बिना सोचे-समझे गैंग चार्ट को मंजूरी देने पर बहराइच के एसपी और डीएम को लगी फटकार

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बिना सोचे-समझे गैंग चार्ट को मंजूरी देने पर बहराइच के एसपी और डीएम को लगी फटकार

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  • Publish Date - September 18, 2026 / 06:44 PM IST,
    Updated On - September 18, 2026 / 06:44 PM IST

लखनऊ, 18 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ‘गैंगस्टर्स अधिनियम’ के तहत “गैंग चार्ट” को बिना ‘सोचे-समझे’ और ‘निष्पक्षता कायम रखे’ बगैर मंज़ूरी देने के लिए बहराइच के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिलाधिकारी (डीएम) को कड़ी फटकार लगाई है।

न्यायमूर्ति मनीष माथुर की लखनऊ पीठ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वरिष्ठ अधिकारियों को संवैधानिक अदालतों की ओर से समय-समय पर सुनाए गए उन फैसलों की जानकारी नहीं है, जिनमें गैंगस्टर्स अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू करते समय विवेक का इस्तेमाल करने और निष्पक्षता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

अदालत ने यह टिप्पणी बब्बू शाह नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिन्होंने बहराइच के पायागपुर थाने में अपने खिलाफ गैंगस्टर्स अधिनियम के तहत शुरू की गई कार्यवाही को चुनौती दी थी।

अदालत ने पाया कि न तो एसपी और न ही डीएम ने यह दर्ज किया था कि याचिकाकर्ता की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की गई थी।

गैंग चार्ट वह दस्तावेज है जिसके जरिए पुलिस किसी आरोपी के खिलाफ गैंगस्टर्स अधिनियम लगाने का प्रस्ताव रखती है। इस चार्ट में उस व्यक्ति का आपराधिक इतिहास, संगठित आपराधिक गतिविधियों में उसकी कथित संलिप्तता और कानून के तहत कार्यवाही शुरू करने के आधार बताए जाते हैं।

कार्यवाही शुरू होने से पहले एसपी और डीएम समेत वरिष्ठ अधिकारियों को गैंग चार्ट की जांच करके मंजूरी देनी होती है।

एसपी ने 11 नवंबर 2021 को गैंग चार्ट को मंज़ूरी दी, जबकि डीएम ने इसे 15 नवंबर 2021 को स्वीकार किया।

अदालत ने कहा कि मंज़ूरी का यह क्रम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि दोनों अधिकारियों ने एक-दूसरे से आवश्यक परामर्श नहीं किया था।

अदालत ने कहा कि गैंग चार्ट तैयार करने को केवल एक प्रक्रियात्मक औपचारिकता नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसके गंभीर आपराधिक परिणाम हो सकते हैं।

अदालत ने कहा कि इसलिए, चार्ट को मंज़ूरी देने से पहले आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि की ठीक से जांच की जानी चाहिए और अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से अपना दिमाग लगाना चाहिए।

अदालत ने कहा कि मंज़ूरी देने वाले प्राधिकरण को अपने स्वतंत्र विवेक का उपयोग करने के बाद अपनी संतुष्टि दर्ज करनी चाहिए।

मंज़ूरी को कानूनी रूप से अनुचित पाते हुए अदालत ने 15 नवंबर 2021 के गैंग चार्ट, 19 फरवरी 2022 की चार्जशीट, 7 दिसंबर 2022 के संज्ञान व समन आदेश और बहराइच में दर्ज इस मामले से जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को संवैधानिक अदालतों द्वारा तय किए गए कानून का पालन करने और राज्य की कार्रवाई में निष्पक्षता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।

भाषा सं जफर जोहेब

जोहेब