धार पहुंचा नर्मदा-चंबल जनकारवां, लोगों ने बयां की शहर की अनेक समस्याएं

धार पहुंचा नर्मदा-चंबल जनकारवां, लोगों ने बयां की शहर की अनेक समस्याएं

धार पहुंचा नर्मदा-चंबल जनकारवां, लोगों ने बयां की शहर की अनेक समस्याएं
Modified Date: November 29, 2022 / 08:46 pm IST
Published Date: May 24, 2017 2:52 am IST

 

कभी राजा भोज की वैभवषाली और समृद्ध राजधानी रहा धार आज विकास की दौड़ में पिछड गया है। धार में उद्योग धंधों की कमी और रोजगार की कमी के चलते यहां से हर साल हजारों लोगों का पलायन होता है। हालांकि धार जिले में ही औद्योगिक केंद्र पीथमपुर स्थित है लेकिन वहां भी इस जिले के स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के दरवाजे कम ही खुले है। उधर धार जिले से नर्मदा नदी भी गुजरती है लेकिन इस जिले में सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण और लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण यहां खेती लाभ का धंधा साबित नहीं हो रहा है ऐसे में यहां से पलायन की दर और बढ गई है। 

नर्मदा पर बनने वाले बांधों के कारण डूब प्रभावितों की फेहरिस्त में धार जिले के भी कई गांवों का नाम शामिंल है और इसी के कारण धार जिले में लंबे समय से नर्मदा बचाओ आंदोलन जारी है। सरदार सरोवर डेम पर138. 68 मीटर की नई उंचाई पर गेट लगाए जाने के कारण धार जिले के 76 गांव डूब जाएंगे…इसमें निसरपुर एक बडी आबादी का कस्बा है जो दूसरे हरसूद में तब्दील हो जाएगा। कोर्ट यहां 31 जून तक पूरी तरह से पुनर्वास के आदेश दिए है लेकिन अभी पुनर्वास स्थल पर ना तो सडके है, ना मकान और ना ही बिजली पानी जेसी सुविधाएं। 

धार के विकास में सबसे बडा रोढा यहां रेल लाइन का ना होना भी है और पिछले चार दशकों से यहां रेल लाइन के लिए आंदोलन चल रहा है। 2008 में यहां तात्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इंदौर, धार दाहोद रेललाइन की आधार शिला रखी थी लेकिन 9 साल गुजर जाने के बाद भी अभी तक रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण का काम भी पूरा नहीं हो पाया है।

धार शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं में भी काफी पीछे है। यहां उच्च शिक्षा के लिए ना तो मेडिकल कालेज है और ना ही सरकारी इंजीनियरिंग कालेज….स्कूल की पढाई पूरी करने के बाद यहां के बच्चे इंदौर की राह पकड़ लेते है तो वहीं पैसों के आभाव में कई होनहार बच्चे बीच में ही पढाई छोड देते है। जिला अस्तापल रैफरल हाॅस्पीटल बन कर रह गया है और डाक्टरों की कमी के चलते यहां से मरीजों को सीधे इंदौर ही भेजना पडता है। कभी राजा भोज की राजधानी रहा धार शहर आज अतिक्रमण, तंग गलियों , बेतरतीब यातायात, पेयजल समस्या और सीवेज-गंदगी जैसे बुनियादी मुद्दो से जूझ रहा है । 

 


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