मोदी ने कोविड-19 का टीका लगवा चुके स्वास्थ्यकर्मियों से किया संवाद, भय व भ्रांतियां दूर करने की कोशिश की

मोदी ने कोविड-19 का टीका लगवा चुके स्वास्थ्यकर्मियों से किया संवाद, भय व भ्रांतियां दूर करने की कोशिश की

मोदी ने कोविड-19 का टीका लगवा चुके स्वास्थ्यकर्मियों से किया संवाद, भय व भ्रांतियां दूर करने की कोशिश की
Modified Date: November 29, 2022 / 08:49 pm IST
Published Date: January 22, 2021 10:18 am IST

वाराणसी, 22 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोविड-19 का टीका लगवा चुके अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के स्वास्थ्यकर्मियों से संवाद किया और इस दौरान टीके को लेकर समाज के एक वर्ग में व्याप्त भय व भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की।

उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 का टीका आज दुनिया की सबसे बड़ी जरूरत है और भारत इस मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि टीकाकरण अभियान को लेकर भारत की तैयारी पूरी है और टीके देश के कोने-कोने में तेजी से पहुंच रहे हैं।

संवाद के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों ने टीके को लेकर अपने अनुभव साझा किए और बताया कि उन्हें इससे न तो कोई परेशानी हुई न ही उसका कोई दुष्प्रभाव हुआ।

स्वास्थ्यकर्मियों ने लोगों से आग्रह किया कि वे बढ़-चढ़कर टीकाकरण अभियान में हिस्सा लें और समाज को सुरक्षित बनाएं।

मोदी ने संवाद के दौरान कहा, ‘‘कई चरणों की प्रक्रिया से गुजरने के बाद तय हुआ है कि इसका कोई बड़ा ‘साइड इफेक्ट’ नहीं है। इसलिए देशवासी अपने वैज्ञानिकों और चिकित्सकों पर भरोसा कर रहे हैं। जब चिकित्सा जगत के लोग यह कहते हैं तो लोगों को विश्वास होता है।’’

प्रधानमंत्री ने 16 जनवरी को देशव्यापी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी। टीकाकरण के पहले चरण में तीन करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों को टीका लगाया जाना है।

मोदी का यह संवाद ऐसे समय हुआ है जब टीके को लेकर कुछ स्वास्थ्यकर्मी भयभीत दिखे और टीकाकरण के लिए निर्धारित केंद्रों पर नहीं पहुंचे।

टीकाकरण में देरी को लेकर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते मोदी ने कहा कि कोई भी वैक्सीन बनाने के पीछे वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत और एक पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब राजनीति में तो इधर की भी बात होती है और उधर की भी बात होती है। मैं एक ही जवाब देता हूं। वैज्ञानिक जो कहेंगे, वही हम करेंगे। ये हम राजनीतिक लोगों का काम नहीं है कि हम तय करें। लंबी कठिन प्रक्रिया और वैज्ञानिक जांच पड़ताल के बाद टीके आए हैं।’’

संवाद के दौरान एक स्वास्थ्यकर्मी ने इस अभियान के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद व्यक्त किया तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इस पूरे अभियान का श्रेय देश के स्वास्थ्यकर्मियों और वैज्ञानिकों को जाता है।

कोरोना वायरस संक्रमण काल में स्वास्थ्यकर्मियों के काम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘सचमुच में आप लोगों ने अद्भुत काम किया है। इतने बड़े संकट से देश को बचाने में कोराना योद्धाओं की बहुत बड़ी भूमिका है और ये मैं बार-बार बोल रहा हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके हकदार मैं नहीं, आप लोग हैं। अनिश्चितता के बीच आपने हिम्मत के साथ काम किया। हमारे वैज्ञानिक पूरे विश्वास के साथ इस अंजान दुश्मन का पीछा करते रहे। वैज्ञानिक तो आधुनिक ऋषि हैं। दिन-रात मेहनत करके उन्होंने यह काम किया। इसलिए इसका क्रेडिट आप सबको जाता है।’’

मोदी ने संवाद से पहले अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि आज दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान भारत में चल रहा है और इसके पहले दो चरणों में 30 करोड़ देशवासियों को टीका लगाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज देश में ऐसी इच्छाशक्ति है कि देश खुद अपनी वैक्सीन बना रहा है। वह भी एक नहीं, दो-दो मेड इन इंडिया वैक्सीन। आज देश की तैयारी ऐसी है कि देश के कोने-कोने तक वैक्सीन तेजी से पहुंच रही है और आज दुनिया की इस सबसे बड़ी जरूरत को लेकर भारत पूरी तरह से आत्मनिर्भर है। इतना ही नहीं भारत अनेक देशों की मदद भी कर रहा है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले चरण में वाराणसी में करीब 20,000 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मियों को टीके लगाए जाएंगे और इसके लिए 15 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं।

उन्होंने इस अभियान में लगे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों का धन्यवाद किया।

भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र नेत्रपाल

नेत्रपाल


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