अखिलेश ने ईसीआई की ‘विश्वसनीयता’ पर सवाल उठाया,कहा-भाजपा को कैसे पता था कि कितने मतदाता हटाए जाएंगे

अखिलेश ने ईसीआई की ‘विश्वसनीयता’ पर सवाल उठाया,कहा-भाजपा को कैसे पता था कि कितने मतदाता हटाए जाएंगे

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  • Publish Date - January 10, 2026 / 05:40 PM IST,
    Updated On - January 10, 2026 / 05:40 PM IST

लखनऊ, 10 जनवरी (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की ‘विश्वसनीयता’ पर सवाल उठाते हुए शनिवार को पूछा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं को मतदाता सूचियों से हटाए जाने वाले मतदाताओं की संख्या के बारे में कैसे पता चला।

लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत में यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया गया। बूथ स्तर के एजेंटों (बीएलए) समेत सभी राजनीतिक दलों ने बिना किसी आपत्ति के इस प्रक्रिया में भाग लिया।

मंगलवार को मसौदा मतदाता सूची जारी होने के बाद यादव ने कहा कि उन्हें तीन करोड़ मतदाताओं के हटाए जाने की आशंका थी। हालांकि, यादव ने कहा कि मसौदा मतदाता सूची जारी होने से पहले ही (जब किसी को यह पता नहीं था कि कितने मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा था कि लगभग चार करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे।

यादव ने बताया कि कन्नौज के एक पूर्व सांसद ने भी कहा कि एक जिले में पहले ही तीन लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिलों के दो विधानसभा क्षेत्र से भी मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे। यादव ने कहा कि अगर भाजपा नेता ऐसे बयान दे रहे हैं, तो निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने बताया था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मंगलवार को उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित किया गया, जिसमें पहले सूचीबद्ध 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ मतदाताओं को हटा दिया गया और 12.55 करोड़ मतदाताओं को बरकरार रखा गया।

रिणवा ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि मृत्यु, स्थायी प्रवास या एकाधिक पंजीकरण के कारण 2.89 करोड़ मतदाताओं, यानी 18.70 प्रतिशत, को मसौदा सूची में शामिल नहीं किया जा सका।

रिणवा ने कहा था कि अंतिम मतदाता सूची इस साल छह मार्च को प्रकाशित की जाएगी। यादव ने कहा कि हमें उम्मीद है कि जब मतदाता पंजीकरण अभियान जैसे इतने बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जा रहे हैं, तो वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे।

बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए यादव ने कहा कि पंचायत चुनाव के ग्रामीण मतदाताओं की कुल संख्या 12.69 करोड़, पूरे राज्य में विधानसभा चुनाव में वोट देने के लिए पात्र मतदाताओं की संख्या 12.56 करोड़ से अधिक कैसे हो सकती है, जबकि वही बीएलओ दोनों चुनावों के लिए मतदाता सूचियां तैयार कर रहे हैं।

यादव ने विधानसभा चुनाव से संबंधित मसौदा मतदाता सूची से 2.88 करोड़ मतदाताओं को हटाए जाने और पंचायत चुनावों के लिए उन्हीं बीएलओ द्वारा 40 लाख मतदाताओं को जोड़े जाने पर संदेह जताया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘क्या पंचायत चुनावों की अंतिम मतदाता सूची को 50 दिनों तक जानबूझकर इस तथ्य को छिपाने के लिए विलंबित किया जा रहा है? जब दोनों मतदाता सूचियां एक समान बीएलओ द्वारा तैयार की गई हैं, तो राज्य के आंकड़े क्यों जारी नहीं किए जा रहे हैं? वे इसमें देरी क्यों कर रहे हैं?’’

सपा प्रमुख ने कहा, ‘‘हम केवल निर्वाचन आयोग से ही इस जानकारी की मांग कर सकते हैं, क्योंकि सत्ता में बैठे लोगों ने पहले ही वोट संख्या 200 तक बढ़ाने के निर्देश दे दिए हैं और हमने उसी के अनुसार अपनी तैयारी कर ली है।’’

भाषा अरूनव जफर संतोष

संतोष