गन्ना मिल नहीं होने से किसानों को गन्ने का वाजिब दाम नहीं मिल पाता.. सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।क्षेत्र के  किसानों की मांग है कि बाण सुजारा से बल्देवगढ़ का ग्वाल तालाब में पानी का भराव किया जाए…लेकिन इसमें भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी.. अब जब चुनावी साल है तो इन मुद्दों की गूंज फिर सुनाई देने लगी है..कुल मिलाकर आने वाले चुनाव में सियासत की जंग मुद्दों के हथियारों से ही लड़ी जाएगी। 

भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति

अब बात मध्यप्रदेश की भगवानपुरा विधानसभा की..सबसे पहले इसके भौगोलिक स्थिति पर नजर डाल लेते हैं।

खरगोन जिले में आती है भगवानपुरा विधानसभा सीट

ST वर्ग के लिए आरक्षित है सीट

भगवानपुरा और सेगांव विकासखंड शामिल

जनसंख्या- करीब 3 लाख 83 हजार 902 

कुल मतदाता- 2 लाख 30 हजार 780

पुरुष मतदाता- 1 लाख 16 हजार 468

महिला मतदाता- 1 लाख 14 हजार 312

वर्तमान में सीट पर कांग्रेस का कब्जा

विजय सिंह सोलंकी हैं कांग्रेस विधायक 

भगवानपुरा विधानसभा की सियासत

विधानसभा चुनाव को लेकर बस कुछ ही महीने बचे हैं..इसीलिए भगवानपुरा विधानसभा सीट से विधायक का चुनाव लड़ने की ख्वाहिश लिए घूमते दिखाई देने लगे हैं नेता…बीजेपी हो या फिर कांग्रेस दोनों में विधायक की टिकट के दावेदारों की लिस्ट लंबी होती दिखाई दे रही है..तो आखिर वो कौन से नेता हैं जो अपनी दावेदारी के लिए ताल ठोंक रहे हैं ..

सतपुड़ा के किनारे बसा भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी समाज की संख्या सबसे ज्यादा है..यहां का आदिवासी मतदाता ही चुनावी समर में उम्मीदवारों का भविष्य तय करता है।यही वजह है कि सियासी पार्टियां भी प्रत्याशी चयन में जाति समीकरण को साधने का प्रयास करती है।  आजादी के बाद से ही भगवानपुरा सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। वर्तमान में सीट पर कांग्रेस के विजयसिंह सोलंकी विधायक हैं.. 2013 के विधानसभा चुनाव में विजयसिंह सोलंकी ने बीजेपी प्रत्याशी गजेन्द्र पटेल को हराकर सीट पर कब्जा किया था… आने वाले विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो यहां कांग्रेस और भाजपा में करीब एक-एक दर्जन दावेंदार अपनी उम्मीदवारी का दावा ठोंक रहे है। 

बीजेपी के संभावित उम्मीदवारों की बात करें तो पिछला चुनाव हारे गजेन्द्र पटेल फिर से टिकट की मांग कर हे है..इनके अलावा पूर्व विधायक जमना सिंह सोलंकी..पूर्व जनपद अध्यक्ष चंदरसिंह वास्कले और आदिवासी नेता प्रहलाद सिंह वास्कले के अलावा कई नेता टिकट दावेदारों की लिस्ट में हैं।  

वहीं कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों में  वर्तमान विधायक विजयसिंह सोलंकी का नाम सबसे आगे है..इसके अलावा जिला पंचायत सदस्य, केदार डाबर और राजेश मंडलोई सहित कई युवा नेता टिकट के लिए क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहे हैं। 

भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्र के मुद्दे

भगवानपुरा विधानसभा के मुद्दों और समस्याओं की बात करें तो सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है…रोजगार के अभाव में यहां के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी पलायन को मजबूर हैं..वहीं बुनियादी सुविधाओं तक से ज्यादातर आबादी अछूती है… स्वास्थ्य, सड़क, जैसी सुविधाएं आज भी कई गांवों तक पहुंच ही नहीं पाई हैं .

भगवानपुरा विधानसभा में सियासी उठापटक तो दिखाई देती है लेकिन विकास कहीं दिखाई नहीं देता..भगवानपुरा में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है..बेरोजगारी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या है। पूरे विधानसभा क्षेत्र में रोजगार गारंटी के तहत काम नहीं है..जिसकी वजह से आदिवासी रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र और गुजरात की ओर पलायन करने को मजबूर हैं..ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद भगवानपुरा में सफाई व्यवस्था बदहाल स्थिति में है..वहीं अगर शिक्षा की बात की जाए तो उच्च शिक्षा के लिए सरकार के कोई खास प्रयास नहीं दिखाई देते, क्षेत्र में एक भी कॉलेज नहीं है जिसकी वजह से छात्रों को रोज 80 किमी दूर खरगोन जाना पड़ता है। सड़कों की बात करें तो सड़कों का भी हाल बेहाल है…यहां का बस स्टैंड अतिक्रमण की भेंट तो चढ़ चुका है साथ ही यहां पसरी गंदगी ने यात्रियों जीना दुभर कर दिया है.. कुल मिलाकर भगवानपुरा में नेता तो हर साल बदलते हैं..लेकिन यहां के लोगों की किस्मत नहीं बदलती।

 

 

वेब डेस्क, IBC24


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