लखनऊ, दो अगस्त (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर 26 हजार से ज्यादा सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद करने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि भाजपा पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों) समाज के बच्चों को शिक्षित नहीं होने देना चाहती।
यादव ने पार्टी राज्य मुख्यालय पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सोमवार को शुरू हो रहे राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान पार्टी के सभी विधायक मिलकर इस मुद्दे को उठाएंगे।
उन्होंने इस मौके पर ग्राफ पेश करते हुए कहा कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2017 तक भाजपा की सरकार बनने पहले प्रदेश में एक लाख 13 हजार 938 सरकारी प्राथमिक स्कूल थे लेकिन अभी तक उनमें से 26 हजार स्कूल बंद किये जा चुके हैं।
यादव ने कहा कि सबसे ज्यादा 758 प्राइमरी स्कूल लखीमपुर खीरी में बंद हुए हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा सीतापुर में 650 स्कूल, प्रयागराज में 638 और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपने क्षेत्र यानी गोरखपुर में लगभग 500 प्राइमरी स्कूल बंद किया जा चुके हैं।
सपा प्रमुख ने कहा कि जहां सरकारी प्राइमरी स्कूलों में वर्ष 2017 तक एक करोड़ 17 लाख बच्चे पढ़ रहे थे, वही आंकड़ा 2026 में घटकर लगभग 89 लाख रह रह गया है। इस घटी संख्या में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के बच्चों की तादाद 25 लाख है।
उन्होंने यह भी कहा कि जहां वर्ष 2017 तक प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में चार लाख शिक्षक तैनात थे, आज वही संख्या घटकर तीन लाख 40 हजार रह गयी है। भर्ती करना तो दूर सरकारी आंकड़ा बताता है कि 81000 पद खाली पड़े हुए हैं।
यादव ने दावा किया कि सरकारी प्राइमरी स्कूल बंद होने से बेटियों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ा है और जहां मार्च 2017 तक 61.57 लाख लड़कियां सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ रही थीं, वही अब उनकी संख्या घटकर 45 लाख रह गयी है।
उन्होंने कहा, ”जो सरकारी आंकड़े बता रहे हैं, उनमें यह बात सामने आई है कि सात हजार सरकारी स्कूलों में बिजली नहीं है और 2300 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं है। इसके अलावा 576 स्कूलों में पीने का पानी उपलब्ध नहीं है और 23000 ऐसे स्कूल है जहां कंप्यूटर की शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है।”
सपा प्रमुख ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान पार्टी के सभी विधायक मिलकर इस मुद्दे को उठाएंगे।
भाषा सलीम रंजन
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