गोरखपुर, 13 मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले आठ वर्ष में पूरे राज्य में 210 करोड़ पौधे लगवाये, जिससे तेजी से शहरीकरण और औद्योगिक विकास के बावजूद वन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने पहली सोलर सिटी अयोध्या की तर्ज पर 17 नगर निगम क्षेत्रों को ‘सोलर सिटी’ में बदलने के लिए सक्रिय रूप से काम करने की भी घोषणा की।
आदित्यनाथ ने यहां राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम को लेकर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में पेड़ों के अस्तित्व को बनाये रखने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने वृक्षारोपण की निगरानी के लिए उत्तराखंड के वन अनुसंधान संस्थान और छत्तीसगढ़ के एक विश्वविद्यालय को भी जिम्मेदारी दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये संस्थान समय-समय पर पौधों के जीवित रहने की दर का आकलन करते हैं और अपने निष्कर्षों की रिपोर्ट राज्य सरकार को देते हैं।
आदित्यनाथ ने कहा, “पिछले आठ वर्ष में पूरे राज्य में 210 करोड़ पौधे लगाए गए हैं और यह भी सुनिश्चित किया गया है कि उनका अस्तित्व कायम रहे।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लगाए गए लगभग 70-75 प्रतिशत पेड़ बच गए हैं, जबकि निजी और स्वैच्छिक संगठनों द्वारा लगाए गए वृक्षारोपण की जीवित रहने की दर 65-70 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, ‘‘देश भर के राज्यों ने वृक्षारोपण के प्रयास किये हैं लेकिन उत्तर प्रदेश ने इस अवधि के दौरान अपने वन क्षेत्र को बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि उत्तर प्रदेश में तेजी से जनसंख्या वृद्धि, नई औद्योगिक परियोजनाएं और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘कार्बन उत्सर्जन’ को कम करने में मदद करने के लिए ऐसे प्रयास जारी रहने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और धुंध पर भी चिंता व्यक्त की और सवाल किया कि इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई उज्ज्वला योजना के कारण वायु गुणवत्ता में कुछ हद तक सुधार हुआ है और इस योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को मुफ्त रसोई गैस सिलेंडर प्रदान किए गए हैं।
आदित्यनाथ ने कहा कि यह भी सच है कि कई लोग अब भी लकड़ी और कोयला जलाते हैं, जिससे वायु प्रदूषण होता है।
उन्होने लोगों से स्वच्छ ईंधन अपनाने का आग्रह करते हुए कहा, “जब खास तौर पर कोयले या लकड़ी जलाने से धुआं निकलता है तो स्रोत के सबसे नज़दीक रहने वाले लोग सबसे अधिक पीड़ित होते हैं। इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य, खास तौर पर उनके फेफड़ों और आंखों पर पड़ता है।”
उन्होंने वायु प्रदूषण से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देने के लिए अधिक जागरूकता और सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया तथा नदियों को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए वर्षा जल संचयन और बायोगैस जैसे पर्यावरण के अनुकूल उपायों को अपनाने की भी वकालत की।
आदित्यनाथ ने राज्य के सभी 17 नगर निगमों को सौर शहरों के रूप में विकसित करने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि अयोध्या को छह हजार मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता वाले पहले सौर शहर के रूप में विकसित किया गया है जबकि बुंदेलखंड को 5,000 मेगावाट के हरित गलियारे में बदला जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कार्बन उत्सर्जन’ को कम करने और पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रौद्योगिकी और जन जागरूकता का संयोजन जरूरी है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत द्वारा निर्धारित वर्ष 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय और स्थानीय दोनों स्तरों पर प्रयासों को मजबूत किया जाना चाहिए।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से इन कार्यक्रमों में लोगों को सक्रिय रूप से शामिल करने का आग्रह करते हुए कहा, “लोगों की भागीदारी के बिना कोई भी आंदोलन सफल नहीं हो सकता।”
भाषा किशोर जफर सलीम जितेंद्र
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