IBC24 की चौपाल पर सक्ती विधानसभा की जनता ने गिनाई अपनी समस्याएं

IBC24 की चौपाल पर सक्ती विधानसभा की जनता ने गिनाई अपनी समस्याएं

IBC24 की चौपाल पर सक्ती विधानसभा की जनता ने गिनाई अपनी समस्याएं
Modified Date: November 29, 2022 / 08:25 pm IST
Published Date: June 22, 2018 11:32 am IST

अब बात छत्तीसगढ़ की सक्ती विधानसभा की…सियासी तस्वीर और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर।

जांजगीर-चांपा जिले में आती है विधानसभा सीट

कुल मतदाता-1 लाख 93 हजार 760

पुरुष मतदाता-99 हजार 302

महिला मतदाता-94 हजार 458

वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

डॉ खिलावन साहू हैं बीजेपी विधायक

सक्ती विधानसभा की सियासत

विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरु हो गया है और सियासी बिसात भी बिछने लगी है। बीजेपी और कांग्रेस तो चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है ही..JCCJ,बसपा और आप पार्टी भी सक्ती विधानसभा में सक्रिय दिखाई दे रही है ।

ना बीजेपी का गढ़ ना कांग्रेस का यही सियासी तासीर है सक्ती विधानसभा की 2003 में बीजेपी के मेघाराम साहू ने जीत दर्ज की तो 2008 में कांग्रेस की सरोजा राठौर ने जीत का परचम लहराया..इसके बाद 2013 में बीजेपी के डॉ खिलावन साहू ने कांग्रेस की सरोजा राठौर को शिकस्त देकर विधानसभा पर कब्जा जमाया.. अब 2018 के चुनावी रण में फतह करने की रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं सियासी दल इसके साथ ही विधायक की टिकट के दावेदार भी विधानसभा में सक्रिय दिखाई देने लगे हैं..बात बीजेपी की करें तो वर्तमान विधायक डॉ खिलावन साहू सबसे प्रबल दावेदार हैं…तो वहीं कांग्रेस से डॉ चरणदास महंत दावेदारों में सबसे आगे माने जा रहे हैं..इसके अलावा नगर पालिका अध्यक्ष श्यामसुंदर अग्रवाल भी दावेदार हैं..अब टिकट की रेस में कौन जीतेगा ये तो तय नहीं है लेकिन इतना तो तय है कि इस बार के चुनावी समर में बीजेपी और कांग्रेस के अलावा JCCJ और बसपा भी मैदान में होगी ।

सक्ती विधानसभा के मुद्दे

हर बार सक्ती विधानसभा में विकास के वादे और दावे तो किए गए लेकिन हालत नहीं बदले। विकास का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पेयजल संकट जैसी समस्या से जूझ रहे हैं लोग । 

सक्ती विधानसभा में विकास का पहिया थमा नजर आता है जहां देखो वहां समस्याएं नजर आती हैं। सक्ती को जिला बनाने की मांग की जाती रही है लेकिन अब तक पूरी नहीं हो सकी। इसके अलावा एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज की मांग भी अधूरी है। तो वहीं कृषि विज्ञान केंद्र की मांग भी अब तक पूरी नहीं हुई। बाराद्वार उपतहसील को तहसील बनाने की मांग भी उठती रही है। रेलवे ओवरब्रिज की मांग भी अधूरी है। विधानसभा के ग्रामीण इलाकों में भालुओं के आतंक से भी लोग परेशान हैं। लेकिन जामवंत प्रोजेक्ट अब तक शुरु नहीं हो पाया। सक्ति में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी है तो अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। इसके अलावा पेयजल संकट से भी जूझ रही है जनता। गर्मियों में तो हालत ये कि बूंद-बूंद पानी के लिए तरस जाते हैं लोग ।

 

वेब डेस्क, IBC24


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