IBC24 की चौपाल में लैलुंगा की जनता ने मुखर की समस्याएं

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IBC24 की चौपाल में लैलुंगा की जनता ने मुखर की समस्याएं

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  • Publish Date - June 27, 2018 / 11:03 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:19 PM IST

जनता मांगे हिसाब के सफर की शुरुआत करते हैं छत्तीसगढ़ की लैलूंगा विधानसभा से..सियासी समीकरण और मुद्दों से पहले एक नजर विधानसभा की प्रोफाइल पर।

रायगढ़ जिले में आती है विधानसभा सीट

कोयला खदानों के लिए मशहूर

कुल मतदाता- 1 लाख 88 हजार 803

पुरुष मतदाता-95 हजार 11

महिला मतदाता-93 हजार 792

वर्तमान में विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा

सुनीति राठिया हैं बीजेपी विधायक

लैलूंगा विधानसभा की सियासत

लैलूंगा विधानसभा बीजेपी की परंपरागत सीट मानी जाती है..तीन बार हुए विधानसभा चुनाव में दो बार बीजेपी को तो एक बार कांग्रेस को जीत मिली है…अब चुनाव का काउंटडाउन शुरु हो गया है तो सियासी बिसात भी बिछना शुरु हो गई है ।

2003 में बीजेपी का कब्जा..2008 में कांग्रेस का और फिर 2013 में बीजेपी की जीत..ऐसी सियासी तस्वीर है लैलूंगा विधानसभा सीट की…अब चुनाव नजदीक हैं तो जहां बीजेपी इस बार भी जीत की कोशिश में जुट गई है तो वहीं कांग्रेस 2008 की तरह 2018 में जीत का परचम लहराने की रणनीतियां बना रही है..इसके साथ ही विधायक की टिकट के दावेदार भी सामने आने लगे हैं।

बात कांग्रेस की करें तो चक्रधर सिदार और विद्यावती सिदार प्रबल दावेदार हैं..इसके अलावा भी कांग्रेस में कई दावेदार टिकट के लिए ताल ठोक रहे हैं…कांग्रेस की तरह बीजेपी में भी दावेदारों की लंबी फौज हैं…जिसमे सबसे प्रबल दावेदार हैं वर्तमान विधायक सुनीति राठिया..तो वहीं पूर्व विधायक सत्यानंद राठिया भी दावेदार हैं..इसके अलावा जनपद पंचायत अध्यक्ष सांता साय भी टिकट की दौड़ में हैं…अब तक तो चुनावी मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होता आया है लेकिन इस बार मैदान में JCCJ भी होगी । कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक हृदयराम राठिया के JCCJ में शामिल होने से लैलूंगा के सियासी समरीकरण भी बदलते दिखाई देने लगे हैं ।

लैलूंगा विधानसभा के मुद्दे

लैलूंगा विधानसभा में वो सबकुछ है जो इसे विकास के नक्शे पर जगह दिला सके लेकिन ऐसा हुआ नहीं…आज भी लोग गरीबी, बेरोजगारी जैसी समस्याओं से दो-चार हो रहे हैं ।

काला सोने उगलने वाली धरती..यानी कोयला उत्खनन के लिए मशहूर है लैलूंगा विधानसभा..खनिज संपदा से धनी होने के बाद भी ये इलाका विकास की दौड़ में पीछे नजर आता है…बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है…रोजगार के साधन हैं नहीं नतीजा पलायन के लिए मजबूर हैं लोग…तो वहीं मनरेगा के भुगतान ना होने से भी परेशान हैं लोग..शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की भी हालत खराब है..स्कूलों में शिक्षकों की कमी है तो वहीं उच्च शिक्षा के लिए कोई बड़े शिक्षण संस्थान नहीं हैं..शिक्षा के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल हैं..अस्पतालों में डॉक्टरों और संसाधनों की कमी के चलते मरीज बड़े शहर जाने को मजबूर हैं…इन सब समस्याओं के बीच किसान भी संकटों से घिरा नजर आता है..क्योंकि सिंचाई के पर्याप्त साधन ना होने से खेत प्यासे हैं तो वहीं उपज का सही दाम किसानों को नहीं मिल पा रहा है ।

 

वेब डेस्क, IBC24