उप्र: उच्च न्यायालय ने लखनऊ में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर सरकार को लगायी फटकार

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उप्र: उच्च न्यायालय ने लखनऊ में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर सरकार को लगायी फटकार

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  • Publish Date - August 25, 2026 / 07:55 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 07:55 PM IST

लखनऊ, 25 अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राज्य की राजधानी में ई-रिक्शा की तेजी से बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि जब इनकी संख्या शहर की यातायात व्यवस्था पर दबाव डाल रही है तो सरकार हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकती।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने 21 अगस्त को लखनऊ में यातायात प्रबंधन से संबंधित सूरज सिंह विसेन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं।

पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘राज्य सरकार इस मुद्दे पर सोई नहीं रह सकती। उसे जागना होगा और एक सही नीति बनाकर इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटना होगा। यह एक गंभीर मुद्दा है, जिसे जल्द से जल्द हल करने की जरूरत है।’’

अदालत को बताया गया कि लखनऊ में करीब 80 हजार ई-रिक्शा चल रहे हैं और इनके लिए पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण चौराहों और प्रमुख सड़कों के आसपास अक्सर यातायात बाधित होता है।

पीठ ने कहा कि प्रत्येक सड़क की वाहनों को संभालने की एक निश्चित क्षमता होती है लेकिन लखनऊ में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चलने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

अदालत ने अपर महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह सरकार की प्रस्तावित नीति के संबंध में परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव से स्पष्ट निर्देश प्राप्त करें।

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को यह बताना होगा कि ई-रिक्शा की लगातार बढ़ती बिक्री और संचालन को नियंत्रित करने के लिए वह क्या कदम उठाने की योजना बना रही है।

सुनवाई के दौरान यातायात पुलिस का अलग कैडर बनाने का मुद्दा भी उठा।

पीठ ने कहा कि यातायात प्रबंधन आम पुलिसकर्मियों के कार्यों से अलग है और सरकार को यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए यातायात पुलिस का अलग कैडर बनाने पर विचार करना चाहिए।

अदालत ने अगली सुनवाई में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया, जिसमें लखनऊ नगर निगम की रिपोर्ट और अदालत द्वारा गठित समिति के प्रस्ताव शामिल हों।

मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।

भाषा सं. सलीम जितेंद्र

जितेंद्र