छत्तीसगढ़ में लैंगिक अल्पसंख्यक अधिकार मांगने सामने आए 

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छत्तीसगढ़ में लैंगिक अल्पसंख्यक अधिकार मांगने सामने आए 

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  • Publish Date - November 10, 2017 / 11:36 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:09 PM IST

समाज का एक ऐसा वर्ग जो सदियों से अवहेलना का शिकार झेल रहा है क्यों उसे खुद पता नहीं। उसने क्या गलती कर दी की वो जन्म से सिर्फ और सिर्फ तृष्कृत है जिसे जानने वो दर दर भटकता है ?कभी माँ की खोज में ,कभी घर ,कभी पति की तलाश में लेकिन उसे हाथ लगती है सिर्फ निराशा। आखिर क्यों उसे स्कूल में सब बच्चो की तरह नहीं देखा जाता ?आखिर क्यों उन्हें शादी का अधिकार नहीं ?आखिर क्यों उन्हें सरकारी पन्नो में अपने लिंग के कॉलम को ढूंढना पड़ता है।जी हाँ हम बात कर रहे है.छत्तीसगढ़ में तृतीय लिंग के हितों की रक्षा के लिए बने संगठन मितवा ने लैंगिक अल्पसंख्यकों की अधिकारों की हितों की रक्षा के दिल्ली प्राइड मार्च के समर्थन में लैंगिक अल्पसंख्यकों के  मिलन समारोह का आयोजन किया। समारोह में हिदायतुल्ला लॉ कालेज के छात्र-छात्राओं ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।आपको बता दे की ये  छत्तीसगढ़ में इस तरह का  पहला आयोजन था। 

तृतीय लिंग समुदाय से संबंध रखने वाली और मितवा संगठन के अध्यक्ष विद्या राजपूत के मुताबिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य तृतीय लिंग के अलावा गे, लेस्बियन के अधिकारों की रक्षा करना है। सम्मेलन में 50 से ज्यादा लेस्बियन और गे शामिल हुए. हिदायुतल्लाह लॉ कालेज के छात्र और कार्यक्रम के संयोजक अक्षय मानकर के मुताबिक छत्तीसगढ़ सहित देश में लैंगिक अल्पसंख्यकों की मानवाधिकारों की स्थिति बेहद खराब है.

विवाह मान्यता की मांग 

मितवा संगठन के अध्यक्ष ने गे और लेस्बियन के विवाह  को मान्यता देने की मांग की है। इसके अलाव संगठन के अध्यक्ष ने आप्राकृति कृत्य की धारा 377 पर केन्द्र सरकार से पुन: विचार  कर समाप्त करने की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष विद्या के मुताबिक धारा 377 से समलैंगिक जोड़ों को सबसे ज्यादा परेशान किया जाता रहा है.केन्द्र और राज्य सरकार ने थर्ड जेंडरों की हितों को ध्यान में रखकर जिस तरह से कानून बनाया है, उसी तर्ज पर समलैंगिक जोड़ों की रक्षा के लिए थर्ड जेंडरों की तरह कानून बनाने की मांग संगठन के अध्यक्ष ने की है। संगठन ने १२ नवंबर को दिल्ली में आयोजित प्राइड मार्च को समर्थन देने की बात कही.ibc24 web team