सीहोर पहुंचा “नर्मदा-चंबल जनकारवां”, बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे लोग

सीहोर पहुंचा "नर्मदा-चंबल जनकारवां", बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे लोग

सीहोर पहुंचा “नर्मदा-चंबल जनकारवां”, बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे लोग
Modified Date: November 29, 2022 / 08:26 pm IST
Published Date: May 30, 2017 2:49 am IST

 

मध्यप्रदेश का सीहोर जिला.. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान का गृहजिला होने के बावजूद विकास की राह देख रहा है। बुनियादी सुविधाएं अब तक यहां के लोगों की पहुंच से दूर हैं। कहने को तो सीहोर में नर्मदा के अलावा पार्वती, अजनल, कोलार, उतावली, सीप, अंबर, सीवन, कालीसोत, नेवज और दूधी नदियां हैं लेकिन कुछ प्रदूषण के कारण तो कुछ नदियां जलावर्धन या गहरीकरण का काम ना होने से सूख चुकी हैं और लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। नर्मदा का पानी शहरवासियों को देने का वादा तो किया गया लेकिन पूरा नहीं हुआ। जिले में प्राकृतिक संपदा को बेतहाशा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अवैध खनन और लकडी की तस्करी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। सीएम प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने की बात करते हैं लेकिन उनके गृह जिले में उद्योगों के बुरे हाल हैं। ऐतिहासिक पेपर मिल, जगमानिक सोया प्लांट, बीएसआई शुगर मिल, शासकीय तिलहन संघ का सोया कारखाना बंद हो चुका है। लोग रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं। उच्च शिक्षा के इंतजाम नहीं हैं। सड़कें खस्ताहाल हैं और जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो गई है। सीवरेज लाइन बिछाने का काम अधूरा पड़ा है। पार्किंग की व्यवस्था न होने से रोजाना जाम जैसी स्थिति रहती है। रेलवे ओवरब्रिज का पिछले 4 सालों से अधूरा है। स्वास्थ्य सेवाएं भी दम तोड़ती नजर आती हैं।

 

 


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