लखनऊ, 20 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक मामले में इसी साल 16 मार्च के अपने आदेश में लोकायुक्त के खिलाफ की गईं प्रतिकूल टिप्पणियों को वापस ले लिया है।
अदालत ने मंगलवार को अपने आदेश में यह निर्देश भी दिया कि लोकायुक्त का नाम विरोधी पक्षों की सूची से हटा दिया जाए और उनकी जगह उप-लोकायुक्त का नाम शामिल किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने यह आदेश मोहम्मद सलीम नामक व्यक्ति की एक जनहित याचिका पर दिया।
याचिका के अनुसार ग्राम विकास अधिकारी अहमद हसन ने लखीमपुर खीरी में तैनाती के दौरान सरकारी कोष से 6,02,995 रुपये की धनराशि फुरकान नामक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के खाते में भेज दी थी।
इस मामले की जांच के बाद आठ जून 2020 को अहमद हसन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के तहत उसकी एक वेतन वृद्धि रोके जाने के साथ-साथ उसकी सेवा पुस्तिका में एक प्रतिकूल प्रविष्टि की गयी थी।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इस मामूली दंड से हसन का दुस्साहस बढ़ गया और 10 अप्रैल 2023 को उसने फिर से सरकारी कोष से 95,94,015 रुपये की राशि फुरकान अली के निजी खाते में भेज दी।
आरोप है कि दूसरी घटना के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं किये जाने पर लोकायुक्त के समक्ष एक शिकायत दर्ज की गई थी। बाद में इस शिकायत को उप-लोकायुक्त के पास भेज दिया गया था।
हालांकि उप-लोकायुक्त ने यह देखते हुए मामले को बंद कर दिया कि ग्राम विकास अधिकारी को पहले ही इसी तरह के एक पुराने मामले में विभागीय दंड दिया जा चुका है।
उच्च न्यायालय ने इन आरोपों का संज्ञान लेते हुए 16 मार्च 2026 को राज्य सरकार, लोकायुक्त तथा अन्य विरोधी पक्षों से जवाब मांगा, जिसके बाद सभी संबंधित पक्षों ने अदालत को जवाब दिया।
लोकायुक्त ने अपने जवाब में स्पष्ट किया था कि फुरकान अली से संबंधित आदेश खुद उन्होंने नहीं बल्कि उप-लोकायुक्त ने पारित किया था, लिहाजा 16 मार्च के आदेश में लोकायुक्त के खिलाफ की गई टिप्पणियां अनुचित थीं और उन्हें वापस लिया जाना चाहिए।
पीठ ने इन दलीलों पर विचार करने के बाद अपने पिछले आदेश में की गईं टिप्पणियों को वापस ले लिया। मामले को अगली सुनवाई की तिथि 10 जुलाई तय की गयी है।
भाषा सं. सलीम जोहेब
जोहेब