जनता मांगे हिसाब: धमतरी की जनता ने मांगा हिसाब

जनता मांगे हिसाब: धमतरी की जनता ने मांगा हिसाब

जनता मांगे हिसाब: धमतरी की जनता ने मांगा हिसाब
Modified Date: November 29, 2022 / 07:51 pm IST
Published Date: May 5, 2018 11:10 am IST

सफर की शुरूआत करते हैं..छत्तीसगढ़ की धमतरी विधानसभा से..गंगरैल डैम और अंगारमोती माता के इस धाम..को प्रकृति ने दिल खोलकर नैमत बख्शी है…धमतरी में हमेशा से भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला रहा है। सबसे पहले धमतरी विधानसभा की भौगोलिक स्थिति पर एक नजर डाल लेते हैं..

जनसंख्या- 3 लाख 15 हजार 

1 विकास खण्ड 1 नगर निगम और 1 नगर पंचायत

 कृषि का एक व्यापारिक केंद्र

कुल मतदाता- 1 लाख 90 हजार 

पुरुष मतदाता- 95 हजार 212 

महिला मतदाता- 94 हजार 813

करीब 27 प्रतिशत साहू मतदाता

11 फीसदी सतनामी और आदिवासी

फिलहाल सीट पर कांग्रेस का कब्जा

कांग्रेस के गुरूमुख सिंह होरा हैं वर्तमान विधायक 

धमतरी विधानसभा क्षेत्र की सियासत

धमतरी विधानसभा की राजनीति में कभी किसी एक दल का कब्जा नहीं रहा। आजादी के बाद से अब तक के नतीजों को देखें तो ..दो बार कांग्रेस और उसके बाद एक बार भाजपा के विधायक चुने जाते रहे हैं ….यहां की सियासत में जाति समीकरण भी काफी मायने रखते हैं …साहू वोटर यहां एक बड़ी सियासी ताकत हैं ..तो वहीं यहां पर किसानों को रिझाए बिना किसी अच्छे नतीजे की उम्मीद करना भी बेमानी ही होता है

धमतरी छत्तीसगढ की अहम सियासी सीट मानी जा सकती है ..जहां इस वक्त कांग्रेस का कब्जा है ..और गुरुमुख सिंह होरा यहां के विधायक हैं …अगर राजनीतिक इतिहास की बात करें तो यहां कई ऐसे नेता हुए जिनकी प्रदेश की राजनीति में अच्छी पकड़ रही है..

धमतरी विधानसभा क्षेत्र का चुनावी माहौल धमतरी शहर से बनता है। यहां के मतदाता हर बार नए चेहरे को आजमाते रहे हैं। यदि धमतरी के सियासी इतिहास की बात करें तो ..1952 में  यहां से कांग्रेस के रामगोपाल शर्मा विधायक चुने गए, तो 1957 में दोहरी सदस्यता वाली इस सीट पर कांग्रेस के पुरूषोत्तम भाई पटेल और झितरूराम चुने गए, लेकिन 1962 में जनसंघ के पंढरीराव कृदत्त ने बाजी पलट दी। 1967 में कांग्रेस के भोपालराव पवार और 1972 में केसरीमल लुंकड़ यहां से विधानसभा पहुंचे । 1977 के जनता लहर में फिर से पंढरीराव कृदत्त ने जीत हासिल की, लेकिन 1980 और 1985 में कांग्रेस की जयाबेन ने ये सीट अपने कब्जे में रखी। 1990 के राम लहर में भाजपा के कृपाराम साहू ने धमतरी का किला फतह किया, लेकिन 1993 में फिर कांग्रेस के केसरीमल लुंकड़ ने बाजी पलट दी। 1998 में कांग्रेस ने हर्षद मेहता को चुनाव मैदान में उतारा और वे भी विधानसभा तक पहुंचे। छत्तीसगढ़ बनने के बाद 2003 में हुए चुनाव में भाजपा के इंदर चोपड़ा ने कांग्रेस के गुरूमुख सिंह होरा को हराया …तो 2008 में गुरुमुख सिंह होरा ने भाजपा के विपिन साहू को 27 हजार से अधिक वोटों से मात दी..2013 में गुरूमुख सिंह होरा ने इंदर चोपड़ा को हराकर सीट पर फिर से कब्जा किया..अब जब चुनावी साल है तो टिकट के लिए घमासान शुरू हो गया है..कांग्रेस की बात की जाए तो कांग्रेस में गुरूमुख सिंह होरा स्वाभाविक दावेदार हैं.. लेकिन हर्षद मेहता, रामगोपाल अग्रवाल, राजू लुंकड़, आनंद पवार, सरिता दोषी और मनीषा साहू भी टिकट के संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। वहीं भाजपा की बात की जाए तो ..

इंदर चोपड़ा ही टिकट के प्रमुख दावेदार नजर आ रहे हैं..लेकिन  जिलाध्यक्ष रामू रोहरा, निषक्तजन आयोग की वर्तमान अध्यक्ष सरला जैन, खिलेश्वरी किरण, अर्चना चौबे, राजेन्द्र शर्मा, रंजना साहू भी टिकट की रेस में शामिल है….वहीं पहली बार चुनावी मैदान में उतरी जेसीसीजे की पकड़ धमतरी में फिलहाल मजबूत नजर नहीं आती..लेकिन कई नेता टिकट की मांग कर रहे हैं ।  हालांकि यहां सियासी दलों के लिए उम्मीदवार का चयन करना इतना आसान नहीं होगा..क्योंकि जनता पार्टी से ज्यादा प्रत्याशी को महत्व देती रही है।

कुल मिलाकर सियासी समीकरणों से लिहाज से अगले चुनाव में धमतरी में सिसासी जंग दिलचस्प रहने वाली है ।

धमतरी  विधानसभा क्षेत्र के मुद्दे

धमतरी खेती किसानी के लिहाज से काफी संपन्न माना जाता है …गंगरैल डैम और रूद्री डैम ने इस क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है …लेकिन सियासी मुद्दों की शुरूआत भी कहीं न कहीं यहीं से शुरू होती है..धमतरी शहर में भी बायपास सड़क, ब्राडगेज और एजुकेशन हब का सपना अब तक अधूरा है और ये अधूरा सपना ही यहां सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है.. वहीं महानदी में अवैध रेत खनन का मुद्दा भी इस बार चुनाव में खूब गूंजेगा। 

दो बड़े डैम गंगरैल और रुद्री के चलते धमतरी विधानसभा क्षेत्र में पानी की कोई कमी नहीं है …लेकिन कहीं न कहीं प्रशासनिक लापरवाही या योजनागत कमी के चलते किसानों को इन बांधों का लाभ नहीं मिल पाता है ….इस इलाके में खेती ही रोजी रोटी का मुख्य जरिया है लेकिन किसी भी गांव में चले जाइए किसानों के पास शिकायतों की लंबी लिस्ट है…ऐसा नहीं है कि धमतरी विधानसभा में सिर्फ ग्रामीण इलाके ही समस्याओं से जूझ रहे हैं … धमतरी शहर में कई मुद्दे ऐसे हैं जो पिछले कई चुनावों से लगातार गूंज रहे हैं और आने वाले चुनाव में और भी मुखर होकर गूंज सकते हैं …इसके अलावा धमतरी की जनता की बड़ी रेल लाइन की मांग भी बरसों से अधूरी है.. वहीं जिले में मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज भी अब तक नहीं खुला है.. जिससे शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है। महानदी में अवैध रेत खनन का मुद्दा भी इस बार बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। 

कुल मिलाकर धमतरी में चुनावी मुद्दों की कोई कमी नहीं है…और आने वाले चुनाव में इनका शोर सुनाई देना तय है। 

 

वेब डेस्क, IBC24


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