शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार के मामले में बेहद पीछे है बिंद्रानवागढ़
शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार के मामले में बेहद पीछे है बिंद्रानवागढ़
जनता मांगे हिसाब के सफर की शुरुआत करते हैं छत्तीसगढ़ की बिंद्रानवागढ़ विधानसभा से…सियासी बिसात और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर…
गरियाबंद जिले में आती है विधानसभा
हीरा खदान के लिए मशहूर
कुल जनसंख्या- 2 लाख 99 हजार 35
कुल मतदाता-2 लाख 40 हजार 99
पुरुष मतदाता-1 लाख 10 हजार 51
महिला मतदाता-1 लाख 30 हजार 48
वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा
गोवर्धन मांझी हैं बीजेपी विधायक
बिंद्रानवागढ़ की सियासत
चुनाव नजदीक हैं तो सियासी बिसात भी बिछने लगी है..कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही बिंद्रानवागढ़ में जीत का परचम लहराने की रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं।इसके साथ ही विधायक की टिकट के दावेदार भी सामने आने लगे हैं ।
2003 में कांग्रेस की जीत तो 2008 से अब तक बीजेपी का कब्जा ऐसी सियासी तस्वीर है बिंद्रनवागढ़ विधानसभा की….बीते चुनाव में बीजेपी के गोवर्धन मांझी ने जीत का परचम लहराया था..अब चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है…तो जहां बीजेपी इस बार भी जीत दर्ज करने की रणनीतियां बनाने में जुट गई है तो वहीं कांग्रेस अपनी वापसी की कोशिश में है…इसके साथ ही टिकट के दावेदार भी सामने आने लगे हैं..बात कांग्रेस की करें तो ओंकार शाह सबसे प्रबल दावेदार हैं तो वहीं जनकलाल ध्रुव ,सेवन पुजारी और संजय नेताम टिकट की दौड़ में हैं..बात बीजेपी की करें तो दावेदारों में वर्तमान विधायक गोवर्धन मांझी का नाम सबसे आगे है..इसके अलावा डमरूधर पुजारी,भागीरथी मांझी और रामरतन मांझी दावेदारों में शामिल हैं ।
बिंद्रानवागढ़ के मुद्दे
बिंद्रानवागढ़ विधानसभा में हर तरफ समस्याएं नजर आती हैं…शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार के मामले में बेहद पीछे है..विकास तो छोड़िए बुनियादी सुविधाओं तक के लिए तरस रहे हैं लोग ।
खनिज संपदा से धनी धरती है ब्रिंदानवागढ़ की..लेकिन इस अमीर धरती पर रहने वाले लोग गरीबी का दंश झेल रहे हैं..एक नहीं कई समस्याओं से जूझ रही है जनता…सबसे ज्यादा संकटों से घिरा नजर आता है किसान..ना तो सिंचाई के संसाधन हैं..और ना ही उपज का सही दाम मिल पा रहा है…स्वास्थ्य सुविधाओं की भी हालत खराब है..डॉक्टरों की कमी के चलते मरीज बड़े शहर जाने को मजबूर हैं..सुपेबेड़ा में तो किडनी की बीमारी के कहर से लोग काल के गाल में समा रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया..स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ शिक्षा की स्थिति भी बदहाल है..बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है..रोजगार के साधनों के अभाव में पलायन थम नहीं रहा है…विधानसभा में सड़कों की हालत भी खस्ता है..इसके अलावा बिजली की आंख मिचौली से भी लोग परेशान हैं…इन सब समस्याओं के बीच नक्सलवाद भी अपने पैर पसार रहा है..हालांकि फोर्स की तैनाती से कुछ हद तक नक्सलवाद पर लगाम लगी है ।
वेब डेस्क, IBC24

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