अब बात मध्य प्रदेश की भांडेर विधानसभा की। जीत-हार के गुणा-भाग और समस्याओं की बात करें इससे पहले विधानसभा की प्रोफाइल पर एक नजर
दतिया जिले में आती है विधानसभा सीट
1 नगर पालिका और 68 पंचायतें विधानसभा में शामिल
पुरुष मतदाता-92 हजार 149
महिला मतदाता-79 हजार 198
58 हजार SC,ST मतदाता
91 हजार OBC मतदाता
19 हजार सामान्य मतदाता
चुनाव में OBC मतदाता होते हैं निर्णायक
वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा
घनश्याम पिरौनियां हैं बीजेपी विधायक
भांडेर विधानसभा की सियासत
एक नहीं..दो नहीं बल्कि बीते तीन विधानसभा चुनाव से बीजेपी भांडेर में जीत का परचम लहराती आ रही है…इस बार के चुनावी समर में भी जीत दर्ज करने की तैयारी में है बीजेपी तो वहीं कांग्रेस बीजेपी के इस किले में सेंध लगाने की कोशिश में है…चुनाव नजदीक हैं तो सियासी बिसात भी बिछना शुरु हो गई है ।
भांडेर विधानसभा में बीते तीन चुनावों से कमल खिलता आ रहा है। सियासी इतिहास में झांकें तो 1998 में कांग्रेस के केशरी प्रसाद चौधरी विधायक चुने गए इसके बाद 2003 में बीजेपी के कमलापत आर्य ने चुनावी समर में जीत दर्ज की। वहीं 2008 में बीजेपी ने कमलापत आर्य की जगह आशाराम अहिरवार को चुनावी मैदान में उतारा और जीत दर्ज की। इसके बाद 2013 में भी बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बदलते हुए घनश्याम पिरौनियां को टिकट दिया और जीत का परचम भी लहराया। अब एक बार फिर चुनाव की रणभेरी बजने वाली है। इसीलिए चुनावी रंग में रंगने लगा है भांडेर। इसके साथ ही टिकट के दावेदार भी सक्रिय दिखाई देने लगे हैं। बात कांग्रेस की करें तो बीते चुनाव में हार का सामना कर चुके अरुण कुमार भारती सबसे प्रबल दावेदार हैं। इसके अलावा भी कई नेता टिकट की आस में हैं। अब बात बीजेपी की करें तो वर्तमान विधाक घनश्याम पिरौनियां दावेदार हैं..इसके अलावा 2003 में बीजेपी के विधायक रहे कमलापत आर्य भी टिकट की दौड़ में हैं।
भांडेर विधानसभा के मुद्दे
भांडेर में विकास की तस्वीर क्या होगी इसका अंदाजा इस बात से लग जाता है कि पीने के पानी तक को तरस रहे हैं लोग। शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार के मामले में भी फेल नजर आता है भांडेर।
भांडेर में विकास की तस्वीर धुंधली नजर आती है। हर तरफ समस्याओं से घिरे दिखाई देते हैं लोग। पेयजल संकट से जूझ रही है जनता। स्वच्छता के मामले में भी फिसड्डी है भांडेर। शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति भी खराब है। रोजगार के साधनों के अभाव में बेरोजगारी हर तरफ दिखाई देती है नतीजा पलायन को मजबूर हैं लोग। स्कूली शिक्षा तो बदहाल है ही। उच्च शिक्षा के भी हालत ठीक नहीं हैं। कन्या महाविद्यालय की मांग सालों से की जाती रही है लेकिन अब तक पूरी नहीं हुई है। स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो आज भी अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। नतीजा जिला मुख्यालय जाने के लिए मजबूर हैं मरीज। ये वो समस्याएं हैं जिनसे दो-चार हो रहा है भांडेर ।
वेब डेस्क, IBC24