संभल में नमाज से रोकने और सामाजिक बहिष्कार का आरोप, प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश

Ads

संभल में नमाज से रोकने और सामाजिक बहिष्कार का आरोप, प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश

  •  
  • Publish Date - July 24, 2026 / 06:42 PM IST,
    Updated On - July 24, 2026 / 06:42 PM IST

संभल, 24 जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक मुस्लिम व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि उसे और उसके परिवार को जुमे की नमाज अदा करने से रोका गया तथा दूसरे मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने उनका सामाजिक बहिष्कार किया। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला हयातनगर थाना क्षेत्र के मंडली समसपुर गांव का है, जहां धुन्ना समुदाय के मोहम्मद वसीम ने आरोप लगाया कि तुर्क समुदाय के कुछ लोगों ने उन्हें और उनके परिवार को जुमे की नमाज अदा करने से रोका तथा धार्मिक गतिविधियों से अलग कर दिया।

यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभल दौरे के कुछ दिन बाद सामने आया है। मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के दौरान कथित तौर पर कहा था, ‘‘तुर्कों की तुर्काई नहीं चलेगी।’’

वसीम ने बताया कि वह देवबंदी विचारधारा को मानते हैं। उन्होंने कहा कि गांव में चार मस्जिदें हैं, जिनमें 120 वर्ष पुरानी मुख्य मस्जिद भी शामिल है, जहां देवबंदी और बरेलवी दोनों परंपराओं को मानने वाले लोग एक सदी से अधिक समय से साथ नमाज अदा करते रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पांच जनवरी, 2024 को अजान देने, इमाम को दिए जाने वाले चंदे और उनके भोजन की व्यवस्था को लेकर विवाद हुआ था। यह मामला 26 जनवरी, 2024 को तत्कालीन थाना प्रभारी और स्थानीय बुजुर्गों की मौजूदगी में सुलझा लिया गया था।

वसीम के अनुसार, समझौते में तय हुआ था कि इमाम ही अजान देंगे, नमाजियों की आर्थिक क्षमता के अनुसार चंदा एकत्र किया जाएगा और इमाम बारी-बारी से प्रत्येक घर में भोजन करेंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 18 महीने तक यह व्यवस्था सुचारू रूप से चलने के बाद मस्जिद प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों ने खुद अजान देना शुरू कर दिया, उनके परिवार से चंदा लेना बंद कर दिया और इमाम के उनके घर भोजन करने की परंपरा भी समाप्त कर दी।

वसीम ने आरोप लगाया कि मस्जिद के मुतवल्ली अतीक अहमद और उनके सहयोगियों ने व्यक्तिगत नमाज और जुमे की सामूहिक नमाज को मिलाकर छह नमाज की एक नयी व्यवस्था शुरू की, जिसका उन्होंने और उनके परिवार ने विरोध किया।

उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष तीन जुलाई को जुमे की नमाज के बाद उनसे कहा गया कि जब तक वह नई व्यवस्था स्वीकार नहीं करते, तब तक उन्हें मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

वसीम ने आरोप लगाया, ‘‘मैं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के धुन्ना समुदाय से हूं, जबकि वे तुर्क समुदाय से हैं। उन्होंने मेरा सामाजिक बहिष्कार कर दिया है और मेरे परिवार पर गांव छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है।’’

पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि गांव में रहने वाले पांच धुन्ना परिवारों में से एक परिवार के सदस्य वसीम ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर शिकायत दी।

बिश्नोई ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘वसीम ने बताया कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है और उन्हें जुमे की नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धुन्ना समुदाय से होने के कारण मस्जिद का प्रबंधन करने वाले समूह द्वारा उनके परिवार को लंबे समय से परेशान किया जा रहा है।’’

पुलिस अधीक्षक ने कहा, ‘‘यह गंभीर मामला है, क्योंकि यह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा है। उन्हें संबंधित थाने में लिखित शिकायत देने के लिए कहा गया है। थाना प्रभारी को संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने और उनके मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।’’

एक सवाल के जवाब में बिश्नोई ने कहा कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पिछले डेढ़ वर्ष से मस्जिद के इमाम उनके घर भोजन के लिए नहीं आ रहे हैं, उन्हें मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी जा रही है और उनका ‘जकात’ (दान) भी स्वीकार नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने पहले भी थाने में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया था, लेकिन वह सफल नहीं हुआ।

पुलिस ने बताया कि मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और शिकायत की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भाषा

सं, आनन्द रवि कांत