वाशिंगटन, 23 जुलाई (एपी) अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की सैनिकों में कम ‘टेस्टोस्टेरोन’ स्तर की जांच और उपचार शुरू करने की नयी पहल के बाद एक संघीय न्यायाधीश ने यह सवाल उठाया है कि इस तरह की ‘टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी’ (टीआरटी) और सेना में ट्रांसजेंडर पुरुषों को दी जाने वाली ‘हार्मोन थेरेपी’ में क्या अंतर है।
वाशिंगटन की अमेरिकी ‘डिस्ट्रिक्ट’ न्यायाधीश एना रेयेस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सेना में ट्रांसजेंडर लोगों की सेवा पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान बुधवार को यह प्रश्न उठाया। रेयेस ने कहा कि ट्रंप के प्रतिबंध में कहा गया है कि ‘‘सशस्त्र बलों को उच्च मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य मानकों का पालन करना चाहिए… और इसके लिए नियमित चिकित्सकीय उपचार या विशेष प्रावधानों का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए।’’
रेयेस ने मुकदमे के दोनों पक्षों को यह बताने का आदेश दिया कि ट्रांसजेंडर पुरुषों और जन्म के समय निर्धारित लिंग के अनुरूप पहचान रखने वाले लोगों समेत अन्य सैन्यकर्मियों को चिकित्सा और प्रशासनिक स्तर पर टीआरटी देने में क्या समानताएं और अंतर हैं।
दरअसल, ट्रांसजेंडर पुरुष भी अक्सर टेस्टोस्टेरोन चिकित्सा का सहारा लेते हैं, ताकि उनके शरीर में पुरुषों जैसे शारीरिक परिवर्तन हो सकें। दूसरी ओर, हेगसेथ की नयी नीति के तहत अन्य सैनिकों को भी चिकित्सकीय कारणों से टेस्टोस्टेरोन दिया जा सकता है।
न्यायाधीश ने रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि नयी नीति और सैन्य प्रतिबंध के तहत ट्रांसजेंडर पुरुषों तथा अन्य सैनिकों के साथ अलग-अलग व्यवहार करने का आधार क्या है।
रेयेस का यह आदेश रक्षा मंत्री हेगसेथ की उस घोषणा के एक सप्ताह बाद आया है, जिसमें उन्होंने सैनिकों में ‘‘टेस्टोस्टेरोन की कमी’’ की जांच के लिए नया कार्यक्रम शुरू करने की बात कही थी। उन्होंने इसे सैनिकों को ‘‘अपनी सर्वोत्तम क्षमता के साथ काम करने’’ में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक बताया था।
उन्होंने कहा था कि 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के सैनिकों की अनिवार्य वार्षिक स्वास्थ्य जांच की जाएगी। 30 वर्ष से कम आयु के सैनिक स्वेच्छा से यह जांच करा सकेंगे। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में हेगसेथ ने कहा कि टीआरटी लेना पूरी तरह स्वैच्छिक होगा।
ट्रंप प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने भी पुरुषों के लिए टीआरटी तक आसान पहुंच की वकालत शुरू कर दी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि हेगसेथ और अन्य अधिकारियों के संदेशों में इस हार्मोन से जुड़े स्थापित वैज्ञानिक तथ्यों के साथ-साथ कुछ ऐसे व्यापक दावे भी शामिल हैं, जिनके समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन का स्तर स्वाभाविक रूप से कम होता जाता है। विशेषज्ञों के बीच वर्षों से इस बात पर मतभेद रहे हैं कि इन समस्याओं का निदान किस प्रकार किया जाए और क्या इनका उपचार हार्मोन की पूर्ति करके किया जाना चाहिए।
एपी गोला सिम्मी
सिम्मी