Allahabad High Court Land Acquisition Order/Image Credit: X Handle
Allahabad High Court Land Acquisition Order: लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सड़क चौड़ीकरण के लिए निजी भूमि लेने के मामले में कहा है कि प्रशासन जमीन मालिक की सहमति के बिना जबरन बिक्री विलेख नहीं करा सकता। अदालत ने शुक्रवार को दिए आदेश में कहा कि यदि जमीन मालिक स्वेच्छा से जमीन बेचने को तैयार है और दोनों पक्ष कीमत पर सहमत हो जाते हैं तो ही बिक्री विलेख के जरिये जमीन ली जा सकती है। अन्यथा, राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। अदालत ने अधिकारियों को याचियों को परेशान नहीं करने और बिक्री के लिए उनकी सहमति जबरन हासिल नहीं करने का निर्देश दिया है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि जमीन विक्रय विलेख के माध्यम से तभी खरीदी जा सकती है जब मालिक स्वेच्छा से बेचने के लिए सहमत हो और दोनों पक्ष बिक्री मूल्य पर पारस्परिक रूप से सहमत हों और यदि ऐसी कोई सहमति नहीं है, तो राज्य सरकार को वैधानिक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का पालन करना होगा। (Allahabad High Court Land Acquisition Order) इसके साथ ही अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं को परेशान न करें या बिक्री कार्यों को निष्पादित करने के लिए जबरन उनकी सहमति न लें। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि स्वैच्छिक बिक्री और अनिवार्य अधिग्रहण दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।
Allahabad High Court Land Acquisition Order: न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अभ्देश कुमार चौधरी की पीठ ने यह आदेश बलरामपुर के देवीपाटन तुलसीपुर गांव में सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन लिए जाने से संबंधित अखिलेश कुमार पंकज व सात अन्य की याचिका पर दिया। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन खरीदने की प्रक्रिया जारी है। करीब 80 प्रतिशत जमीन राज्य सरकार खरीद चुकी है और लगभग 104 रजिस्ट्री भी हो चुकी हैं। हालांकि याचियों से संपर्क नहीं हो सका और उनकी जमीन बिक्री के लिए सहमति प्राप्त नहीं की जा सकी। याचियों की ओर से कहा गया कि वे अपनी जमीन बेचने के इच्छुक नहीं हैं। इसके बावजूद अधिकारी उन्हें एक ऐसी दर पर जमीन बेचने के लिए दबाव बना रहे हैं, जिसे वे स्वीकार नहीं करते।
इस पर अदालत ने कहा कि कानून इस संबंध में स्पष्ट है। अदालत ने कहा कि यदि जमीन मालिक स्वेच्छा से जमीन बेचने को तैयार है और राज्य सरकार के साथ बिक्री मूल्य पर बातचीत के बाद सहमति बन जाती है तो वह जमीन बेच सकता है। लेकिन, सहमति नहीं बनने की स्थिति में राज्य को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत अधिसूचना जारी कर कानून के मुताबिक भूमि अधिग्रहण करना होगा। (Allahabad High Court Land Acquisition Order) पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचियों को परेशान न करें और बिक्री विलेख के माध्यम से जमीन बेचने के लिए उनकी सहमति जबरन हासिल न करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई याची अपनी इच्छा से जमीन बेचता है तो कानून के अनुसार बिक्री विलेख निष्पादित किया जा सकता है।
इन्हें भी पढ़ें:-