मंदसौर पहुंचा नर्मदा-चंबल जनकारवां, विकास के सवाल पर छलका जनता का दर्द

मंदसौर पहुंचा नर्मदा-चंबल जनकारवां, विकास के सवाल पर छलका जनता का दर्द

मंदसौर पहुंचा नर्मदा-चंबल जनकारवां, विकास के सवाल पर छलका जनता का दर्द
Modified Date: November 29, 2022 / 07:55 pm IST
Published Date: May 18, 2017 2:48 am IST

मंदसौर जिले को कुदरत ने भरपूर नेमते बख्शी है। जल, जंगल और उपजाऊ जमीन सब है लेकिन फिर भी विकास की रफ्तार उम्मीद से कोसो दूर है। मंदसौर की जीवन रेखा शिवना नदी में प्रदूषण की वजह से नाले में तब्दील हो रही है। जबकि मंदसौरवासी इसी नदी के भरोसे अपनी प्यास बुझाते हैं। मंदसौर की पहचान अफीम किसानों के लिए जी का जंजाल बनी हुई है। कड़ी मेहनत के बावजूद किसानों के चेहरे पर खुशहाली के बजाय चिंता की लकीरें हैं। तस्करी और फसल खराब होने पर सरकारी रिकवरी किसानों के गले की फांस है। डोडाचूरा को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। जिससे किसान काफी परेशान है।

वहीं अफीम से जिले के युवा नशे की गिरफ्त में हैं। मंदसौर देश के बड़े दुग्ध उत्पादक जिलों में शामिल है लेकिन अब तक यहां कोई मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट नहीं है। यहां स्लेट पत्थर का कारखाना तो है लेकिन इसने स्थानीयों को सिलिकोसिस बीमारी के अलावा कुछ नहीं दिया। दलोदा शुगर मिल बंद पड़ी है। मजदूर बेरोजगार हैं। शिक्षा के लिए युवा दूसरे जिलों में जाने पर मजबूर हैं। मंदसौर में रेल यातायात की कमी है। इसके अलावा स्टेट हाइवे पर बसे बछिया जाति के गांव भी बड़ी समस्या बने हुए हैं। यहां के लोग वेश्यावृत्ति के मकड़जाल में फंसे हुए हैं इनकी तरफ भी प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

 


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