(NSE IPO News/ Image Credit: ANI News)
नई दिल्ली: NSE IPO News: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने बहुप्रतीक्षित IPO के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टर (DRHP) दाखिल कर दिया है। अनुमान है कि यह भारत के पूंजी बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। जिसका आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इस खबर के बाद बाजार में इस इश्यू को लेकर चर्चा काफी तेजी हो गई है।
DRHP के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 तक BSE पर लगभग 5,955 कंपनियां सूचीबद्ध हैं जबकि NSE पर 2,978 कंपनियां लिस्टेड हैं। यानी BSE पर कंपनियों की संख्या लगभग दोगुनी है। इसके बावजूद ट्रेडिंग और कारोबार के बड़े पैमानों पर NSE का दबदबा बरकरार है। कई बड़ी और मिडकैप कंपनियां दोनों एक्सचेंजों पर लिस्टेड हैं। जिससे कारोबार का संतुलन NSE के पक्ष में झुका हुआ है।
सेबी के आंकड़ों के मुताबिक, कैश मार्केट में NSE की हिस्सेदारी लगभग 93% के आसपास रही है। वहीं फ्यूचर्स और ऑप्शंस जैसे डेरिवेटिव्स सेगमेंट में NSE का दबदबा और भी मजबूत है। जहां उसकी हिस्सेदारी लगभग पूरी तरह हावी है। कुल मिलाकर NSE भारत के इक्विटी ट्रेडिंग सिस्टम में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है।
वित्त वर्ष 2026 में NSE का औसत दैनिक कारोबार (ADTV) 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जबकि BSE का कारोबार इससे कम रहा। पिछले कुछ वर्षों में दोनों एक्सचेंजों के कारोबार में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन बाजार हिस्सेदारी के मामले में NSE अब भी लगभग 90 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर बना हुआ है।
वहीं, अगर आर्थिक प्रदर्शन की बात करें तो NSE ने FY26 में 16,601 करोड़ रुपये का राजस्व और 10,302 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। वहीं BSE का राजस्व 4,834 करोड़ रुपये और मुनाफा 2,487 करोड़ रुपये रहा। मार्जिन के मामले में भी NSE थोड़ा आगे है। जिससे उसकी मजबूत वित्तीय स्थिति साफ झलकती है।
NSE का यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। जिसमें करीब 14.89 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे। यह कंपनी की कुल हिस्सेदारी का लगभग 6% होगा। यह IPO लंबे समय से चर्चा में है और पहले भी 2016 में इसकी योजना बनी थी। लेकिन कुछ नियामकीय कारणों से इसे टाल दिया गया था। अब बाजार को उम्मीद है कि इसकी लिस्टिंग भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है।
नोट:-शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।