शाजापुर। विधायकजी के रिपोर्ट कार्ड में आज बारी है शाजापुर जिले के शुजालपुर विधानसभा सीट की। पूरी तरह से ग्रामीण इलाके में आने वाले चुनाव को लेकर सरगर्मियां शुरू हो गई हैं। मुद्दे और मसले उछाले जाने लगे हैं, जिनकी यहां कोई कमी भी नहीं है। पहली नजर में शुजालपुर विधानसभा क्षेत्र वक्त के किसी गड्ढे में फंसा नजर आता है। जाहिर हैं यहां नेताओं को खिलाफ लोगों में खूब गुस्सा है और ये गुस्सा आने वाले चुनाव में भी नजर आएगा ये तय है।
शाजापुर जिले में आने वाली शुजालपुर विधानसभा पूरी तरह से ग्रामीण परिवेश वाली सीट है और यहां की अधिकतर आबादी ग्रामीण इलाकों में ही रहती है। कभी कांग्रेस की गढ़ रही इस सीट पर बीते 15 सालों से बीजेपी काबिज हैं और वर्तमान विधायक जसवंत सिंह हाड़ा लगातार दो चुनाव जीत चुके हैं। वे 2018 में हैट्रिक लगाने की मंशा लिए एक बार फिर चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। लेकिन बीजेपी विधायक को इतना जरूर समझ लेना चाहिए कि सियासी रूप से ये इलाका जितना शांत नजर आता है उतना है नहीं। अब यहां के मतदाता भी नेताओं से अपने वोट का हिसाब किताब मांगने की तैयारी करने लगे हैं।
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बुनियादी सुविधाओं के अलावा ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों को खेती के लिए जरूरी बिजली और पानी की व्यवस्था भी बमुश्किल हो पाती है। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। यही वजह है कि ये वर्ग अपने आप को ठगा हुआ महसूस करता है। शुजालपुर में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का भी बुरा हाल है। क्षेत्र में कोई बड़ा अस्पताल नहीं होने के कारण अक्सर मरीजों को भोपाल-इंदौर जैसे बड़े शहरों में उपचार के लिए रैफर किया जाता है। वहीं स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई का स्तर भी लगातार गिर रहा है।
कांग्रेस ने भी पिछले दस सालों से यहां का प्रतिनिधित्व कर रहे जसवंत सिंह हाड़ा को घेरने की तैयारी कर ली है। उनकी निष्क्रियता के साथ साथ भ्रष्टाचार के मुदे पर भी कांग्रेस नेता अब उनके खिलाफ माहौल बना रहे हैं। वहीं दूसरी ओर आरोपों के बीच बीजेपी विधायक भी मुकाबले की पूरी तैयारी में हैं। उनका दावा है कि वे इलाके में पूरी तरह सक्रिय हैं। कुल मिलाकर शुजालपुर में बीजेपी विधायक पूरे आत्मविश्वास से कहते हैं कि विधानसभा क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत है। पिछली दो जीत उनके आत्मविश्वास की संभावित वजह हो सकती हैं। बेहद शांत नजर आने वाले शुजालपुर में सियासत की हलचल को पकड़ना इतना आसान भी नहीं है।
शुजालपुर के सियासी समीकरण की बात की जाए तो कभी कांग्रेस की मजबूत गढ़ रही इस विधानसभा सीट पर 2003 से बीजेपी काबिज है..और वर्तमान विधायक जसवंत सिंह हाड़ा लगातार दो बार से विधायक हैं। लेकिन ये सीट 2018 में भी बीजेपी के कब्जे में रहेगी इसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल पिछले दो चुनाव में कांग्रेस की आपसी गुटबाजी के चलते बीजेपी को जीत मिली है। राजपूत और परमार वोटर्स यहां बड़ी सियासी ताकत हैं, जिन्हें साधे बिना सीट को जीतना आसान नहीं। 1998 में शुजालपुर से कांग्रेस के केदारसिंह मंडलोई करीब 15 हजार मतो से जीते थे। यह सीट वैसे तो कांग्रेस की रही है, लेकिन 2003 में भाजपा के फुलसिंह मेवाड़ा करीब 25 हजार वोटो से चुनाव जीते थे। वहीं 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से जसवंत सिंह हाड़ा ने कांग्रेस के महेंद्र जोशी को 10414 मतों से परास्त किया था। इसी प्रकार 2013 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर भाजपा से जसवंत सिंह हाड़ा और कांग्रेस से महेंद्र जोशी मैदान में थे। एक बार फिर जसवंत सिंह हाड़ा ने महेंद्र जोशी को 8656 मतों से शिकस्त दी। शुजालपुर विधानसभा में बीते 15 सालों से कमल खिल रहा है लेकिन राज्य सरकार और विधायक भी एक ही पार्टी होने के बावजूद यहां की जनता को उतना फायदा नहीं मिला जितना उन्होंने उम्मीद की थी।
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शुजालपुर से 4 किलोमीटर दूर स्थित शिवपुरा गांव की हालत बताती है कि ये विधानसभा क्षेत्र विकास की रफ्तार में कितना पीछे हैं। शिवपुरा गांव के लोगों ने आजादी से लेकर आज तक सड़क नहीं देखी है और बारिश के दिनों मे ऐसे ही कीचड़ में फंसते-निकलते अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं। जब हमारी टीम शिवपुरा गांव पहंची और यहां के लोगों से बातचीत की तो उनका दर्द जुबां तक आने में देर न लगी। ऐसा नहीं है कि शुजालपुर में केवल शिवपुरा गांव में ही बदहाली नजर आता है। ऐसे कई गांव है जहां बारिश के दिनों में लोग दुश्वारियों के बीच जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। चुनावी साल है तो अब इन मुद्दों को लेकर सियासत भी तेज होनी तय है।
शाजापुर जिले में आने वाली शुजालपुर विधानसभा की जनसंख्या करीब ढाई लाख है, जिनमें 1 लाख 91 हजार 805 मतदाता है। इसमें पुरूष मतदाताओं की संख्या 1 लाख 411 है। जबकि महिला मतदाता की संख्या 91 हजार 392 है। इस सीट का जाति समीकरण भी दिलचस्प है जो चुनावों को प्रभावित करता है। यहां परमार समाज के 20 हजार मतदाता है जो हमेशा से निर्णायक भूमिका में रहे है। वहीं राजपूत समाज के 22 हजार मतदाता भी हैं। कुल मिलाकर जाति समीकरण के साधे बिना शुजालपुर के किले पर फतह हासिल करना मुश्किल है। लिहाजा आने वाले चुनाव में भी पार्टियों के उम्मीदवारों का नाम इसी आधार पर तय होगा।
शुजालपुर में सियासत की सतह फिलहाल शांत नजर आती है। लेकिन इस शांत सतह के नीचे काफी कुछ उबल रहा है। खासतौर पर इस क्षेत्र में टिकट दावेदारी को लेकर दोनों ही दलों में काफी खींचतान नजर आती है। बीजेपी में जहां में विधायक के अलावा कई नेता टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस में भी दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। शुजालपुर में बीजेपी और कांग्रेस के बीच हमेशा ही कड़ी टक्कर रही है और इस बार भी आसार नजदीकी मुकाबले के ही बन रहे हैं। लेकिन चुनाव में जाने से पहले पार्टियों को अपनी अंदरूनी सियासत से भी पार पाना होगा। दोनों दलों में टिकट के लेकर घमासान मचना तय है। बीजेपी की बात की जाए मौजूदा विधायक जसवंत सिंह हाड़ा एक बार फिर टिकट के प्रबल दावेदार हैं। संगठन में अच्छी पकड़ और नरेंद्र सिंह तोमर के खास माने जाने वाले जसवंत सिंह शुजालपुर सीट से लगातार दो चुनाव जीत चुके हैं और इस बार भी उनका दावा बीजेपी से मजबूत है।
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लगातार दो बार विधायक होने के बावजूद विधानसभा में समस्याओं का अंबार लगा हुआ और क्षेत्रवासी भी बीजेपी विधायक से नाराज हैं। ऐसे में अगर उनका टिकट कटता है तो विजेंद्र सिंह सिसौदिया को मौका मिल सकता है। राजपूत समाज से आने वाले विजेंद सिंह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी हैं। इनके अलावा बबीता परमार सहित कई दूसरे नेता भी बीजेपी से टिकट की दौड़ में शामिल हैं।
वहीं दूसरी और 2003 से सीट पर वनवास झेल रही कांग्रेस की बात करें तो 2008 और 2013 में चुनाव हार चुके महेंद्र जोशी एक बार फिर अपनी दावेदारी में जुट गए हैं। लेकिन लगातार हार उनके खिलाफ जा सकता है। महेंद्र जोशी के अलावा कांग्रेस में योगेंद्र सिंह बंटी भी प्रबल दावेदार हैं। योगेंद्र सिंह पिछली बार कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े थे जो कांग्रेस की हार की बड़ी वजह बनी। इसके अलावा पूर्व केदार सिंह मंडलोई और गजेंद्र सिंह सिसौदिया भी कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट में शामिल हैं। कुल मिलाकर दोनों दलों में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है और सब अपने अपने गणित भी फिट कर रहे हैं लेकिन यहां बड़े नेताओं का आशीर्वाद भी काफी काम आ सकता है।
वेब डेस्क, IBC24